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उद्योग: टेक्सटाइल पार्क से बदल जाएगा कपड़ा क्षेत्र, 2030 तक कर सकता है लक्ष्य पार

जयंतीलाल भंडारी
Updated Thu, 20 Apr 2023 06:28 AM IST

सार

भारत का कपड़ा निर्यात जो वर्ष 2021-22 में 44.4 अरब डॉलर रहा है, वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को पार कर सकता है।
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textile industry - फोटो : सोशल मीडिया


देश में कपड़ा क्षेत्र कृषि के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र भी है। इस समय कपड़ा उद्योग में करीब 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से और करीब छह करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त है। टेक्सटाइल सेक्टर को अभी जिस तरह से रणनीतिक रूप से प्रोत्साहन दिया जा रहा है, उससे कपड़ा उद्योग में अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और महिला श्रम शक्ति के साथ-साथ नए कंप्यूटर एआई पेशेवरों के लिए भी रोजगार के और अधिक प्रचुर मौके निर्मित होंगे।    


उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए के पांच एफ (फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्टरी टू फैशन तथा फैशन टू फॉरेन) विजन और प्लग ऐंड प्ले एकीकृत बुनियादी ढांचे की आधुनिक अवधारणा पेश की है। वस्तुतः पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क एक ही स्थल पर कताई, बुनाई, प्रसंस्करण, रंगाई व छपाई से लेकर कपड़ा निर्माण तक एक एकीकृत वस्त्र मूल्य शृंखला का अवसर प्रदान करते हुए दिखाई दे रहा है। प्रत्येक मेगा टेक्सटाइल पार्क से करीब एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ऐसे में पीएम मित्र पार्क दुनिया के लिए मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की पहल के बेहतरीन उदाहरण बनेंगे और मेगा टेक्सटाइल पार्क के माध्यम से घरेलू निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय कपड़ा बाजार में समान मौके मिलेंगे। ऐसे में भारत का कपड़ा निर्यात जो वर्ष 2021-22 में 44.4 अरब डॉलर रहा है, वह वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को पार कर सकता है।  


भारत में कपड़ा उद्योग शताब्दियों के समृद्ध इतिहास के साथ देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस समय कपड़ा क्षेत्र देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो प्रतिशत से अधिक और मूल्य के संदर्भ में देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में करीब सात प्रतिशत योगदान करता है। वर्तमान में भारत दुनिया में कपड़ों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है तथा वैश्विक रेडीमेड गारमेंट बाजार में अपना एकाधिपत्य जमाने को तैयार है। भारत से होने वाले कुल कपड़ा और परिधान निर्यात में सबसे अधिक करीब 27 प्रतिशत अमेरिका को किया जाता है। इसके बाद करीब 18 प्रतिशत यूरोपीय संघ को, करीब 12 फीसदी बांग्लादेश और करीब छह फीसदी संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात किया जाता है।


निस्संदेह भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन व निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार ने एक के बाद एक विभिन्न नीतिगत पहलों और योजनाओं को लागू करके प्रभावी कदम उठाए हैं। लेकिन इसके साथ ही कपड़ा क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने की भी आवश्यकता है। मसलन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के लिए तरजीही टैरिफ देने के कारण भारत से टेक्सटाइल निर्यात को नुकसान हुआ है। बांग्लादेश चीनी धागों का आयात करता है, उन्हें अपने सस्ते श्रम का इस्तेमाल करके कपड़े बनाता है और बिना किसी आयात शुल्क इस तरह के कपड़े भारत को निर्यात करता है। दुनिया के विभिन्न बाजारों में श्रीलंका और कई अफ्रीकी व अन्य देशों को शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होती है, उससे भी भारत के टेक्सटाइल विदेशी बाजारों में तुलनात्मक रूप से कम प्रतिस्पर्धी दिखाई देते हैं।

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