एक राजा किसी बात पर अपने मंत्री से नाराज हो गया। वह इतना नाराज हो गया कि उसे बंदी बनाकर किले में कैद कर दिया। मंत्री किसी तरह किले से भाग निकलना चाहता था, लेकिन पहरा इतना कड़ा था कि उसका निकलना मुश्किल था। उसे किले के सबसे ऊपर मीनार की चोटी पर बनी कोठरी में कैद किया गया था, और वहां तक उसकी पत्नी को ही जाने की अनुमति दी गई थी।
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पहली बार मंत्री की पत्नी जब मिलने कैदखाने में आई, तो मंत्री ने उससे किसी तरह कैद से छुड़ाने की गुहार लगाई। कठोर पहरे के कारण पत्नी को कोई तरीका तो समझ में नहीं आ रहा था, पर उसे अपनी सूझ-बूझ पर भरोसा था। कुछ देर सोचने के बाद उसे एक युक्ति सूझ ही गई।
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उस युक्ति के बारे में पत्नी ने मंत्री को बताया और नीचे आ गई। एक कीड़े की पीठ पर एक तिनका चिपका कर मंत्री की पत्नी ने उसे किले की दीवार पर छोड़ दिया। तिनका इस तरह चिपकाया गया था कि उसका एक किनारा कीड़े के मुंह के ठीक सामने आता था।
तिनके के सिरे पर शहद लगाकर उसे किले की दीवार पर रख दिया। इसके बाद कीड़े की पूंछ में रेशम का धागा बांध दिया गया। शहद देखकर कीड़ा लालायित हुआ और वह उसे चाटने के लिए आगे चल पड़ा। वह किले की दीवार पर था और ऊपर की ओर जा रहा था। जितना वह आगे बढ़ता, शहद उतना ही दूर हो जाता।
इस तरह कीड़ा लगातार ऊपर चढ़ता चला गया। इधर मंत्री की पत्नी रेशम के धागे को क्रमशः मोटा और मजबूत बनाती गई। इसका नतीजा यह हुआ कि जब धागा मंत्री के हाथ तक पहुंच गया, तो उसने नीचे मोटा रस्सा बांध दिया। मंत्री ने रस्सा खींच लिया और वह उसके सहारे बाहर निकल गया।