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अजहर से लेकर श्रीसंथ तक, वो पांच भारतीय क्रिकेटर जो मैच फिक्सिंग में फंस बर्बाद हुए

Tue, 23 Oct 2018 08:47 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज खुलासा हुआ। अल जजीरा चैनल में रविवार को प्रसारित एक डॉक्यूमेंट्री में साल 2011-12 में कुल 15 अंतरराष्ट्रीय मैच में फिक्सिंग हुई। 

डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक 2011 से 2012 के बीच 15 इंटरनेशनल मैचों में 26 बार स्पॉट फिक्सिंग भी हुई। जानकारी के मुताबिक 7 मैच में इंग्लैंड, 5 में ऑस्ट्रेलिया, 3 में पाकिस्तान और एक में किसी दूसरे देश के क्रिकेटर ने फिक्सिंग की। 

हाल ही में पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने भी मैच फिक्सिंग के गुनाहों को कबूला था। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं, जब क्रिकेट में फिक्सिंग या  फिक्सिंग में लिप्त खिलाड़ियों का नाम सामने आया हो। अगली स्लाइड में ऐसे ही खिलाड़ियों पर एक नजर...
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क्रिकेट इतिहास का यह सबसे बड़ा मैच फिक्सिंग स्कैंडल भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच 2000 में हुई सीरीज के दौरान सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि दोनों टीमों के पांच खिलाड़ी मैच फिक्स करने के लिए बुकियों के संपर्क में थे।

टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए पर आरोप लगे। शुरू में क्रोनिए ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि अजहर ने उन्हें बुकी से मिलवाया था।

बाद में अजहर और अजय जडेजा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। 2002 में क्रोनिए की एक प्लेन दुर्घटना में मौत हो गई थी।

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sreesanth ankeet chandila

2013 में आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर्स श्रीसंथ, अंकित चव्हाण और अजित चंदौलिया को आईपीएल मैचों में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि श्रीसंथ और चव्हाण ने स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली है।

इस कांड ने यह उजागर कर दिया कि आईपीएल में बड़े पैमाने पर मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग चल रही है। बाद में श्रीसंथ को कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई लेकिन बीसीसीआई ने उन पर लगा बैन नहीं हटाया।

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भारत के दिग्गज ऑलराउंडर्स में एक रहे मनोज प्रभाकर पर फिक्सिंग आरोपों के कारण पांच साल का बैन लगा था, जो उनके करियर पर भारी पड़ गया। उनपर बहुत से बुकीज से संबंध रखने का आरोप लगा।

2000 में मनोज प्रभाकर ने दिग्गज कपिल देव और दूसरे खिलाड़ियों पर फिक्सिंग का आरोप लगाकर तहलका मचाया था, लेकिन बाद में वे खुद फंस गए।
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भारतीय क्रिकेट में अजय शर्मा ने प्रथम श्रेणी में 67.46 की औसत से सबसे तेज रन बनाने वाले बल्लेबाज माने जाते थे। घरेलू मैचों में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन मैच फिक्सिंग के आरोप लगने के बाद अजय शर्मा का क्रिकेट करियर पूरी तरह से खत्म हो गया।

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भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी अजय जडेजा की गिनती शानदार फिल्डरों में होती थी। अजहरूद्दीन के साथ ही अजय जडेजा को भी मैच फिक्सिंग का दोषी पाया गया जिसके बाद बीसीसीआई ने उन पर पांच साल का बैन लगा दिया। 

इसके बाद जडेजा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जब सुनवाई हुई तो किसी ने भी उनके केस की अगुवाई नहीं की जिसके बाद केस को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि बाद में जडेजा को घरेलू मैचों में खेलने की अनुमति दे दी गई थी।

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