टेस्ट सीरीज में बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण शर्मनाक हार का सामना करने वाली टीम इंडिया के लिए वनडे सीरीज में न सिर्फ बल्लेबाजों ने गजब का खेल दिखाया बल्कि गेंदबाजी में हर गेंदबाज ने अपने स्तर पर बढ़िया प्रदर्शन किया।
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पांच मैचों की वनडे सीरीज का पहला मैच ब्रिस्टल में लगातार बारिश के कारण एक भी गेंद फेंके बगैर ही रद कर दिया गया था। इस तरह से कार्डिफ में दूसरे वनडे से सीरीज की शुरुआत होनी थी। हालांकि इस मैच में भी बारिश का साया रहा लेकिन मैच पूरा खेला गया, जिसमें टीम इंडिया ने इंग्लैंड को एकतरफा मुकाबले में धो दिया।
इस जीत में शिखर धवन और विराट कोहली की असफलता को पीछे छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी भारतीय खिलाड़ियों ने इस मैच से अपने प्रदर्शन में लाजवाब सुधार किया। कार्डिफ में मिली जीत से वर्ल्ड चैंपियन भारत ने दिखा दिया कि वह वनडे में निश्चित तौर पर चैंपियन हैं। भारत ने कार्डिफ में 2011 के बाद 2014 में पहला वनडे मैच खेला और इन दो मैचों में कई समानता भी दिखी।
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कार्डिफ वनडेः 2011 और 2014 मैच की 9 समानताएं
भारत ने इस दौरे से पहले 2011 में इंग्लैंड का दौरा किया था और उस दौरान भी इसी मैदान पर दोनों टीमों के बीच वनडे मैच खेला गया। 3 साल के लंबे अंतराल के बाद दोनों टीमों के बीच यहां हुए मुकाबले में 9 बड़ी समानताएं दिखीं।
पहला, भारत ने दोनों ही बार टॉस गंवाया और इंग्लैंड की ओर से टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी का न्योता मिला।
दूसरा, टीम इंडिया ने दोनों ही बार 50 ओवर में 304 रन बनाए।
तीसरा, इन दोनों ही मैचों में भारत के 6-6 विकेट ही गिरे।
चौथा, भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने दोनों ही मैचों में लगाई फिफ्टी। 2011 में नाबाद 50 रन बनाए, जबकि 2014 में 52 रन बनाकर आउट हुए।
पांचवां, दोनों ही मैच में भारत की ओर से एक-एक शतक लगा और इस शतकवीर बल्लेबाज ने बाद में इंग्लैंड का एक विकेट भी चटकाया। 2011 में विराट कोहली (107) ने शतक लगाया और एलिस्टर कुक का विकेट निकाला, जबकि इस बार सुरेश रैना (100) ने एक विकेट झटका।
9 समानताओं के बावजूद एक असमानता भी रही
पिछली स्लाइड में कार्डिफ वनडे में दोनों ही मैचों की 5 समानताएं आपने पढ़ी, आगे 4 और गजब की समानताएं दिखीं, लेकिन मैच के रिजल्ट में एक असामनता भी रही। शुरुआती 5 समानता के बाद शेष 4 समानता आगे पेश किया जा रहा है-
छठा, इन दोनों ही मैचों में भारत की ओर से एक बल्लेबाज अपना खाता नहीं खोल सका। इस बार विराट कोहली खाता नहीं खोल पाए, जबकि 2011 में रवींद्र जडेजा शून्य पर आउट हो गए थे।
सातवां, भारतीय पारी में 2011 और 2014 के मैचों में एक और गजब की समानता दिखी, इन दोनों ही मैचों में भारत की ओर से एक शतक और 2 अर्धशतक लगे।
आठवां, भारत ने दोनों ही मैच में शानदार बल्लेबाजी की और 300 से ज्यादा रन बनाए। इस दौरान दोनों ही बार भारतीय पारी में कुल 4-4 छक्के भी लगे।
नौंवां, दोनों ही वनडे मैचों में बारिश ने डाली बाधा, डकवर्थ-लुइस से हुआ फैसला।
लेकिन 9 गजब की समानताएं होने के बाद भी एक असमानता यह रही कि भारत पिछली बार मैच 6 विकेट से हार गया था, जबकि इस बार उसने यह मैच 133 रनों से जीत लिया।
इंग्लैंड पर भारत की दूसरी सबसे बड़ी जीत
टीम इंडिया ने कार्डिफ वनडे में इंग्लैंड को 133 रनों से हराया। रनों के लिहाज से भारत की इंग्लैंड पर वनडे क्रिकेट में यह दूसरी सबसे बड़ी जीत भी है। भारत ने इंग्लैंड पर सबसे बड़ी जीत 2008 में राजकोट में 158 रनों पर दर्ज की थी।
भारत ने वनडे क्रिकेट में चौथी बार इंग्लैंड को सौ से ज्यादा के अंतर से हराया है।
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन के लिए यह मैच बेहद निराशाजनक साबित हुआ। उनके 178 वनडे पारियों में यह 16वां मौका है जब उन्होंने 50 से ज्यादा रन खर्च किए लेकिन एक भी विकेट नहीं मिला। साथ ही उनके करियर में यह 53वां मौका था जब उन्होंने 50 या 50 से ज्यादा रन खर्च किए।
कार्डिफ के सोफिया गार्डंस पर अब तक सिर्फ 4 बल्लेबाज ही शतक लगा सके हैं। सुरेश रैना के शतक से पहले इस मैदान पर महज 3 शतक ही लगे थे और उनमें से 2 विराट कोहली और शिखर धवन ने लगाए थे। जबकि चौथा शतक बांग्लादेश के मोहम्मद अशरफुल ने लगाया था।
हालांकि मेजबान टीम का कोई भी बल्लेबाज इस मैदान पर शतक नहीं ठोक सका है। इयान बेल ने इस मैदान पर सबसे ज्यादा 88 रन 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ बनाए हैं।
इस मैदान पर शतक लगाने वाले रैना ने 193 वनडे मैचों की 166 पारियों में अब तक 29 अर्धशतक और 4 शतक लगाए हैं। इनमें से रैना ने 63 मैच एशिया के बाहर खेले हैं लेकिन बाहर वह बड़ी पारी नहीं खेल सके थे। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ 12 बार 50 या 50 से ज्यादा रन बनाए हैं।