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अंपायर के गलत फैसलों से मिली हार के बाद DRS पर मचा घमासान

Mon, 22 Dec 2014 12:21 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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दो टेस्ट में अंपायर के पांच गलत फैसले टीम इंडिया के खिलाफ गए। ये निर्णय ऐसे थे जो इस सीरीज में भारतीय टीम को इतिहास रचने में मदद कर सकते थे। मगर चार टेस्ट की मौजूदा सीरीज के लिए निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को स्वीकार न कर टीम इंडिया ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
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हालांकि ब्रिसबेन में हार के बाद भी भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने डीआरएस की अहमियत को नजरअंदाज ही किया है। मगर इस मामले में मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों की राय अलग है और उनका कहना है कि यदि बीसीसीआई ने डीआरएस को स्वीकार नहीं किया तो उसे परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। मेजबान ऑस्ट्रेलिया टीम भी इसे लागू करने के पक्ष में है।

टीम इंडिया के वरिष्ठ ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को डीआरएस मौजूदा स्वरूप में ही स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि इससे करीबी टेस्ट मैचों में काफी मदद मिल सकती है। भज्जी बोले, अगर आप देखें तो दोनों टेस्ट मैचों में भारत कड़ी टक्कर दे रहा था। मगर अहम मौकों पर अंपायरों के गलत फैसलों ने बड़ा अंतर पैदा कर दिया।
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लक्ष्मण, अजहरुद्दीन और वेंगसरकर भी पक्ष में

वहीं पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण का मानना है कि अगर हॉटस्पॉट और हॉकआई तकनीक में सुधार कर लिया जाए तो फिर डीआरएस को अपनाने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। इन दोनों तकनीकों का इस्तेमाल एलबीडब्ल्यू और कैच के निर्णय देने के लिए किया जाता है।

पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस बारे में राय व्यक्त की कि अगर आईसीसी ने इसे मान्यता दे दी है तो बीसीसीआई इसे लागू करने में आनाकानी क्यों कर रहा है। ब्रिसबेन टेस्ट में ऐसे कई निर्णय थे जो डीआरएस के माध्यम से भारत के पक्ष में जा सकते थे। मेरा मानना है कि या तो आप पूरी तरह तकनीक का इस्तेमाल करें या फिर बिल्कुल ही न करें।

पूर्व कप्तान दलीप वेंगसरकर का कहना है कि मैं पहले इसे अपनाने के पक्ष में नहीं था, लेकिन ब्रिसबेन और एडीलेड टेस्ट के बाद सहमत हो गया हूं क्योंकि इन दोनों टेस्ट में कई आसान फैसले भारत के खिलाफ गए। वहीं महान स्पिनर ईरापल्ली प्रसन्ना ने कहा कि इस बारे में बीसीसीआई से पूछिए कि क्यों वह उसका इस्तेमाल नहीं कर रही है।

भारत के पूर्व ओपनर चेतन चौहान ने कहा कि इस खेल में एक खराब फैसला मैच का रुख मोड़ देता है। मैं शुरुआत से ही इस तकनीक का पक्षधर रहा हूं और चाहता हूं कि इसे मौजूदा स्वरूप में ही अपना लिया जाए।
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