अमेरिका के एक प्रवासी परिवार में स्वामी सत्यमित्रानंदगिरि जी महाराज ठहरे हुए थे। एक दिन एक संपन्न गुजराती युवक ने उनसे पूछा, महाराज, मैं अपने कामों की वजह से अत्यंत व्यस्त रहता हूं। सुबह से शाम तक मशीन की तरह निरंतर व्यापार के सिलसिले में विभिन्न कार्यों में लगना पड़ता है। साधना-उपासना के लिए समय नहीं निकाल पाता, हृदय में तनाव रहने के कारण रात में नींद की गोली लेकर सोना पड़ता है। कल्याण का सरल उपाय बताने की कृपा करें।
स्वामी जी ने कहा, भैया, सुबह शैया त्याग करते ही स्नान के बाद दो मिनट तक भगवान का ध्यान किया करो। अपने काम पर जाने से पूर्व माता-पिता के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया करो। रात को सोते समय भगवान की प्रार्थना करने का नियम बना लो और अपनी कमाई का कुछ भाग गरीबों और असहायों की सेवा के लिए अर्पित करना न भूलना। बस इन नियमों के पालन से तुम्हारा जीवन सफल हो जाएगा। रात्रि को गहरी निद्रा आने लगेगी।
उस युवक ने उसी दिन से स्वामी जी के बताए नुसखों का प्रयोग शुरू कर दिया। एक महीने के बाद वह स्वामी जी के दर्शन के लिए आया, तो गद्गद होकर बोला, महाराज जी, अब मैं अनुभव करने लगा हूं कि माता-पिता के आशीर्वाद में वास्तव में अपार शक्ति है। अब मैं रात को बिस्तर पर पहुंचते ही प्रार्थना के चमत्कार से गहरी निद्रा में लीन हो जाता हूं।