जून का महीना आते ही 1983 की विश्व विजेता टीम के सदस्य बलविंदर संधू की सरगर्मियां बढ़ जाती हैं। फाइनल में खतरनाक ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज को बोल्ड करने वाले संधू ने 83 की पूरी टीम को एकजुट करने का आज भी बीड़ा उठा रखा है। इस टीम पर बनीं फिल्म 83 के निर्माण में भी संधू का बड़ा योगदान था। संधू 83 की जीत का सबसे बड़ा मंत्र टीम के आपसी जुड़ाव को मानते हैं। वह बताते हैं कि टीम के हर सदस्य का आपसी जुड़ाव बेहद मजबूत था, जो आज तक कायम है।
व्हाट्स ग्रुप से जुड़ी है टीम
संधू के मुताबिक पूरी टीम आज भी व्हाट्स एप ग्रुप के जरिए जुड़ी हुई है, जिसमें 1983 के दौरे के तरह आज भी हंसी-ठिठोली चलती रहती है। 83 के दौर पर भी टीम का हर सदस्य मजाक में एक दूसरे की टांग खीचता रहता था, लेकिन यह सब हंसी के लिए होता था। कोई किसी की बात का बुरा नहीं मानता था।
कलाकारों के बीच भी टीम जैसा हो गया था जुड़ाव
संधू बताते हैं कि जब 83 फिल्म बन रही थी और कपिल का रोल रणवीर सिंह को दिया गया था, ज्यादातर कलाकार नए थे। तब उन्होंने फिल्म के निर्देशक को बताया था कि उनकी सफलता में टीम बांडिंग (आपसी जुड़ाव) का बहुत बड़ा हाथ था। कलाकारों के बीच जुड़ाव कैसे बनाया जाए, इसके लिए धर्मशाला में 10 दिन का शिविर लगाया गया था। इसके बाद रणवीर और दूसरे कलाकारों के बीच इस तरह का जुड़ाव हो गया, जैसा 83 की टीम के बीच था।
साल में एक बार जरूर मिलती है टीम
संधू बताते हैं कि पूरी टीम की कोशिश रहती है कि वे साल में एक बार आपस में जरूर मिलें। 25 जून या उसके आसपास जरूर ऐसा कोई कार्यक्रम रखा जाता है, जिसमें पूरी टीम एक साथ जुटती है और पुरानी यादों में खो जाती है।
टीम को बहुत याद आते हैं यशपाल
इस बार टीम के साथ यशपाल शर्मा नहीं थी, उनका देहांत हो चुका है। संधू कहते हैं कि यशपाल को हम सभी बेहद याद करते हैं। उनका जाना टीम को बेहद अखरा है। संधू के मुताबिक यह यशपाल की वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच में खेली गई 89 रन की पारी थी, जिसने पहले ही मैच में बड़ा उलटफेर किया था। कपिल देव की जिंबाब्वे के खिलाफ 175 रन की पारी, कपिल का फाइनल में रिचड्र्स का कैच, मोहिंदर अमरनाथ का ऑलराउंड प्रदर्शन के यादगार लम्हों के अलावा यशपाल का जीत में बड़ा योगदान था।