दो हफ्ते पहले गोलन पहाड़ी पर खड़े होकर मैंने एक कॉलम लिखा था, जिसमें कहा था कि कोरियाई प्रायद्वीप के बाद यह क्षेत्र दुनिया का दूसरा सबसे खतरनाक युद्ध क्षेत्र है। पर आज मैं उसमें संशोधन करना चाहता हूं।
पिछले हफ्ते शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन के मौके पर उत्तर और दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों को एक साथ मार्च करते हुए देखने के बाद; और उसी दौरान इस्राइल द्वारा सीरिया से उड़ान भरने वाले ईरानी ड्रोन को मार गिराने, सीरिया में एक ईरानी शिविर पर बम गिराने और सीरियाई मिसाइल के हमले में एक एफ-16 विमान को खोने के बाद; और सीरिया में अमेरिकी फौजों के बिल्कुल करीब रूसी 'ठेकेदारों' के समूहों को अमेरिकी जेट से मारते देखकर मुझे लगता है कि सीरिया-इस्राइल-लेबनान सीमा दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका है।
आप ऐसा और कहां देखते हैं, जब सीरियाई, रूसी, अमेरिकी, ईरानी और तुर्क फौजी जमीन पर या हवा में एक दूसरे से लड़ रहे हों और उनके साथ ही इराक, लेबनान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ईरान समर्थक शिया लड़ाके; उत्तरी सीरिया से अमेरिकी समर्थक कुर्द लड़ाके; आईएसएआईएस के बचे-खुचे लड़ाके; सऊदी तथा जॉर्डन समर्थक सीरियाई शासन विरोघी विभिन्न सुन्नी विद्रोही और 'बर्बर जंगलियों' से 'मदर रशिया' की रक्षा करने के लिए सीरिया गए सीरियाई शासन समर्थक रूसी कट्टरपंथी एक दूसरे से लड़ रहे हों?
जैसा कि वाशिंगटन पोस्ट ने रेखांकित किया है, पिछले एक हफ्ते के दौरान ही रूस, तुर्की, ईरान और इस्राइल ने सीरिया में दुश्मनी की आग में अपने विमान खो दिए। 'पाउडर केग' (बारूद रखने का ड्रम) शब्द का आविष्कार इसी जगह के लिए किया गया था। लेकिन अगर यह कहानी आपके सामने आ गई है और आप इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि अमेरिका की नीति क्या होनी चाहिए, तो मैं इसे आपके लिए सुलझाता हूं।
सीरियाई युद्ध के बारे में अच्छी और बुरी खबर यह है कि इसमें शामिल सभी पक्ष एक सख्त नियम द्वारा निर्देशित होते हैं-आप इस युद्ध की जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते। बुनियादी तौर पर यह एक भाड़े का युद्ध है। हरेक पक्ष अपने खुद के कुछ सैनिकों को ही जोखिम में डालकर अपने हितों को अधिकतम और अपने विरोधियों के प्रभाव को कम करना चाहता है और इसके बजाय अपने लक्ष्यों को अपनी वायुसेना की शक्ति, भाड़े के सैनिकों और स्थानीय विद्रोहियों के जरिये हासिल करना चाहता है।
अपने पुराने अनुभवों (अफगानिस्तान से रूस, ईरान-इराक युद्ध से ईरान, दक्षिण लेबनान से इस्राइल और इराक व अफगानिस्तान से अमेरिका) से उन्होंने यह सबक सीख लिया है कि उनकी जनता मध्य-पूर्व में किसी भी जमीनी युद्ध में लड़ते हुए इतनी ज्यादा संख्या में लाशों को बर्दाश्त नहीं करेंगी। व्लादिमीर पुतिन रूसी लोगों को बताना चाहते हैं कि महाशक्ति के रूप में रूस की वापसी हो गई है और वही सीरिया में किंगमेकर हैं। लेकिन वह किसी रूसी सैनिक को जोखिम में नहीं डाल रहे हैं।
ईरान, जिसने अभी हाल ही में अपने नागरिकों को विद्रोह करते हुए देखा, जो कि मांग कर रहे थे कि तेहरान को अपना धन अपने देश में खर्च करना चाहिए न कि सीरिया में, ने मानो जमीनी युद्ध को ठेके पर ले रखा हो। यह ऐसा है, मानो रूस ने इसे ईरान को उसकी ओर से लड़ने वाले हिजबुल्लाह और इराक, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान के शिया लड़ाकों के जरिये ठेके पर दे रखा हो। इस तरह से ईरान दमिश्क को नियंत्रित कर सकता है और इस्राइल पर दबाव डालने के लिए सीरिया को अग्रिम चौकी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन वह 'खुदरा' में नहीं, 'थोक' में भुगतान करता है।
वर्ष 2003 में मैंने अमेरिका द्वारा सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करने के अभियान का समर्थन करते हुए एक कॉलम लिखा था, जिसमें चेतावनी दी थी कि इराक पर किसी भी हमले का पहला नियम वही होगा जो मिट्टी के बर्तन भंडार का होता है-आप उसे तोड़ते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी आपकी होगी। अगर हम इराक को बर्बाद करते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी होगी। इसलिए आज सीरिया में इसी नियम का पालन हो रहा है कि अगर आप इसकी जिम्मेदारी लेते हैं, तो आप इसे तय कर सकते हैं। लेकिन चूंकि कोई भी सीरिया की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता, इसलिए वे सभी अपने प्रभावों को वहां ठेके पर देना चाहते हैं। इसमें युद्ध के बारे में इक्कीसवीं सदी का यथार्थ है।
लेकिन यह चिंताजनक है। इसका मतलब है कि स्थानीय स्तर पर कोई भी पक्ष इतना शक्तिशाली, संसाधन संपन्न या समझौते की इच्छाशक्ति वाला नहीं है, जो सीरिया को नीचे से ऊपर तक स्थिर कर सके और बाहरी खिलाड़ियों में से भी कोई इसे शीर्ष से नीचे तक स्थिर करने के लिए पर्याप्त शक्ति और संसाधनों का निवेश नहीं करना चाहता है। अच्छी बात यह है कि सीरिया में हर कोई नुकसान के इतना प्रतिकूल है कि शायद ही किसी के लापरवाह होने की आशंका है। बहुत संभावना है कि ईरानी और हिजबुल्लाह इस्राइल को लगातार दबाते रहेंगे, लेकिन इतना भी नहीं कि इस्राइल वह कर बैठे, जो करने में वह सक्षम है, यानी पड़ोसी लेबनान में हरेक हिजबुल्ला को तबाह करना और रॉकेट से ईरान पर हमला करना। इस्राइल जानता है कि ईरान के जवाबी रॉकेट उसके तटीय मैदानी इलाके में लगे उच्च तकनीक गलियारे को तबाह कर देंगे।
हो सकता है कि अंत में सभी खिलाड़ी थक जाएंगे और सीरिया में एक सत्ता-साझेदारी समझौता करेंगे, जैसा कि लेबनान ने 1989 में गृहयुद्ध खत्म करने के लिए किया था। अफसोस, लेबनान को इस फैसले तक पहुंचने में चौदह वर्ष लगे थे। इसलिए सीरिया से कुछ और खबर सुनने के लिए तैयार रहिए।