केंटुकी विश्वविद्यालय में टेनिस कोच और सामाजिक कार्य के एसोसिएट प्रोफेसर मैट मूर ने कहा, ‘प्रतिद्वंद्विता हमें लीक से हटकर सोचने और अपनी सीमाओं को उससे भी आगे ले जाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो कि संभव है।’ सिनर और अल्कारेज अपने जीवन में प्रतिद्वंद्विता का उपयोग करने के बारे में तीन महत्वपूर्ण सबक देते हैं।
जिज्ञासा में डूब जाइए : विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिद्वंद्वी एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हैं और अपना खेल निखारते हैं। प्रतिद्वंद्वी को हराने का सपना देखने के बजाय उसे वैसे व्यक्ति के रूप में देखने की कोशिश करें, जिसका आप सम्मान कर सकें और उससे कुछ सीख सकें। एनवाईयू स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रबंधन और संगठन के प्रोफेसर गेविन किल्डफ ने कहा, ‘अगर आप खुद को ईर्ष्या और आक्रोश में डूबता हुआ पाते हैं, तो एक पल रुककर सोचें कि आपका प्रतिद्वंद्वी आपको कैसे प्रेरित कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।’ वह कहते हैं कि आप एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं, एक-दूसरे से सीखते हैं, और फिर आप दोनों मिलकर सफल होते हैं।
परिणाम की न सोचें : डॉ. कॉनवर्स कहते हैं, ‘सामान्य मैच से प्रतिद्वंद्विता इस मामले में अलग है कि यह आपके और प्रतिद्वंद्वी के बीच प्रतिस्पर्धा की एक साझा कहानी होती है। लेकिन मैच के वक्त पिछली हार या बड़े दांव के बोझ तले दबने के बजाय, हर पल का अपनी शर्तों पर सामना करना बेहतर होता है।’ इसलिए काम पर, कक्षा में या टेनिस कोर्ट पर जमकर प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन फिर उसे दरवाजे पर ही छोड़ दें, परिणाम की चिंता न करें।
उत्साह को ताकत बनाएं : संयमित तनाव सकारात्मक मनोदशा, उत्पादकता में वृद्धि और बेहतर निर्णय लेने में योगदान दे सकता है। डॉ. मूर कहते हैं, आपके अनुभव चाहे जो भी हों, जरूरी बात यह है कि आप अपनी प्रतिस्पर्धा को ईंधन की तरह इस्तेमाल करें। स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता ही उत्साह पैदा करती है। सर्वश्रेष्ठ प्रतिद्वंद्विताएं सिर्फ आपकी परीक्षा नहीं लेतीं; वे आपको याद दिलाती हैं कि आप जो कर रहे हैं, उसे आप क्यों पसंद करते हैं।