उन्होंने यह भी बतलाया कि बिहार में बाढ़ के कारक कोसी नदी के अपर कमांड के इलाके हैं, जो नेपाल में स्थित हैं। हालांकि उन्होंने बाढ़ ग्रसित अन्य राज्यों, जैसे असम, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के विकास की भी बात की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के भावी विकास में पर्यावरण प्रबंधन के बाद पर्यटन का महत्व बहुत रहेगा। यहां भी फिर से उन्होंने बिहार के प्राचीन मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का जिक्र किया, मसलन, गया का विष्णुपद मंदिर तथा बोधगया का महाबोधि मंदिर और राजगीर। सरकार, काशी विश्वनाथ की तर्ज पर यहां भी कॉरिडोर बनाएगी और पर्यटन का प्रचार-प्रसार करेगी। इसी के साथ उन्होंने ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान की बात कही और यह भी कहा कि इसे विश्वस्तरीय दर्जा दिया जाएगा।
बिहार की तरह ही ओडिशा में भी ऐसी नीतियां अपनाई जाएंगी। बिहार का नाम एक बार फिर आया, जब उन्होंने यह कहा, आईआईटी, पटना में सीटें बढ़ाई जाएंगी। बिहार में मखाना बोर्ड बनेगा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड एंड टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट स्थापित किया जाएगा। सीतारमण ने नए हवाई अड्डों का भी जिक्र किया और फिर से यह कहा कि बिहार में नए हवाई अड्डे भी बनाए जाएंगे और पटना के जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डे का विस्तार व नवीनीकरण किया जाएगा। यानी जैसे अर्जुन की नजर मछली की आंख पर थी, वैसे ही सरकार की पैनी नजर बिहार पर बनी हुई है।
सरकार के निहितार्थ तो स्पष्ट ही हैं, इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा का चुनाव है और पहली बार भाजपा राज्य में कमान संभालने की स्थिति में है। ऐसे में सरकारी कृपा दृष्टि का बिहार पर केंद्रित होना राजनीतिक न्याय और नीति के संगत है। हालांकि बजट की सबसे लुभावनी बात मध्य वर्ग पर सरकार की कृपा दृष्टि ही रही। अगर आप एक लाख रुपये महीना कमाते हैं, तो आपको कोई कर नहीं देना होगा, अब भला ऐसी घोषणा किसका दिल नहीं जीतेगी। इससे सरकार ने देश के उस मध्य वर्ग को आकर्षित करने की कोशिश की है, जो बाजार अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। कहा जा सकता है कि इस बजट से ताली बिहार में तो बजेगी ही, लेकिन बजट में किसानों, महिलाओं, युवाओं, काॅरपोरेट, बुजुर्गों इत्यादि का ध्यान रखा गया है, इसलिए कुल मिलाकर सभी खुश हैं। इसका असर आसन्न दिल्ली चुनाव पर भी दिखे, तो हैरत नहीं।