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छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को मिलेगी राहत; अंतरिम बजट से उम्मीदें

जयंतीलाल भंडारी
Updated Tue, 16 Jan 2024 06:19 AM IST

सार

वेतनभोगी वर्ग के लाखों छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग की शिकायत है कि चालू वित्त वर्ष के बजट में उन्हें टैक्स संबंधी राहत नहीं मिली। ऐसे में, अब महंगाई वृद्धि के कारण उन्हें कुछ आयकर राहत की अपेक्षा है। राहत देने के लिए अनुकूल आधार भी हैं।
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बजट - फोटो : istock


वित्तमंत्री ने कहा है कि अंतरिम बजट लेखानुदान होगा। पूर्ण बजट के आगामी जुलाई में आने की संभावना है। अंतरिम बजट में लोकलुभावन योजनाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। पर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वित्तमंत्री कुछ जरूरी राहत दे सकती हैं। वर्ष 2019 के अंतरिम बजट में भी किसान सम्मान निधि व आयकर राहत देने के लिए जरूरी प्रावधान किए गए थे। चूंकि विगत दिसंबर में राज्यों के उत्साहजनक चुनावी नतीजों में कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका थी, ऐसे में, वित्तमंत्री आमजन के हितार्थ कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक व आर्थिक कल्याण की योजनाओं के साथ छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को राहत देने के लिए कुछ जरूरी प्रावधान कर सकती हैं।


वेतनभोगी वर्ग के लाखों छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग की शिकायत है कि चालू वित्त वर्ष के बजट में उन्हें टैक्स संबंधी राहत नहीं मिली। ऐसे में, अब महंगाई वृद्धि के कारण उन्हें कुछ आयकर राहत की अपेक्षा है। राहत देने के लिए अनुकूल आधार भी हैं। हाल ही में एसबीआई की रिसर्च विंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2014 से 2022 के दौरान रिटर्न भरने वाले आयकरदाताओं की संख्या और आयकर प्राप्ति में भारी वृद्धि हुई है। विगत 31 दिसंबर तक आयकर रिटर्न रिकॉर्ड 8.18 करोड़ का स्तर पार कर चुका था। पिछले आठ साल में आयकर रिटर्न भरने वाले दोगुने हुए हैं और आय की असमानता में भी कमी आई है। वित्त वर्ष 2014 से 2022 के दौरान व्यक्तिगत आय असमानता 0.472 प्रतिशत से घटकर 0.402 फीसदी रह गई। इस दौरान 3.5 लाख रुपये के कम आय वाले समूह से 36.3 फीसदी लोग उच्च आय वाले समूह में शामिल हुए। पिछले एक दशक से आयकर कानून में सुधार से आयकरदाताओं को सुविधा तो मिली ही, उनकी संख्या बढ़ाने में भी मदद मिली। इन सुधारों में करदाताओं के लिए पहचान रहित अपील व्यवस्था, करदाता चार्टर और पहचान रहित समीक्षा (फेसलेस असेसमेंट) जैसे बड़े आयकर सुधार प्रमुख हैं। ऐसे ही नॉन फाइलर्स, मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमए) के जरिये ऐसे लोगों की पहचान की जाती है, जिन्होंने हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन किया, पर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया।


आयकर विभाग ने आय व लेन-देन के आधार पर प्रोजेक्ट इनसाइट भी लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना, गैर-अनुपालन को रोकना और लोगों को कर देने के लिए प्रेरित करना है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए देश की वित्तीय सेहत अच्छी है। आयकर व जीएसटी का रिकॉर्ड स्तर पर संग्रहण हुआ है। राजकोषीय घाटे को बजट लक्ष्य के मुताबिक जीडीपी के 5.9 तक नियंत्रित रखा गया है।


वेतनभोगी वर्ग द्वारा अंतरिम बजट में राहत की अपेक्षा इसलिए भी न्यायसंगत है, क्योंकि वे ईमानदारीपूर्वक पेशेवरों व कारोबारी करदाताओं के वर्ग से ज्यादा आयकर चुकाते हैं। असंगठित या अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोग या तो आयकर न देने का प्रयास करते हैं या बहुत कम आयकर देते हैं। वर्ष 2022-23 में सिर्फ 2.24 करोड़ लोगों ने आयकर दिया। यानी कुल आबादी के 1.60 फीसदी लोग ही आयकरदाता हैं। शून्य आयकर देयता वाले आईटी रिटर्न की संख्या भी बढ़कर 2022-23 में 5.16 करोड़ हो गई। इनमें अधिकांश रिटर्न वे हैं, जो उद्योग-कारोबार व पेशेवर आयकरदाताओं से संबंधित हैं।


ऐसे में, आयकर न देने वाले और कम कर देने वाले लोगों की आमदनी का सही मूल्यांकन कर और उन्हें चिह्नित कर अपेक्षित आयकर चुकाने के लिए बाध्य किए जाने संबंधी कर सुधार भी अंतरिम बजट में अपेक्षित हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि वित्तमंत्री अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को राहत देंगी। इससे इस वर्ग की क्रयशक्ति में वृद्धि नई मांग का निर्माण करेगी और अर्थव्यवस्था गतिशील होगी।

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