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उम्मीद का सवेरा: नया साल चुनौतियों के समाधान का काल भी हो, 'मीलों अभी चलना है...'

अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 01 Jan 2025 04:37 AM IST

सार

नए साल का मतलब सिर्फ तारीख का बदलना नहीं होता, बल्कि यह जीवन को एक नए ढंग से देखने और विफलताओं से सीखने व सबक लेने का भी अवसर हो सकता है। मसलन, यह उम्मीद की जानी चाहिए कि देश में लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक राजनीति में जिस तरह की कटुता दिख रही है, वह खत्म होगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला


नए साल का मतलब सिर्फ तारीख का बदलना नहीं होता, बल्कि यह जीवन को एक नए ढंग से देखने और विफलताओं से सीखने व सबक लेने का भी अवसर हो सकता है। मसलन, यह उम्मीद की जानी चाहिए कि देश में लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक राजनीति में जिस तरह की कटुता दिख रही है, वह खत्म होगी। संसद के कामकाज में रुकावटें दूर होंगी और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर मर्यादा को नहीं लांघेगा। विदेश नीति के मामले में, पड़ोसी बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद जिस तरह से भारत-विरोधी हवा चल रही है, उसे देखते हुए दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाए रखना भारतीय कूटनीति के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है।


इसके अतिरिक्त, बांग्लादेश समेत पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों की चीन के साथ बढ़ती नजदीकी भी एक बड़ी चिंता है। आर्थिक मोर्चे पर देखें, तो बढ़ती महंगाई के अलावा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की हालिया गिरावट, भले ही वह दूसरे देशों की तुलना में कम हो, आशंका पैदा करती है। भारत समेत दुनिया भर में चरम मौसमी घटनाओं का बढ़ना और प्रदूषित होती हवा चिंताजनक है, लेकिन समृद्ध देशों के अनमनेपन के चलते पर्यावरणीय सम्मेलनों का महज औपचारिकता बनकर रह जाना उससे भी ज्यादा परेशान करने वाला है। उम्मीद है कि नया साल इन चुनौतियों के समाधान का काल भी होगा।

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