भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अब एशिया कप ट्रॉफी विवाद को सुलझाने के लिए सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। भारत ने पिछले महीने दुबई में खेले गए एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को पांच विकेट से हराकर खिताब जीता था, लेकिन एक महीने बीत जाने के बाद भी ट्रॉफी अब तक मुंबई नहीं पहुंची है।
नकवी से ट्रॉफी न लेने का मामला
ट्रॉफी विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने फाइनल के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। नकवी न सिर्फ पाकिस्तान के मंत्री हैं, बल्कि एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष भी हैं। भारतीय टीम प्रबंधन का मानना था कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तानी मंत्री से ट्रॉफी लेना उचित नहीं होगा। इसके बाद नकवी ने घोषणा की थी कि वह खुद ट्रॉफी भारत को सौंपेंगे, लेकिन अब तक इस पर कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया गया है।
बीसीसीआई का इंतजार जारी
बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि ट्रॉफी न सौंपे जाने से भारतीय बोर्ड नाराज है। उन्होंने बताया, 'एक महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन ट्रॉफी अब तक हमारे पास नहीं पहुंची। हमने करीब दस दिन पहले एसीसी अध्यक्ष को पत्र भी लिखा था, पर अभी तक उनके रवैये में कोई बदलाव नहीं है।'
सैकिया ने उम्मीद जताई कि ट्रॉफी एक या दो दिन में मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय पहुंच जाएगी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं होता, तो बीसीसीआई चार नवंबर को दुबई में होने वाली आईसीसी की तिमाही बैठक में यह मुद्दा औपचारिक रूप से उठाएगा।
औपचारिक समाधान की कमी
सूत्रों के मुताबिक, नकवी फिलहाल अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि भारतीय खिलाड़ी भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय समारोह या कार्यक्रम में ट्रॉफी व्यक्तिगत रूप से प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, बीसीसीआई इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है और आधिकारिक रूप से ट्रॉफी की तत्काल वापसी चाहता है। सैकिया ने कहा, 'हम पूरी तरह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तैयार हैं। भारतीय प्रशंसकों को मैं भरोसा दिलाता हूं कि ट्रॉफी भारत लौटेगी, बस समय तय नहीं है, लेकिन वह दिन दूर नहीं।'
गुवाहाटी टेस्ट में समय बदलेगा
सैकिया ने यह भी बताया कि अगले महीने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज़ में गुवाहाटी में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट में खेल के सत्रों के क्रम में बदलाव हो सकता है। क्षेत्र में जल्दी सूर्योदय और सूर्यास्त को देखते हुए लंच से पहले चाय का सत्र आयोजित करने पर विचार चल रहा है।