सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 13 में 12 मुकाबले हारने वाली टीम इंडिया इस बार भी इस मैदान पर हार के सिलसिले को खत्म नहीं कर सकी।
वर्ल्ड कप में ओवरऑल लगातार 11 और टूर्नामेंट में लगातार 7 जीत के साथ सेमीफाइनल में पहुंची टीम इंडिया से उम्मीद थी कि शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ी इस बार लाजवाब खेल दिखाते हुए टीम को न सिर्फ फाइनल में पहुंचाएंगे बल्कि 2008 के बाद सिडनी में हार का सिलसिला भी थम जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और भारतीय टीम का अभियान सेमीफाइनल में ही खत्म हो गया। साथ ही उसका विजयी रथ भी यहीं पर थम गया।
आइए, एक पड़ताल करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में लगातार 7 मैच जीतने वाली टीम इंडिया की हार के 7 अहम कारणों पर।
पहला कारण, सिडनी बल्लेबाजी के लिए मुफीद पिच मानी जाती है और पहले से ही लग रहा था कि जो भी टीम टॉस जीतेगी वह पहले बल्लेबाजी ही लेगी जिससे निर्णायक मुकाबले में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम पर दबाव बनाया जा सके। भारत ने कंगारुओं पर बढ़त का मौका उस समय गंवा दिया जब कप्तान धोनी टॉस ही हार गए। टॉस गंवाने के बाद धोनी के चेहरे पर भी उदासी छा गई थी।
दूसरा कारण, तेज गेंदबाज उमेश यादव ने भारत को चौथे ओवर में ही डेविड वॉर्नर को आउट कर शुरुआती सफलता दिला दी। लेकिन इसके बाद दूसरे विकेट के लिए ऐरोन फिंच और स्टीवन स्मिथ की साझेदारी को भारतीय गेंदबाज जल्द तोड़ नहीं सके और इस जोड़ी ने 31 ओवर में 182 रन बनाए जिसने भारत के खिलाफ बड़ा स्कोर करने की नींव रख दी।
तीसरा कारण, भारतीय गेंदबाज स्टीवन स्मिथ को सस्ते में आउट नहीं कर सके जिस कारण उन्होंने शानदार शतक ठोंक दिया। उनके करियर की खास बात यह रही है कि उन्होंने वनडे में जब भी 50 या उससे ज्यादा का स्कोर किया उसकी टीम ने जीत हासिल की है।
चौथा कारण, ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज ऐरोन फिंच का चलना भी भारत के हार के कारणों में है। फिंच जिन्होंने वर्ल्ड कप की पिछली 5 पारियों में सिर्फ 64 रन बनाए थे और उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी 24 रनों की थी, लेकिन आज भारतीय गेंदबाज उन्हें जल्दी आउट नहीं कर सके। ओपनर फिंच ने दूसरे विकेट के लिए स्टीवन स्मिथ के साथ 182 रन की साझेदारे कर डाली। साथ ही 81 रनों की टिकाऊ पारी भी खेली।
पांचवां कारण, पिछले 7 मैचों में कुल 70 विकेट झटकने वाले भारतीय गेंदबाज आज लय में नहीं दिखाई दिए और वे लगातार लय से भटके नजर आए और बल्लेबाजों को रन बनाने के खूब मौके दिए। शुरुआत और स्लॉग ओवरों को छोड़ दिया जाए तो बीच के ओवरों में गेंदबाज ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान करने में नाकाम रहे।
छठा कारण, भारत को जब 329 रनों के लक्ष्य के जवाब में अच्छी शुरुआत मिल गई थी और उस अच्छी शुरुआत के साथ उसे आगे बढ़ना था लेकिन ऐन मौके पर बल्लेबाज भी फ्लॉप हो गए। पहले विकेट के लिए रोहित शर्मा और शिखर धवन के बीच 76 रनों की साझेदारी हुई लेकिन उसके बाद भारत ने 15 रनों के अंदर 3 बड़े विकेट गंवा दिए। खासकर विराट कोहली का। कोहली की नाकामी के बाद टीम इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने के योग्य नहीं रह गई थी।
सातवां कारण, तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले विराट कोहली की नाकामी के बाद टीम इंडिया को मध्य क्रम से सहयोग मिलने की उम्मीद थी लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी और टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी। कप्तान धोनी के 65 रन के अलावा सुरेश रैना, अजिंक्य रहाणे, रवींद्र जडेजा और आर अश्विन बड़ी पारियां नहीं खेल सके जिससे टीम को फाइनल से बाहर होना पड़ गया।