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युद्ध बन गए हैं मुनाफे का कारोबार

मारूफ रजा
Updated Wed, 28 Feb 2024 06:33 AM IST

सार

पूरी दुनिया में युद्ध चलते रहें, अमेरिका व पश्चिमी देशों के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद रूस-यूक्रेन युद्ध का ठंडा न हो पाना बताता है कि कैसे इन देशों ने वैश्विक युद्धों को रोजगार सृजन व अपनी अर्थव्यवस्था के विकास का साधन बनाया हुआ है।
 
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रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : अमर उजाला


वास्तव में हमले के पहले वर्ष के बाद अमेरिका और रूस ने अपने सैन्य हथियारों का परीक्षण एवं प्रदर्शन करने के लिए युद्ध क्षेत्रों का उपयोग किया। ऐसा लगता है, मानो दोनों पक्ष अपने हथियारों की बिक्री और प्रदर्शन करना चाहते हैं, ताकि यह याद दिलाया जा सके कि जान-माल के नुकसान की परवाह किए बिना युद्ध हथियार बेचने के लाभदायक व्यवसाय को आधार प्रदान करता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जनरल आइजनहावर ने स्वीकार किया था कि अमेरिका एक ‘सैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान’ है। यूक्रेन युद्ध और गाजा पट्टी पर इस्राइल का हमला इस बात के ताजा उदाहरण हैं कि कैसे कम से कम युद्धविराम के जरिये समझौता किया जा सकता था, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के सैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान के निहित स्वार्थों ने इसे रोक दिया। युद्धों से हथियारों की बिक्री होती है और यह अमेरिका एवं पश्चिमी देशों के लिए लाभप्रद उद्यम है। इससे रोजगार सृजित होता है और चुनाव प्रचार एवं उम्मीदवारों को धन मिलता है। पश्चिमी देशों में रोजगार के अवसरों के विस्तार का लालच, दुनिया के अन्य हिस्सों में निर्दोष लोगों की जान पर भारी पड़ता है, चाहे सरकारों के नैतिक दावे कुछ भी हों।


अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हाल ही में कहा, 'यदि आप रूसी आक्रामकता से निपटने के लिए यूक्रेन की रक्षा में हमारे द्वारा किए गए निवेश को देखें, तो हमने जो सुरक्षा सहायता प्रदान की है, उसका 90 फीसदी वास्तव में अमेरिका में निर्माताओं एवं उत्पादन पर खर्च किया गया है, जिससे अमेरिका में नौकरियां पैदा हुईं और हमारी अपनी अर्थव्यवस्था का ज्यादा विकास हुआ। इसलिए यह हमारे लिए फायदे का सौदा है, जिसे हमें जारी रखने की जरूरत है।' अमेरिकी विदेश मंत्री 2023 में ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड कैमरन के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में बोल रहे थे।


बीबीसी  के विश्लेषक मैक्स मात्जा कहते हैं, 'हथियार हस्तांतरण और रक्षा व्यापार अमेरिकी विदेश नीति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जिनका क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।' अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि अमेरिकी सरकार ने 80 अरब डॉलर से अधिक की बिक्री के लिए सीधे सौदा किया है, जो 2022 से 56 फीसदी ज्यादा है। बाकी अमेरिकी रक्षा कंपनियों द्वारा विदेशी देशों को सीधे हथियार बेचा गया था।


यूक्रेन के विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा कि प्रतिदिन युद्ध की लागत 13.6 करोड़ डॉलर है और अमेरिकी संसद एवं यूरोपीय संघ में यूक्रेन को सैन्य सहायता एवं आवंटन को लेकर हुए हंगामे के कारण पुतिन का मनोबल बढ़ा और उसने यूक्रेन पर बड़े और आक्रामक हमले का आदेश दिया। इसने यूक्रेन के करीबी अन्य यूरोपीय देशों को परेशान कर दिया है। और बदले में अमेरिकी हथियारों की विदेशों में बिक्री पिछले साल तेजी से बढ़ी, जो रिकॉर्ड कुल 238 अरब डॉलर तक पहुंच गई, क्योंकि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने हथियारों की मांग बढ़ा दी। यूक्रेन पर रूसी हमला शुरू होने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को सैन्य सहायता और वित्तीय सहायता के रूप में क्रमशः 113 अरब डॉलर और 91 अरब डॉलर दिए हैं।


प्रमुख अमेरिकी समाचार एजेंसी पोलिटिको ने वाशिंगटन और उसके आसपास क्या कुछ चल रहा है, उस पर प्रकाश डाला है। जब ज्यादा से ज्यादा हथियारों के उत्पादन और बिक्री के लिए तीव्र पैरवी के प्रयासों की बात आती है, तो पोलिटिको ने दावा किया कि 'व्हाइट हाउस चुपचाप दोनों दलों के सांसदों से आग्रह करता है कि वे घरेलू आर्थिक उछाल के लिए दूसरे देशों में युद्धों को बढ़ावा दें। डेमोक्रेट्स एवं रिपब्लिकन, दोनों दलों के राजनेता रूस का प्रतिरोध करने के लिए यूक्रेन को सहायता देने का समर्थन करते रहे हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि ऐसा करना अमेरिका में रोजगार सृजन के लिए अच्छा है।'


सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी और रणनीतिकार, जो हथियार उद्योग में आकर्षक भूमिका निभाते हैं, यह सुनिश्चित करते हैं कि रक्षा क्षेत्र के दिग्गजों की बोली यथासंभव प्रभावी तरीके लगाई जाए। यहां तक कि कुछ मीडिया घराने भी इन कंपनियों का समर्थन करने वाले समूह में शामिल हैं। बड़े रक्षा निगमों के शीर्ष अधिकारियों की शक्तिशाली पदों पर बैठे अमेरिकी राजनेताओं के साथ गहरी मिलीभगत है।
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प्रसिद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक मेल्विन गुडमैन संक्षेप में कहते हैं : 'अमेरिकी संसद विशेष रूप से हथियार लॉबी के प्रति उत्तरदायी है, जो किसी भी कानून, जिसमें सैन्य खर्च, सैन्य तैनाती और सैन्य हथियार शामिल हैं, के लिए भारी द्विदलीय बहुमत जुटाती है। सीनेटर और प्रतिनिधि सैन्य खर्च बिल को 'नौकरी' बिल मानते हैं।' अमेरिकी सैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान के समर्थक पूरे सरकारी और अर्ध-सरकारी तंत्र में पैठ बनाए हुए हैं। लॉबिस्ट राजनेताओं के साथ सावधानीपूर्वक मिलीभगत करते हैं। रक्षा ठेकेदारों के राजनीतिक अभिजात वर्ग से गहरे संपर्क होते हैं और वे बड़ी रक्षा कंपनियों की तरह उन्हें उदारतापूर्वक चुनाव लड़ने के लिए धन देते हैं। बड़ी रक्षा कंपनियां थिंक टैंक और अन्य संबद्ध संस्थानों के संरक्षक होते हैं, जो हथियार विक्रेताओं के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं।


दरअसल, यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की प्रत्यक्ष या परोक्ष संलग्नता का एक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रूसी रक्षा उद्योग लगातार विफल होता रहे और रूसी हथियार निर्माताओं को निर्यात से मिलने वाले धन से वंचित किया जा सके। अमेरिकी हथियार हस्तांतरण कार्यालय के प्रमुख के अनुसार, रूस से दूर होने वाले देशों से भी अमेरिकी हथियार बिक्री को भी बढ़ावा मिला।
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