दो टेस्ट में अंपायर के पांच गलत फैसले टीम इंडिया के खिलाफ गए। ये निर्णय ऐसे थे जो इस सीरीज में भारतीय टीम को इतिहास रचने में मदद कर सकते थे। मगर चार टेस्ट की मौजूदा सीरीज के लिए निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को स्वीकार न कर टीम इंडिया ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
हालांकि ब्रिसबेन में हार के बाद भी भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने डीआरएस की अहमियत को नजरअंदाज ही किया है। मगर इस मामले में मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों की राय अलग है और उनका कहना है कि यदि बीसीसीआई ने डीआरएस को स्वीकार नहीं किया तो उसे परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। मेजबान ऑस्ट्रेलिया टीम भी इसे लागू करने के पक्ष में है।
टीम इंडिया के वरिष्ठ ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को डीआरएस मौजूदा स्वरूप में ही स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि इससे करीबी टेस्ट मैचों में काफी मदद मिल सकती है। भज्जी बोले, अगर आप देखें तो दोनों टेस्ट मैचों में भारत कड़ी टक्कर दे रहा था। मगर अहम मौकों पर अंपायरों के गलत फैसलों ने बड़ा अंतर पैदा कर दिया।