जानवरों पर किए गए एक शोध में भी यह बात सामने आई है कि जो चूहे भोजन खोदने के लिए अपने पंजों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें तनाव झेलने की क्षमता दूसरे चूहों से ज्यादा होती है। डॉ लैबर्ट इस शोध के निष्कर्षों की तुलना मनुष्यों पर किए अध्ययनों से करती हैं। उन्होंने पाया कि बुनाई, बागवानी और रंग भरने जैसे काम करने वालों को संज्ञानात्मक और भावनात्मक लाभ होता है, जिससे याददाश्त भी अच्छी रहती है। कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में ऑक्युपेशनल थेरेपी की प्रोफेसर कैथरीन बेकमैन कहती हैं कि कढ़ाई जैसे कामों में दोहराव तो होता है, पर बार-बार एक ही चीज करने से इसके प्रभान 'ध्यान' करने जैसे होते हैं।
नौवें की एक यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर ऑड्रे वॉन डेर मोर के अनुसार, हाथ से लिखने के फायदे कंप्यूटर पर टाइप करने से कहीं ज्यादा होते हैं। प्रोफेसर डॉ. रस्टी गेज कहती हैं कि हाथ से की गई क्रियाएं मस्तिष्क में नई कोशिकाओं के विकास में सहायक होती हैं। उनके अनुसार, जब आप कोई जटिल काम करते हैं, जिसमें निर्णय लेना और योजना बनाना शामिल होता है, तब यह काफी मायने रखता है कि आप अपने हाथों का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। जैसे, जब आप बागवानी, हस्तशिल्प, चित्रकेला करते या फिर वाद्ययंत्र बजाते हैं, आपके हाथ और दिमाग एक आदर्श तालमेल दिखाते हैं। वह कहती हैं कि यह दुनिया त्रिआगामी है और ऐसे हाथ व दिमाग के तालमेल वाले रचनात्मक कार्यों की मदद से आप दुनिया से उसकी ही भाषा में बात कर सकते हैं।