अफगानिस्तान में एक तरफ तालिबान की सक्रियता के कारण हिंसा बढ़ी है, वहीं शांति बहाली के लिए कई गैरसरकारी कद्दावर अफगान नेताओं के साथ वार्ता का सिलसिला भी जारी है। अमेरिका के साथ अब तक सात दौर की वार्ता हो चुकी है। विगत 10-11 जुलाई को बीजिंग में अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान ने तालिबान से अनुरोध किया कि वे संघर्ष विराम के लिए राजी हो जाएं और अफगान सरकार से बातचीत करें, ताकि वर्षों से चली आ रही हिंसा समाप्त हो सके। अमेरिका आगामी सितंबर में अफगानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले तालिबान के साथ समझौते पर पहुंचना चाहता है, ताकि अपने सैनिकों को वापस बुला सके।
अमेरिका के विशेष दूत खलीलजाद ने, जो तालिबान और अमेरिका में समझौता कराने के लिए पिछले काफी समय से कोशिश कर रहे हैं, कई बार तालिबान से संघर्ष विराम की अपील की है। पर जब तक अमेरिकी-नाटो फौज अफगानिस्तान से निकल नहीं जाती, तब तक तालिबान संघर्ष विराम नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने वादा किया है कि वे अपनी धरती को दहशतगर्दों को इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देंगे। पर कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं, जैसे अमेरिकी फौज वहां से कब निकलेगी?