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दुखों का मूल कारण: चेहरे पर लाएं असली खुशी, नकारात्मक विचारों को छोड़ें

बर्ट्रेंड रसेल Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 04 Nov 2024 04:16 AM IST

सार

दुख मुख्यत: संसार के प्रति गलत दृष्टिकोण, गलत नैतिकता, जीवन की गलत आदतों के कारण है, जो उस स्वाभाविक उत्साह को नष्ट कर देता है, जिस पर अंतत: सभी खुशियां निर्भर करती हैं।
 
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चेहरे पर लाएं असली खुशी - फोटो : अमर उजाला/ANI


सभी चेहरों के अपने सच

हर चेहरे पर किसी कमजोरी और दुख के निशान देखने को मिलेंगे। हमारे चारों ओर अलग-अलग तरह के दुख बिखरे मिलते हैं। मान लीजिए कि आप किसी शहर में हैं। काम के घंटों के दौरान किसी व्यस्त सड़क पर खड़े हो जाएं, और अपने मन को अहंकार से खाली कर दें, और अपने आस-पास के अजनबियों के व्यक्तित्व को एक के बाद एक परखें, आप पाएंगे कि इन अलग-अलग भीड़ में से प्रत्येक की अपनी अलग परेशानी है।


मस्ती तलाशते लोग

सप्ताहांत में मुख्य सड़क पर आप आराम से रह रहे पुरुषों और महिलाओं को देखेंगे, जिनमें से कुछ मौज-मस्ती की तलाश में लगे हुए हैं। यह खोज सभी एक समान गति से करते हैं। जुलूस में सबसे धीमी कार की गति से सड़क या दृश्य देखना असंभव है, क्योंकि दूसरी तरफ देखने से दुर्घटना हो सकती है। सभी कारों में सवार लोग दूसरी कारों से आगे निकलने की इच्छा में डूबे रहते हैं, जो वे भीड़ के कारण नहीं कर सकते। 


यदि उनका मन इस व्यस्तता से भटक जाता है, तो उन्हें अकथनीय ऊब घेर लेती है और उनके चेहरे पर तुच्छ असंतोष की छाप पड़ जाती है। या फिर किसी शाम में लोगों को देखें। सभी खुश रहने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आते हैं, जैसे दंत चिकित्सक के पास जाकर कोई उपद्रव नहीं करने का दृढ़ संकल्प करता है। 


क्या मानना है लोगों का

अक्सर लोग ऐसा मानते हैं कि नशा करना खुशी का द्वार है, इसलिए वे जल्दी से नशे के चंगुल में फंस जाते हैं, यह ध्यान नहीं देते कि यह एक पल की खुशी अगले कई पल तक निराशा का कारण बन सकती है। इन तमाम तरह के दुखों का कारण व्यक्तिगत मानसिकता है, जो निस्संदेह काफी हद तक सामाजिक व्यवस्था का ही उत्पाद है।


दुखों का मूल कारण

युद्ध, आर्थिक शोषण, क्रूरता और हजारों तरह की समस्याओं पर विजय पाने की आवश्यकता है, लेकिन यह तब तक संभव नहीं, जब तक लोग इतने दुखी हैं, और आपसी विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। मेरा मानना है कि यह दुख मुख्यत: संसार के प्रति गलत दृष्टिकोण, गलत नैतिकता, जीवन की गलत आदतों के कारण है, जो उस स्वाभाविक उत्साह और संभावित चीजों के प्रति भूख को नष्ट कर देता है, जिस पर अंतत: सभी खुशियां निर्भर करती हैं। हमें अपने दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है, खुशी स्वयं जाग उठेगी।


नकारात्मक विचारों को छोड़ें

जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण ही मायने रखता है। अगर आप खुद को हल्के में लेते हैं और बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो बहुत जल्द आप अपने रोजमर्रा के जीवन में हंसी के पात्र बन सकते हैं। लेकिन एक बार जब आप नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से बदल देंगे, तो आपको सकारात्मक परिणाम मिलने लगेंगे।
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