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दुख भरे दिन बीते रे भैया

Sun, 18 May 2014 06:53 PM IST
अशोक गौतम
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हे मेरे देश के वोटरो! हमारा बुरा और तुम्हारा खरा समय आखिर बीत ही गया। अब तुम्हारी उल्टी गिनती शुरू होने वाली है, क्योंकि अगला चुनाव तो पांच साल बाद होना है। तब तक तुम्हारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं होगा, यह सोचकर हमें बुरा तो लग रहा है। लेकिन हम तुम्हें अच्छे दिन आने का जो भरोसा दिला रहे हैं, प्लीज, उस पर भरोसा करते रहना। कभी न कभी तो तुम पर भगवान मेहरबान होंगे ही।
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खैर, चुनाव के इस बुरे वक्त को भी एक न एक दिन बीतना ही था। हालांकि यह भी कम संतोष की बात नहीं है कि चुनाव के दिनों की दौड़-धूप को छोड़ दें, तो राजनीति में मजे ही मजे होते हैं। लेकिन चुनाव के समय मुश्किल भी बहुत होती है। इसी बार एक-एक वोट के लिए क्या-क्या पापड़ बेलने पड़े? जिसके दरवाजे पर सपने में भी नहीं जाना था, उसकी चौखट पर नाक रगड़ी। एक-एक वोट का सवाल जो था।

मन से कहें, तो चुनाव के उन दिनों को याद करते हैं, तो भीतर तक सिहर जाते हैं। पांच साल जो मजे किए थे, सब निकल गए भैया। जिस्म की पांच साल से चढ़ी चर्बी देखो, कैसे छूमंतर हो गई। इस दौरान एक दूसरे को गालियां देते-देते भी हम बुरी तरह थक गए थे। अगर कहीं गलती से चुनाव कुछ और लंबा खिंच गया होता, तो बाद में हमें अपने गले का इलाज कराना पड़ता। खैर, जो बीत गई, अब उसकी क्या शिकायत करना।
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भगवान उनको लंबी उम्र दे, जिन्होंने हमारी बातों पर भरोसा किया और हमें वोट दिया। लेकिन कई तो ऐसे जालिम वोटर थे कि हमें आते देखकर ही अपने दरवाजे बंद कर देते थे। जैसे हम उनको काट खाएंगे। खैर, अगले पांच साल में हम उनको भी देख लेंगे।

तो दोस्तो, चुनाव खत्म, वोट हजम। तुम उनके न सही, मेरे बहकावे में आए, इसके लिए तुम्हें बहुत बहुत साधुवाद। मुझे खुशी इस बात की है कि तुम आखिर फिर किसी के बहकावे में तो आए। भगवान तुम्हें मुझे झेलने की भी क्षमता दे। पांच साल बाद फिर मिलेंगे। तब तक के लिए खुदा हाफिज!
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