मध्यम वर्ग की खर्च करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, बजट में कराधान में परिवर्तनकारी सुधारों का प्रस्ताव किया गया है। शून्य व्यक्तिगत आयकर स्लैब को बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया गया है यानी अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति को आयकर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा, जिससे वेतनभोगी व्यक्तियों को पर्याप्त राहत मिलेगी और उनकी डिस्पोजेबल आय (कर चुकाने के बाद बची आय) में वृद्धि होगी।
इसके अतिरिक्त, समुद्री उत्पादों और महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क कम कर दिया गया है, और जीवन रक्षक दवाओं को सीमा शुल्क से छूट दी गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवा अधिक किफायती हो गई है। बजट में कृषि पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन देने के लिए पहल की गई है। उच्च उपज वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की गई है, साथ ही किसानों के लिए सब्सिडी वाले ऋण की सीमा में वृद्धि की गई है।
इन उपायों का उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की शुरुआत की है, जो निर्माताओं को प्रोत्साहन प्रदान करेगा। स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास को समर्थन देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के नए योगदान के साथ एक नया कोष स्थापित किया गया है। इस पहल से नवाचार को बढ़ावा मिलने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बीमा बाजार में पैठ बढ़ाने के लिए बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी गई है। इस कदम से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को आकर्षित करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और उपभोक्ताओं को बीमा उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
बजट में आर्थिक विकास में परिवहन और कनेक्टिविटी के महत्व को रेखांकित किया गया है। दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेहतर क्षेत्रीय हवाई संपर्क को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, विभिन्न उद्योगों को आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के विकास की एक नई नीति पेश की गई है। सरकार गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं की सहायता के उपायों के साथ समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। रोजगार को बढ़ावा देने और छोटे व्यवसायों को समर्थन देने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बढ़ी हुई ऋण गारंटी की घोषणा की गई है।
भारत के विनिर्माण उत्पादन का 36 फीसदी उत्पादन करने वाले एमएसएमई क्षेत्र को इन पहलों से काफी लाभ होगा। कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि केंद्रीय बजट-2025 घरेलू विकास को बढ़ावा देते हुए धीमी होती वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति प्रस्तुत करता है। राजकोषीय अनुशासन, कर सुधार, कृषि उत्पादकता, विनिर्माण प्रोत्साहन, वित्तीय क्षेत्र उदारीकरण और सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करके सरकार का लक्ष्य एक लचीली और समावेशी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, इन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन वांछित परिणाम प्राप्त करने और सभी नागरिकों के लिए सतत विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगा।