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गाय के बच्चे की हत्या करने वाले की ऐसी सजा आप सोच भी नहीं सकते

Tue, 14 Apr 2015 03:13 PM IST
गोपाल ठाकुर
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इंदौर में किसी रास्ते के एक किनारे पर एक गाय अपने बछड़े के साथ खड़ी थी। तभी देवी अहिल्या के पुत्र मालोजीराव की सवारी निकली। गाय का बछड़ा अकस्मात उछलकर रथ के सामने आ गया। गाय भी उसके पीछे दौड़ी, पर तब तक मालोजी का रथ बछड़े को कुचलता हुआ आगे निकल गया। किसी ने परवाह नहीं की।
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गाय स्तब्ध आहत-सी वहीं बैठ गई। थोड़ी देर बाद वह अहिल्याबाई के दरबार के बाहर टंगे घंटे के पास जा पहुंची, जिसे अहिल्याबाई ने फरियादियों के लिए लगा रखा था। अहिल्याबाई ने गाय को देखकर प्रहरी को बुलाया। कारण पूछने पर प्रहरी ने बताया, गोमाता अन्याय की शिकार तो हुई है, पर उसका कारण मैं बता नहीं पाऊंगा। अहिल्याबाई के जोर देकर पूछने पर प्रहरी ने सारा वाकया बता दिया।

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अहिल्याबाई ने सुबह दरबार में मालोजी की पत्नी मेनाबाई को बुलाया। उन्होंने उससे पूछा, यदि कोई व्यक्ति किसी मां के सामने बेटे की हत्या कर दे, तो उसे क्या दंड मिलना चाहिए? मालोजी की पत्नी ने जवाब दिया, उसे प्राणदंड मिलना चाहिए।
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देवी अहिल्या ने तुरंत मालोजी को प्राणदंड सुनाया और उसी जगह हाथ-पैर बांधकर मार्ग पर डाल दिया। रथ के सारथी को उन्होंने आदेश दिया, पर सारथी ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हुए कहा, आप चाहें, तो मुझे प्राणदंड दे दें, पर मैं यह नहीं कर सकूंगा।

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तब देवी अहिल्या स्वयं रथ पर सवार हुई और मालोजी की ओर रथ दौड़ाया। तभी एक अप्रत्याशित घटना हुई। फरियादी गाय रथ के सामने खड़ी हो गई। गाय को हटाकर दोबारा कोशिश की गई, लेकिन गाय फिर रुकावट बन गई। गाय ने मालोजी की रक्षा की। जिस जगह गोमाता अड़ी खड़ी हुई थी, वह स्थान इंदौर में आड़ा बाजार के नाम से जाना जाता है।
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