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द ग्रेट जू ऑफ चाइना

Sat, 31 Jan 2015 09:56 PM IST
ओम गुप्ता
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इस हफ्ते की किताब चीनी जंगली जानवरों की दुनिया की सैर कराएगी। मैथ्यु रीली की इस किताब का शीर्षक है- 'द ग्रेट जू ऑफ चाइना।' इन जानवरों को चीनियों ने 40 बरस से छिपा कर रखा हुआ था। इनकी नस्ल से दुनिया बेखबर थी। इन्हें चीनियों ने अचानक खोज लिया था। चीन के हाथ तो मानो कारू का खजाना लग गया था। उन्होंने एक अद्भुत चिडि़याघर का निर्माण कर डाला। कैसे विचित्र विरोधाभास हैं। नाम चिड़ियाघर और उसके अंदर विलक्षण जंगली जानवर। चीन ने इसे दिखाने के लिए चुनिंदा विशिष्ट मेहमानों और पत्रकारों को न्यौता दिया। उनमें एक थी डॉ. कंसाद्रा जेन केमरोन।
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जानी-मानी पत्रिका नेशनल जियोग्राफिक की प्रतिष्ठित लेखिका और रेंगने वाले जीवों की विशेषज्ञ। मेहमान कुछ डरे, कुछ घबराए हुए थे। मेजबान चीनियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कुछ नहीं होगा, कोई अनहोनी नहीं घटेगी। लेखक मैथ्यु रीली ने 11 उपन्यास लिखे हैं। उनमें से 'होवर कार रेसर' और 'आइस स्टेशन' पर फिल्म भी बन चुकी है। इन कृतियों का 20 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और उनकी 40 लाख प्रतियां बिक चुकी हैं। इस पुस्तक को ओरियन नाम के प्रकाशक ने छापा है। एक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि अमेरिका में चिड़ियाघरों की भरमार है। वहां हर साल एक करोड़ दर्शक आते हैं। यह तादाद उनके प्रिय खेलों-बेसबॉल फुटबॉल और बास्केटबॉल देखने वालों की संख्या से कहीं ज्यादा है। यह किताब कई मायनों में आधुनिक चीन की तस्वीर भी पेश करती है। वहां इतने लोग रहते हैं कि हर साल एक नया शहर बनाना पड़ता है। इसकी खुशहाली पाश्चात्य जगत को परेशान किए हुए है। यहां का मध्यवर्ग हर महीने अमीरी की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वह अब उन उपभोक्ता वस्तुओं की मांग करने लगा है, जो पहले निर्यात की जाती थी। चीन दुनिया का सबसे अव्वल देश बनने के लिए बेताब है।

चीन अपनी लोक-कथाओं के लिए भी जाना जाता है। पर अब तो आधुनिक चीन खुद में एक लोककथा बनता जा रहा है। वह अमेरिका के सांस्कृतिक दानव को चुनौती देने की मुद्रा में है। चीन अपने अजगर, जिसे बच्चे ड्रैगन के नाम से जानते हैं, के लिए भी मशहूर है। पढ़े-लिखे लोग इसे मिथक मानते हैं, वैसे दानव रूपी जीव सभी भाषाओं की पौराणिक कथाओं के लोकप्रिय पात्र हैं। यह एक अनबूझ पहेली है कि कैसे यह रपटता दानवी चरित्र सारी दुनिया की कल्पनाओं में प्रवेश कर गया।
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यह पुस्तक एक विराट फलक पर फैलायी गई है और इसका केंद्र बिंदु है ड्रैगन। ये ड्रैगन इस किताब के पृष्ठों से बाहर निकलकर जीवंत हो उठते हैं। स्विट्जरलैंड में एक ड्रैगन म्यूजियम भी है। यहां रेखाचित्रों और कला चित्रों के माध्यम से यथार्थवादी परिदृश्यों को उकेरा गया है। इस लेखक का प्रेरणा स्रोत था बच्चों का चहेता बैटमैन। लेखक कहता है कि उसने ड्रैगन के मिथक पर बरसों शोध किया है। यह चरित्र सार्वभौमिक बन गया और सब भाषाओं में उसकी कल्पना हुबहू एक जैसी थी। फिर आया 2008 का ओलम्पिक, जिसका आम चीनियों ने पुरजोर विरोध किया। यह संयोग नहीं है कि ठीक चार साल बाद लेखक ने चीनी चिड़ियाघर का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने जुरासिक पार्क को अपना संदर्भ बिंदु बनाया।

एक नमूना पेश है। 'सड़क के किनारे झाड़ियों के पीछे केमरोन की दो ध्वस्त जीपें, दो ड्रैगन बच्चे और चार चीनी मजदूर दिखाए दिए। ये बच्चे खूंखार लग रहे थे। नौ फुट ऊंचे, चौड़ी छाती, और चमकते लाल पेट। तभी एक ड्रैगन ने झपटकर एक मजदूर को दबोच लिया और उसकी एक बांह को निगल गया। वहां एक खून का फव्वारा छूटा। आदमी दर्द से चीखा। दूसरे ड्रैगन ने एक और मजदूर को शिकार बनाया। तब तक पहले ड्रैगन ने अपने शिकार का सफाया कर दिया था। दूसरे ने भागने की नाकाम कोशिश की, पर ड्रैगन ने उसकी टांग से उसे अपनी ओर खींच लिया। तभी राजा ड्रैगन लपलपाता वहां आ पहुंचा। वह वीभत्स दिख रहा था। लेकिन उसका अंदाज भव्य था। वह एक बस जितना लंबा था। छोटे ड्रैगनों ने अपना भोजन राजा को भेंट स्वरूप समर्पित कर दिया।'
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