फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सदी को सुन रहा हूं मैं

विज्ञापन
विज्ञापन
सदी को सुन रहा हूं मैं
विज्ञापन

कवि : जयकृष्ण राय तुषार
प्रकाशक : साहित्य भंडार, इलाहाबाद
कीमत : 250 रुपये

नवगीत, हिंदी काव्य-धारा की एक नई विधा है, जो सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई और लोकगीतों की समृद्ध भारतीय परंपरा से जुड़ी हुई है। इनमें संस्कृति और लोकतत्व की अनुगूंज सुनाई देती है। लयात्मकता की पायल नवगीतों का श्रृंगार है, जो रस भरती है।

जयकृष्ण राय तुषार का नवगीत संग्रह 'सदी को सुन रहा हूं मैं' को पढ़कर एक अनूठा रसास्वादन करने को मिलता है। इनमें संस्कृति की धड़कनें गूंजती हैं और रिश्तों की मिठास भी घुली हुई है।  इस बात का अहसास 'मां तुम गंगाजल होती हो' गीत को पढ़कर बखूबी होता है।
विज्ञापन


तुषार के गीतों में एक ओर संघर्ष के स्वर हैं, तो दूसरी ओर एक खिन्नता भी है। इन गीतों में सुखद अहसास है, तो रास्ते की ठोकरों का दर्द भी छिपा हुआ है। 'मौसमों के अधीन' गीत को पढ़कर इस दर्द को भी महसूस कर सकते हैं।
विज्ञापन


आजकल जो नवगीत लिखे जा रहे हैं, वो लगभग एक से जान पड़ते हैं। विविधता और नयापन कम ही दिखाई पड़ता है। लेकिन, तुषार के गीतों में एक ऐसी मौलिकता है, जो कच्ची धूप जैसा मीठा अहसास कराती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें