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विदेशी निवेश से बदलेगी तस्वीर : कॉरपोरेट कर की दरों में कटौती से मिलेगी मदद

जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 01 Oct 2019 06:45 AM IST
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हाल ही में दुनिया के ख्याति प्राप्त वित्तीय शोध संगठन आईएचएस मार्केट ने कहा कि भारत में कॉरपोरेट कर की दरों में अब तक की सबसे बड़ी कटौती से कंपनियों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धिता में काम करने में मदद मिलेगी। इससे मध्यम अवधि में कंपनियों के लिए निवेश बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी। विगत 29 सितंबर को सऊदी अरब के राजदूत डॉ. सउद बिन मोहम्मद अल साती ने कहा कि उनके देश के लिए भारत आकर्षक निवेश गंतव्य है। सऊदी अरब भारत के साथ तेल, गैस, खनन, बुनियादी ढांचा, खान जैसे क्षेत्र में 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रहा है।



इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश अनुकूल संभावनाओं का नया परिदृश्य दिखाई दे रहा है। इससे भारत में विदेशी निवेश बढ़ने का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। यदि हम पिछले पांच वर्षों के विदेशी निवेश के आंकड़ों को देखें, तो पाते हैं कि वर्ष 2015 में 45 अरब डॉलर, वर्ष 2016 में 55 अरब डॉलर, वर्ष 2017 में 57 अरब डॉलर, वर्ष 2018 में 61 अरब डॉलर और वर्ष 2019 में अगस्त तक 38.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ है। निश्चित रूप से पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष विदेशी निवेश बढ़ने का परिदृश्य दिखाई दे रहा है।


हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम में विश्व की प्रमुख कंपनियों के सीईओ और उद्योगपतियों के समक्ष निवेश का आग्रह करते हुए कहा कि भारत में वैश्विक निवेश के अनुकूल अवसर मौजूद हैं। 'डेमोक्रेसी', 'डेमोग्राफी', 'डिमांड' और 'डिसाइसिवनेस' के चलते भारत में निवेश लाभप्रद बन गया है।


खासतौर से सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए जो प्रोत्साहन दिए गए हैं, अनुपयोगी कानूनों खत्म किया गया है और कॉरपोरेट टैक्स में जो भारी कटौती की गई है, उससे भारत आसियान और एशिया के अन्य देशों के बाजारों के मुकाबले निवेश प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।


देश में निवेश अनुकूल नया परिदृश्य दिखाई देने के तीन प्रमुख कारण हैं, एक अमेरिका-चीन ट्रेडवॉर के कारण चीन में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के भारत आने की संभावना, दो, भारत में कॉरपोरेट टैक्स में भारी कमी और तीन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, कारोबार और नवाचार में भारत की तेजी से सुधरती रैकिंग।


अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की बड़ी-बड़ी कंपनियां नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय आईटी प्रतिभाओं के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत में अपने ग्लोबल इनहाउस सेंटर (जीआईसी) तेजी से बढ़ाते हुए दिखाई दे रही हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमता और डाटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में शोध और विकास को बढ़ावा देने के लिए लागत और प्रतिभा के अलावा नई प्रोद्यौगिकी पर इनोवेशन और जबर्दस्त स्टार्टअप माहौल के चलते दुनिया की कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। 31 दिसंबर, 2018 तक भारत में करीब 1,257 जीआईसी थे।


देश में कॉरपोरेट टैक्स घटाने का जो अहम कदम उठाया गया है और जिस तरह पिछले एक वर्ष में भारत नवाचार, प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक संपदा, शोध आउटसोर्सिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ा है, उससे देश में वैश्विक निवेश बढ़ने की जो संभावनाएं बनी हैं, उनके मूर्त रूप लेने पर ही 2024-25 तक 350 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य साकार हो सकता है।

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