ब्रह्मा को पुष्प पर बैठे देखकर मधु और कैटभ का उपहास करने का मन हुआ। उन्होंने ब्रह्मा को चुनौती देते हुए कहा, ‘इस पुष्पासन से नीचे उतरो और पराजय स्वीकार करो, अन्यथा हमसे युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।’