1940-50 के दशक में अमेरिका में उड़न तश्तरियों की रिपोर्ट ने हलचल पैदा की थी, इसी के आधार पर 1956 में बनी अर्थ वर्सेज द फ्लाइंग सॉसर्स फिल्म हो या रिडले स्कॉट के निर्देशन में वर्ष 1979 में बनी 116 मिनट की फिल्म एलियन, दोनों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं और एलियन के अस्तित्व को लेकर बहस शुरू हुई। हाल ही में, एआई के गॉडफादर के नाम से चर्चित नोबेल पुरस्कार विजेता कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन ने चेतावनी दी है कि एलियन इन्सानों से कई गुना ज्यादा बुद्धिमान हैं। अभी कोई नहीं जानता कि इनसे कैसे सुरक्षित रहा जाएगा। असल मुद्दा यह है कि एलियन के अस्तित्व के बारे में अभी कोई पुख्ता सुबूत नहीं हैं। लेकिन हालिया शोध तो यही दावा करते हैं कि इस परग्रही (एलियन) का अस्तित्व है।
पृथ्वी से परे जीवन की संभावनाओं और उसकी तलाश के बारे में अक्सर सकारात्मक खबरें मिलती हैं। बताया जाता है कि हम दूसरे ग्रह के लोगों को कभी न कभी खोज लेंगे। सितंबर 2023 में हमें बताया गया था कि पृथ्वी से परे जीवन खोजना ‘केवल समय की बात है’, जबकि सितंबर, 2024 की एक खबर का शीर्षक था-‘वी आर क्लोज’ यानी हम करीब हैं। एलियन से जुड़ी खबरें हमेशा ही रोचक होती हैं, क्योंकि इस संबंध में अगर नकारात्मक खबरें प्रकाशित की जाएं, तो उसे कोई नहीं पढ़ेगा। लेकिन सवाल है कि विशेषज्ञों का समुदाय वास्तव में क्या सोचता है? क्या कोई आम सहमति भी है? नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हमारे नए शोध-पत्र में, हमने इसका पता लगाया है। फरवरी से जून, 2024 के दौरान हमने बुनियादी, जटिल और बुद्धिमान अलौकिक जीवन के संभावित अस्तित्व के बारे में चार सर्वेक्षण किए। हमने एलियन का अध्ययन करने वाले जीवविज्ञानी (एस्ट्रोबायाेलॉजिस्ट) और भौतिकविदों सहित अन्य क्षेत्रों के वैज्ञानिकों को जानकारी जुटाने के लिए ईमेल भेजा। इस पर 521 एस्ट्रोबायाेलॉजिस्ट और 534 गैर-एस्ट्रोबायोलॅजिस्ट ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। इनमें से करीब 86.6 फीसदी एस्ट्रोबायाेलॉजिस्ट ने इस बात से ‘सहमति’ या फिर ‘पुरजोर सहमति’ जताई कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं एलियन का अस्तित्व है। एलियन को लेकर दो फीसदी से भी कम लोगों ने असहमति जताई, जबकि 12 फीसदी वैज्ञानिक तटस्थ थे। इस आधार पर हम इस ठोस नतीजे पर पहुंचे कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में एलियन जरूर मौजूद हैं। जो वैज्ञानिक एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट नहीं थे, वे भी मूल रूप से सहमत थे, उनकी कुल सहमति का स्कोर 88.4 फीसदी था। जब हमने ‘जटिल’ एलियंस या ‘बुद्धिमान’ एलियंस की बात की, तो 67.4 फीसदी एस्ट्रोबायोलॉजिस्टों और 58.2 फीसदी गैर-एस्ट्रोबायोलॉजिस्टों ने सहमति जताई। इस तरह से वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन का अस्तित्व है, और वह भी अधिक उन्नत रूपों में। ये नतीजे इस तथ्य से और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि सभी श्रेणियों के वैज्ञानिकों के बीच असहमति कम थी। उदाहरण के लिए, केवल 10.2 प्रतिशत एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इस दावे से असहमत थे कि बुद्धिमान एलियंस के अस्तित्व की संभावना है।
आशावादी और निराशावादी
हमें वैज्ञानिक सहमति पर तभी ध्यान देना चाहिए, जब वह (पर्याप्त) सुबूतों पर आधारित हो। चूंकि वैज्ञानिकों के पास कोई उचित सुबूत नहीं है, इसलिए जाहिर है कि वे अनुमान ही लगा रहे हैं। हालांकि, सर्वे के दौरान वैज्ञानिकों के पास ‘तटस्थ’ वोट करने का विकल्प था, लेकिन केवल 12 फीसदी ने इस विकल्प को चुना। वास्तव में बहुत सारे ‘अप्रत्यक्ष’ या ‘सैद्धांतिक’ सुबूत हैं कि एलियन का अस्तित्व है। उदाहरण के लिए, अब हम जानते हैं कि ब्रह्मांड में कई ऐसी जगहें हैं, जो रहने योग्य मानी गई हैं। हमारे अपने सौरमंडल में कई ऐसे ग्रह हैं, जिनमें यूरोपा और एनसेलेडस चंद्रमाओं के उप-सतही महासागर शामिल हैं, और संभवतः मंगल की सतह से कुछ किलोमीटर नीचे का वातावरण भी रहने योग्य है। हालांकि, मंगल ग्रह पर कभी बहुत ज्यादा रहने योग्य जगह थी, इसकी सतह पर तरल पानी की झीलें और नदियां थीं और एक पर्याप्त वायुमंडल भी था। ऐसे में, तार्किक आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि आकाशगंगा और व्यापक ब्रह्मांड में रहने योग्य बहुत-सी जगहें निश्चित ही होंगी। हम यह भी जानते हैं कि जीवन गैर-जीवन से शुरू हो सकता है-आखिरकार, यह पृथ्वी पर भी हुआ था। मान लीजिए कि हम तटस्थ वोटों को छोड़ देते हैं, जिन्हें शायद लगा होगा कि वे अटकलें लगा रहे हैं। तब कुल 461 वोट बचते हैं, जिनमें से 451 सहमत या पूरी तरह सहमत थे। अब, हमारे पास कुल सहमति प्रतिशत 97.8 फीसदी है, जो एक मजबूत सहमति कही जा सकती है।
सही संतुलन जरूरी
हम शायद संतुलन चाहते हैं। एक तरफ, हमारे पास प्रत्यक्ष अनुभवजन्य साक्ष्य की कमी है और जिम्मेदार वैज्ञानिकों की अटकलें लगाने की अनिच्छा है। दूसरी तरफ, हमारे पास अन्य प्रकार के साक्ष्य हैं, जिनमें ब्रह्मांड में रहने योग्य वातावरण की वास्तव में विशाल संख्या शामिल है। हम जानते हैं कि जीवन के शुरू होने की संभावना शून्य नहीं है। प्रत्येक दृष्टिकोण अलग-अलग विश्लेषणात्मक आवश्यकताओं को दर्शाता है। ऐसे में हमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। यह बात सर्वमान्य है कि हमारी पृथ्वी के अलावा ब्रह्मांड में दूसरी जगह भी जीवन अवश्य होगा। अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की खगोल वैज्ञानिक जैकलिन फाहर्टी की यह बात, ‘हम देख रहे हैं, का मतलब ही है कि अन्य दुनिया भी हमें देख रही होगी’ एलियन के अस्तित्व की गवाही देती है। नासा भी एलियन के अस्तित्व की पहेली को सुलझाने के लिए सतत प्रयास कर रहा है। कौन जाने कि एलियंस को इन्सानों से पहले ही इस बात की खबर हो कि मानव का अस्तित्व है।
(द कन्वर्सेशन से)