ऋषभ पंत और महेन्द्र सिंह धोनी इस सीजन के सबसे सफल कप्तान हैं।
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चेन्नई सुपरकिंग्स के बाद दिल्ली की टीम आईपीएल 2021 के प्लेऑफ में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। शुक्रवार को पंजाब ने कोलकाता को हरा दिया और मॉर्गन की टीम की हार के साथ ही दिल्ली का प्लेऑफ में पहुंचना तय हो गया। दिल्ली लगातार दूसरी बार प्लेऑफ में पहुंची है। इससे पहले श्रेयस अय्यर की कप्तानी में दिल्ली फाइनल तक पहुंची थी। वहीं महेन्द्र सिंह धोनी 14 में 11 बार अपनी टीम को प्लेऑफ में पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। धोनी इस सीजन के सबसे अनुभवी कप्तान हैं, जबकि ऋषभ सबसे युवा हैं। इन दोनों ही कप्तानों ने अपनी टीम को प्लेऑफ में पहुंचाया है। यहां हम यही समझने की कोशिश करेंगे कि आखिरी दोनों की कप्तानी में क्या समानताएं हैं और कैसे इन दोनों ने अपनी टीम को लगातार मैच जिताए हैं।
धोनी के अनुभव का जवाब नहीं
महेन्द्र सिंह धोनी क्रिकेट जगत में दुनिया के सबसे बेहतरीन कप्तानों में से एक हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कप्तानी की छाप छोड़ी है और भारत को कई अहम ट्रॉफियां दिलाई हैं। इस सीजन चेन्नई प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम बनी। धोनी विकेटकीपिंग करते समय पिच और हालातों का अंदाजा बेहतर तरीके से लगाते हैं और अक्सर यह पढ़ लेते हैं कि बल्लेबाज किस दिशा में शॉट लगाना चाह रहा है और किस गेंदबाज को टारगेट करना चाहता है। इसी के हिसाब से वो गेंदबाजी और फील्डिंग में बदलाव करते हैं, जिसके चलते उनकी टीम के सफलता मिली है। बल्लेबाजी में भी धोनी ने कई बार हालातों के हिसाब से बैटिंग ऑर्डर में भी बदलाव किया है।
क्या है पंत की खासियत
इस आईपीएल के सबसे युवा कप्तान ऋषभ पंत को पॉन्टिंग के अनुभव का फायदा मिल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक रिकी पॉन्टिंग मैच के पहले और बाद में पंत को जो बातें बताते हैं वो काफी काम की होती हैं। इसके साथ ही पंत भी विकेटकीपिंग करते हैं और उन्हें भी उन सभी चीजों का फायदा मिलता है, जो धोनी के साथ है। हालांकि पंत की समझ और धोनी की समझ में जमीन आसमान का फर्क है, लेकिन पंत को अपने गेंदबाजों को चलाना भली भांति आता है। इसके अलावा दिल्ली का गेंदबाजी अटैक सबसे ज्यादा संतुलित है और रबादा, अश्विन जैसे गेंदबाज किसी भी हालात में गेंदबाजी कर सकते हैं और मैच जिता सकते हैं। इससे पंत का काम और आसान होता है।
दोनों में क्या है समानता
पंत और धोनी दोनों विकेटकीपर हैं और विकेट पीछे से फील्ड सेट करने में उन्हें आसानी होती हैं। साथ ही पिच में बाउंस, स्विंग, टर्न और पेस का भी बेहतर अंदाजा होता है। ये दोनों ही यह भी समझ पाते हैं कौन सा गेंदबाज किस दिन बेहतरीन लय में है। इसी के अनुसार गेंदबाजी में बदलाव करते हैं। बल्लेबाज के हाव-भाव समझने में भी विकेट के पीछे से आसानी होती है। वहीं पंत हमेशा ही धोनी से बात करते रहते हैं और उनसे सीखने की कोशिश करते हैं। वो पिछले कई सालों से ऐसा करते आ रहे हैं। इसका फायदा भी पंत को मिला है और धोनी के तरकश के कुछ तीर अब पंत के पास भी हैं।
क्या है अलग बातें
धोनी मैच के दौरान प्रभावी फैसले लेने में सक्षम हैं, जबकि पंत और पॉन्टिंग साथ मिलकर पहले से ज्यादा बेहतर प्लानिंग बनाते हैं। धोनी ने सीमित खिलाड़ियों का बेहतर उपयोग करके नतीजे हासिल किए हैं, जबकि पंत के बाद बेहतरीन गेंदबाज हैं, जो हर पिच और मैदान में अच्छी गेंदबाजी करते हैं। एक बल्लेबाज को तौर पर धोनी का प्रदर्शन बहुत ही साधारण रहा है, जबकि पंत ने कुछ अच्छी पारियां खेली हैं।