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टाइम मशीन: एल डोराडो खतरे में है, पुतिन की नजर से उभरी है आशंका

अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 17 Mar 2024 07:32 AM IST

सार

गोटलैंड में कभी भी युद्ध छिड़ सकता है। नाटो में स्वीडन के प्रवेश से गुस्साए पुतिन अपने बाल्टिक अभियान में गोटलैंड को निशाना बनाने की ठान चुके हैं। लेकिन लड़ाकों का द्वीप गोटलैंड भी डरने वाला नहीं है। यह वाइकिंग का एल डोराडो था, यानी एक ऐसी जगह, जहां खजाने दबे हैं।
 
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Vladimir Putin - फोटो : Social Media


लिथुआनिया और पोलैंड की सीमा पर कैलिनिनग्राद में रूस का नौसैनिक अड्डा है। ये जहाज यहीं से आए थे। स्वीडन की पुलिस को पता चला कि स्वीडन के नाभिकीय संयंत्रों के आसपास कई ड्रोन देखे गए हैं। चौबीस घंटे के भीतर ही स्वीडन ने गोटलैंड के द्वीप पर सैन्य तैनाती में जबर्दस्त बढ़ोतरी कर दी। गोटलैंड पर इस कदर सैन्य तैनाती शीतयुद्ध के दशकों में भी नहीं देखी गई थी।


रूस और स्वीडन के रिश्तों का इतिहास ही लंबी शत्रुता का है। 12वीं से 19वीं सदी तक रूस और स्वीडन के बीच करीब एक दर्जन युद्ध हुए हैं और कड़वाहट अब भी जारी है। यूक्रेन पर हमले के बाद स्वीडन गोटलैंड द्वीप पर रूस के हमले को लेकर बेहद सशंकित है। यही डर उसे शताब्दी पुरानी कूटनीतिक तटस्थता छोड़कर नाटो की शरण में ले आया है। गोटलैंड बाल्टिक सागर में इतिहास का सबसे जीवंत स्मारक है। बांधिए कुर्सी की पेटी, टाइम मशीन अब रूस होते हुए गोटलैंड की तरफ उड़ान भरने को तैयार है।


टाइम मशीन 16वीं-17वीं सदी में उड़ान भर रही है। ठीक पहचाना आपने यह रूस के पहले जार आइवन द टेरबिल हैं, जो मध्ययुगीन मस्कोवी शासन को रूस के दक्षिण में फैला रहे हैं। आइवन द टेरबिल ने मध्य एशिया से लेकर काला सागर के तट तक तातारों-कजाकों के शासन वाले इलाके और अस्त्राखान के खानेत को अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। मगर इतिहास तो अब बनना शुरू हुआ है। अपनी सीट के सामने लगी स्क्रीन पर देखिए। यह 1708 का साल है।


रूस की जानलेवा ठंड के बीच स्वीडन के सम्राट चार्ल्स बारहवें की सेना यूक्रेन के दक्षिण की तरफ बढ़ रही है। स्वीडन के सम्राट चार्ल्स पहले भी रूस की सेना को धूल चटा चुके थे, लेकिन मास्को उनकी पहुंच से दूर रहा। सम्राट की सेना सर्दी से हार रही थी। फिर भी हमला जारी था। पीटर द ग्रेट ने चार्ल्स को रोकने के लिए पोल्टावा के किले से जवाब देना शुरू कर दिया। 1708 में जंग की शुरुआत हुई। पहली मुठभेड़ भारी पड़ी। रूसी सेना की गोलाबारी में स्वीडन के सम्राट चार्ल्स घायल हो गए। किसी तरह जान तो बच गई, अलबत्ता सम्राट युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं थे। इसलिए सेना की कमान फील्ड मार्शल कार्ल गुस्ताव रेंकिओल्ड और जनरल लुडविग ल्यूनहॉप्ट को दे दी गई।


इस इलाके पर मंडराते हुए हमें दिखेगा कि एक माह तक अलग-अलग मोर्चों पर स्वीडन और रूस की सेना के बीच भयानक जंग हुई। मगर स्वीडन की सेना टिक नहीं पाई। 10,000 से ज्यादा सैनिक मारे गए या कैद कर लिए गए। स्वीडन के सम्राट चार्ल्स को दक्षिण में ओटोमन साम्राज्य के इलाके में शरण लेनी पड़ी। पोल्टावा की हार के साथ स्वीडन के साम्राज्य विस्तार की उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो गई। पीटर द ग्रेट काला सागर से लेकर बाल्टिक तट तक राज करने लगे।


टाइम मशीन अब बाल्टिक तट पर सेंट पीटर्सबर्ग के ऊपर उड़ान भर रही है। स्वीडन हार तो गया, लेकिन पीटर द ग्रेट बाल्टिक सागर से उस पार नहीं जा सके। वह रूस के साम्राज्य को यूरेशियन सीमा से निकाल कर बाल्टिक के दूसरी ओर ले जाना चाहते थे। इसी कोशिश में उन्होंने 1703 में बाल्टिक तट पर सेंट पीटर्सबर्ग शहर बसाया था। बाल्टिक सागर में स्वीडन की ताकत अकूत थी, जिस पर रूस का जोर नहीं चला। ... और अब हम आ गए हैं गोटलैंड पर। स्टॉकहोम के तट से पूर्व की ओर स्थित गोटलैंड पहुंचने में करीब पांच घंटे लगते हैं। यह हिसाब 21वीं सदी का है।
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एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर अपनी शुरुआत करने वाले छोटे से गोटलैंड पर साम्राज्यवादियों के असंख्य निशान दर्ज हैं। टाइम मशीन अब और पीछे 14वीं सदी से 16वीं सदी की तरफ जा रही है, जब इस द्वीप पर प्रत्येक शताब्दी में किसी न किसी साम्राज्यवादी शासक ने कब्जा किया। कभी जर्मन, तो कभी डैनिश, तो कभी रूसी कब्जे से गुजरते हुए गोटलैंड स्वीडन का हुआ।


टाइम मशीन में बैठने से पहले शायद आपने सुना हो कि नाटो में स्वीडन के प्रवेश से गुस्साए पुतिन अपने बाल्टिक अभियान में गोटलैंड को निशाना बना सकते हैं। गोटलैंड सुंदर तो है ही, अनोखा और मूल्यवान भी है। इसलिए टाइम मशीन आज आई है। पूर्वी यूरोप और बाल्टिक के इलाके में यह उन गिने-चुने इलाकों में से है, जहां मनुष्य के रहने के प्रमाण 8,000 से 6,000 साल पुराने हैं। आइए, 800 से 1150 के युग में चलें। 


गोटलैंड वाइकिंग लड़ाके जंग की तैयारी करते दिखेंगे। मगर सबसे दिलचस्प बात यह कि गोटलैंड वाइकिंग का एल डोराडो था। एल डोराडो एक ऐसे शहर की कल्पना है, जहां खजाने दबे हैं। समय के इस दौर में आपको वाइकिंग यहां सोना ढोते दिख जाएंगे। टाइम मशीन की स्पीड बढ़ाते हैं और हम आ गए आठवीं से बीसवीं सदी में। बात 1999 की है, स्वीडिश न्यूज टीवी की एक टीम को चांदी के करीब 150 सिक्कों और पुरातात्विक कांस्य सामग्री की चोरी के बारे में पता चला है।


पुरातत्वविदों की सलाह पर इस टीम ने खोज जारी रखी। जमीन से तीन मीटर नीचे चांदी के सिक्कों का एक बड़ा भंडार मिल गया। गोटलैंड में खबर फैल गई। वर्ष 1999 के बाद के दशकों में गोटलैंड पर वाइकिंग के 700 खजाने मिल चुके हैं। इन खजानों ने पहली बार सिद्ध किया कि वाइकिंग यूक्रेन और रूस पार कर बाइजेंटियन साम्राज्य की सीमाओं तक जाते थे। स्वीडिश पुरातत्व के जानकार मानते हैं कि बांइकिंग खजाने का एक बहुत बड़ा हिस्सा गोटलैंड की जमीनों के भीतर दबा है।


रॉबर्ट डी कपलान ने अपनी किताब द रिवेंज ऑफ ज्योग्राफी में दुनिया के उन अभिशप्त और विवादित भूगोलों का जिक्र किया है, जिनका इतिहास उन्हें कभी भी नए युद्धों से मिलवा सकता है। गोटलैंड इसी तरह का भूगोल है, जो फिर विस्फोटक हो चला है।


स्वीडन की जातीय स्मृतियों में रूस आक्रांता के तौर पर स्थापित है। पुतिन भी पुराने जार शासकों की तरह बाल्टिक पर निगाह जमाए हुए हैं। स्वीडन में हल्ला है-रशियन्स आर कमिंग। यह मुहावरा स्वीडन में रूस को लेकर बड़ी हिकारत के साथ इस्तेमाल किया जाता है। अब बाल्टिक का शक्ति संतुलन बदल गया है। नाटो को इस इलाके में मजबूत दखल मिल गई है। 


टाइम मशीन गोटलैंड में अपनी यात्रा समाप्त कर रही है। इससे पहले कि यहां बम-बारूद बरसने लगें, इतिहास और प्रकृति के आशीर्वाद से भरपूर गोटलैंड पर कुछ समय आप भी बिता लीजिए। हम फिर मिलते हैं, टाइम मशीन के अगले सफर पर....

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