कुछ महीने पहले यह आरोप लगाया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में दक्षिण के गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने की कोशिश की गई। तमिलनाडु के राजनीतिक दल, खासकर प्रमुख विपक्षी दल द्रमुक ने केंद्र की भाजपा की अगुआई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तमिलनाडु को धोखा देना है।
हालांकि इससे पहले कि यह मुद्दा 1960 के दशक के हिंदी विरोधी आंदोलन की तरह राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता, केंद्र ने विवादित प्रावधान को खत्म कर दिया और आश्वासन दिया कि हिंदी किसी पर थोपी नहीं जाएगी।
इस हफ्ते के प्रारंभ में बंगलूरू में एक जैन उत्सव के लिए लगाए गए हिंदी बैनर के कथित तौर पर तोड़फोड़ पर कन्नड़ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद पड़ोसी राज्य कर्नाटक में आंदोलन भड़क उठा। इसकी शुरुआत बीते शनिवार को हुई, जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना शुरू हुआ, जिसमें दिखाया गया कि कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता हिंदी के होर्डिंग्स में कन्नड़ के बहिष्कार से नाराज होकर नारे लगा रहे थे।
नारे लगाते हुए कार्यकर्ता सीढ़ी पर चढ़ गए और चाकू से होर्डिंग को काटकर गिरा दिया। जल्द ही यह वीडियो वायरल हो गया और जैन फेडरेशन के सदस्यों ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। इस मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि गिरफ्तारी के बाद और बढ़ गया, क्योंकि कन्नड़ अस्मिता के नाम पर 'रिलीज कन्नड़ एक्टिविस्ट' ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा और राज्य के शीर्ष नेता भी इस आंदोलन में शामिल हो गए।