मैं : नए साल पर अपने लिए कुछ संकल्प तय करना चाहता हूं, लेकिन संशय में हूं कि शुरुआत कैसे करूं। क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?
चैटजीपीटी: बिल्कुल! यह बताइए कि पिछले वर्ष की ऐसी कौन-सी उपलब्धि है, जिस पर आपको गर्व होता है।
मै : मुझे यह सोचकर अच्छा लगता है कि मैंने जिम जाना शुरू किया।
चैटजीपीटी : शानदार। क्या आप इस सफलता को आगे बढ़ाना चाहेंगे, या फिर जीवन के किसी दूसरे क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं?
मैं : मैं अपनी फिटनेस में ही सुधार जारी रखना चाहूंगा।
मेरे पूछने पर एआई चाहता तो मुझे संकल्पों की एक सूची थमा देता। लेकिन उसने यह पता लगाने की कोशिश की, कि किस प्रकार के संकल्प मेरे लिए सबसे उपयुक्त हो सकते हैं। एआई की खूबी यही है कि वह एक आदर्श दोस्त की तरह संवाद करता है। खैर फिटनेस पर चर्चा पर चैटजीपीटी ने जवाब दिया :
चैटजीपीटी : फिटनेस के लिए आप क्या करना चाहेंगे-दौड़ेंगे, मांसपेशियां बनाएंगे या फिर कोई नया खेल आजमाएंगे?
मैं : मैं सदैव पांच किलोमीटर दौड़ना चाहता था।
चैटजीपीटी : बहुत अच्छा! आप साप्ताहिक अभ्यास करें और फिर साल के मध्य तक पांच किलोमीटर तक दौड़ने की कोशिश करें।
मैं : हां, बिल्कुल।
चैटजीपीटी : पांच किमी के लक्ष्य को पाने के लिए हम आपके लिए एक साप्ताहिक रनिंग शेड्यूल बना सकते हैं। क्या यही आप चाहते हैं?
मैं (खुशी से) : धन्यवाद।
एआई न केवल मेरे संकल्पों को तय करने में मदद कर रहा है, बल्कि साप्ताहिक प्रगति की बात करके वह उन्हें पूरा करने की राह भी दिखा रहा है। लेकिन यह तो शुरुआत है। कल्पना कीजिए कि अगर मैं आगामी मार्च में फिर एआई से संपर्क साधूं, तो संवाद कुछ इस तरह का हो सकता है...मैं : मैं ज्यादा दौड़ नहीं पाया। मुझे नहीं लगता कि साल के मध्य तक पांच किलोमीटर दौड़ पाऊंगा।
चैटजीपीटी : खुद पर इतने कठोर मत बनिए! आपने कुछ प्रगति तो की ही है, जो सराहनीय है।
मैं : धन्यवाद, लेकिन अब मुझे क्या करना चाहिए?
चैटजीपीटी : क्या आप इस हफ्ते दो बार पंद्रह मिनट की दौड़ कर सकते हैं? छोटी-छोटी जीतें मायने रखती हैं।
मैं : हां, मैं ऐसा कर सकता हूं।
चैटजीपीटी : बढ़िया! हम हर हफ्ते कुछ मिनट जोड़ेंगे। परफेक्शन की तरफ मत भागिए, बस आगे बढ़ते रहिए।
बेंजामिन फ्रेंकलिन ने कहा था, ‘हर नए साल खुद को बेहतर बनाने के मौके से चूके नहीं।’ बेहतर बनिए और एआई इस नए साल के संकल्पों को पूरा करने में आपका सबसे अच्छा दोस्त हो सकता है। (फोर्ब्स में प्रकाशित लेख के अंश)