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बाबर आजम को छोड़ क्यों शर्म से झुके हैं बाकि पाकिस्तानी खिलाड़ियों के चेहरे?

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babar azam
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ब्रिसबेन टेस्ट मैच में पाकिस्तान की टीम को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। टेस्ट मैच के चौथे ही दिन ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को एक पारी और पांच रनों से हरा दिया। टी-20 सीरीज से पाकिस्तान की टीम की हार का सिलसिला लगातार चला आ रहा है।

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बवाल इसलिए और ज्यादा बड़ा हो गया है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया से पहले पाकिस्तान की टीम को अपने घर में श्रीलंका की बी टीम के खिलाफ भी टी-20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान क्रिकेट में काफी कुछ बदला है। सबसे बड़ा बदलाव पाकिस्तान टीम में हुआ था। जब सरफराज अहमद को हटाकर टी-20 की कमान बाबर आजम को और टेस्ट टीम की कमान अजहर अली को दी गई। इन बदलावों को लेकर चल रहे विवादों को अभी छोड़ देते हैं।

फिलहाल तो बात करते हैं कि कप्तान बदले, पिचें बदली, स्टेडियम बदले और यहां तक कि खेल का फॉर्मेट भी बदल गया लेकिन पाकिस्तान टीम की किस्मत नहीं बदली। वो पहले भी हार रही थी अब भी हार रही है। इस हार के सिलसिले में अगर एक खिलाड़ी है जो अपना असर दिखाने में कामयाब हुआ है तो वो हैं बाबर आजम। जिन्होंने ब्रिसबेन टेस्ट की दूसरी पारी में बेहतरीन शतक लगाया। 
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पूरे दौरे में चला है बाबर आजम का बल्ला

ब्रिसबेन टेस्ट की पहली पारी में सिर्फ एक रन पर आउट होने के बाद दूसरी पारी में बाबर आजम बिल्कुल नए अवतार में दिखे। वो जब क्रीज पर आए तब तक पाकिस्तान की टीम की हार तय हो चुकी थी। देखना बस ये था कि चौथे दिन पाकिस्तान की टीम कितनी देर संघर्ष करती है।

बाबर आजम ने अकेले दम पर संघर्ष का मोर्चा संभाला। तारीफ मोहम्मद रिजवान की भी करनी चाहिए जिन्होंने बखूबी बाबर आजम का साथ दिया। बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान ने कम से कम इतना तो किया ही कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए मेहनत करनी पड़ी। 

चार घंटे से ज्यादा का वक्त उन्होंने उस माहौल में क्रीज पर बिताया जहां उन्हें ये अच्छी तरह पता था कि इस संघर्ष के बाद भी अंत में उनकी टीम को हार का सामना ही करना है लेकिन उन्होंने अपनी टीम की हार को कम से कम चार घंटे के लिए टाला। जो सिर्फ 25 साल के बाबर आजम की परिपक्वता को दिखाता है।

बाबर आजम ने 255 मिनट बल्लेबाजी की। 173 गेंदों का सामना किया। 13 चौके लगाए और 104 रन बनाकर वो आउट हुए। लेकिन पवेलियन लौटने से पहले उन्होंने ये संदेश दे दिया कि पाकिस्तान क्रिकेट में इस वक्त अगर कुछ सकारात्मक है तो वो बस उनका नाम है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले टेस्ट मैच में अगर कोई खिलाड़ी भरपूर आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा तो वो बाबर आजम ही होंगे क्योंकि उन्हें पता है कि ऑस्ट्रेलिया की पिच पर शतक लगाने का मायने क्या होता है। 
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बाबर आजम की बल्लेबाजी में क्या खास था?  

बाबर आजम लिमिटेड ओवर में दुनिया के बड़े बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। करीब चार साल के वनडे करियर और 74 वनडे मैचों में उन्होंने 11 शतक लगाए हैं। 15 अर्धशतक और करीब 55 की औसत उन्हें फटाफट क्रिकेट में स्थापित करने वाला आंकड़ा है। 36 टी-20 मैचों में भी उनकी औसत 50 से ज्यादा की है।

टी-20 मैचों में उनकी स्ट्राइक रेट भी सवा सौ पार है। यही वजह है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन पर भरोसा करते हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे में उन्हें टी-20 टीम की कमान सौंपी थी। टी-20 मैचों में भी पाकिस्तान की टीम को हार का सामना जरूर करना पड़ा लेकिन बाबर आजम ने कुल 115 रन बनाए थे। इसमें पहले टी-20 में नॉट आउट 59 और दूसरे में पचास रन शामिल हैं। इन आंकड़ों के बाद भी बाबर आजम के टेस्ट टेंपरामेंट पर सवाल रहे हैं।

ब्रिसबेन टेस्ट से पहले उनके खाते में सिर्फ एक टेस्ट शतक था। लेकिन ब्रिसबेन में बेहद मुश्किल परिस्थिति में उन्होंने कमाल की संयमित पारी खेली। क्रीज पर अच्छी तरह निगाह जमाने के बाद भी उन्होंने बेवजह शॉट्स नहीं लगाए। सीरीज में पहली बार ऐसा लगा कि वो अपने साथ साथ टीम के लिए खेले। किसी भी टेस्ट टीम के बेहतर प्रदर्शन के लिए मिडिल ऑर्डर में जिस तरह का जिम्मेदार बल्लेबाज होना चाहिए वो बाबर आजम में दिखाई दिया। बाबर आजम जितनी देर क्रीज पर रहे उन्होंने साझेदारियों पर जोर दिया।    
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