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नजरिया: पक्षी आपका इंतजार कर रहे हैं, दुनिया से भागना नहीं है इनके ‘पास जाना’

ईड यंग Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 07 Apr 2024 05:55 AM IST

सार

लोग पक्षी-पालन जैसी चीजों को सेवानिवृत्ति के बाद का विषय मानते हैं। सामान्य सोच यह है कि ऐसी चीजें तब की जाती हैं, जब आप कोई काम नहीं कर रहे होते हैं, क्योंकि इनका कोई आर्थिक लाभ नहीं होता। लेकिन हाल के कुछ वर्षों ने मुझे सिखाया है कि पक्षियों में दिलचस्पी का जो सुख है, वह दुनिया में और किसी में नहीं। पक्षियों से प्यार करना दुनिया से भागना नहीं है, बल्कि यही असली जीवन है।

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पक्षी - फोटो : अमर उजाला

पिछले साल सितंबर की बात है। मैं कैलिफोर्निया स्थित अपने घर के पास ही एक संरक्षित आर्द्र भूमि के अंतिम छोर तक गया और तरह-तरह के पक्षियों को देखने लगा। इससे पहले मैं गर्मियों में अपने कुत्ते को घुमाते हुए दूरबीन साथ में लेकर लंबी पैदल यात्रा करना पसंद करता था, लेकिन यह पहली बार था, जब मैं सिर्फ और सिर्फ पक्षियों को देखने निकला था। अमूमन माना जाता है कि पक्षियों को लगातार निहारते रहने वाला व्यक्ति एक पेशेवर या विशुद्ध पक्षी प्रेमी होता है। पर मैं ऐसा नहीं मानता। किसी क्षेत्र में रुचि रखने वाला व्यक्ति उसमें पारंगत हो, यह जरूरी तो नहीं। मेरा यह मतलब नहीं कि पेशेवर बनने के लिए कौशल जरूरी नहीं है। मैं तो यह कह रहा हूं कि कौशल न भी हो. पर गंभीर प्रयास और इरादे तो दिखने ही चाहिए। मसलन, नाच तो कोई भी सकता है, पर जरूरी नहीं कि हर नाचने वाला नर्तक हो। ठीक यही बात मुझ पर लागू होती है। पूरी जिंदगी पशुओं व पक्षियों में मेरी रुचि रही है, पर अपने भीतर पक्षियों को लेकर पेशेवर विशेषज्ञता मैं कभी विकसितु नहीं कर पाया।

देखने का अभ्यास


दो दशकों तक एक विज्ञान लेखक के रूप में मैंने पक्षियों के बारे में विस्तार से लिखा है, लेकिन मेरे लिए वह पल विशेष महत्व रखता है, जब मैंने सिर्फ पक्षियों लिए अपना समय और अपनी ऊर्जा समर्पित करने का फैसला किया। यह पहली बार था, जब पक्षियों को लेकर मैंने पेशेवर ढंग से सोचना शुरू किया। पेशेवर ढंग से मेरा आशय है कि पक्षियों को देखने में एक तरह की विशेषज्ञता का मैंने अभ्यास करना शुरू किया। पिछले सात महीनों में मैंने पक्षियों की तकरीबन 452 प्रजातियां देखी हैं। पक्षियों को देखने का मेरा अनुभव इस प्रकार हो चुका है कि में आवाज सुनकर ही बहुत-सी पक्षी प्रजातियों की पहचान कर सकता हूं। मैं बड़े और छोटे पीले पैरों, घरेलू और बैंगनी फिंच, कूपर और तेज-चमड़ी वाले बाजों में स्पष्ट अंतर कर सकता हूं। दुर्लभ पक्षियों की तलाश में भी मैंने काफी समय गुजारा है। हालांकि पक्षियों के बारे में मुझे पहले से भी काफी जानकारी थी। पक्षियों के आवासों और उनके तौर-तरीकों के बारे में काफी कुछ समझता भी हूं। सोशल मीडिया पर पक्षी प्रेमियों के कई समूहों का भी हिस्सा हूं और उनसे बातें भी करता रहता हूं।

देखेंगे तभी समझेंगे


पक्षी-प्रेमी होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है पक्षियों का ज्ञान और इसके लिए पक्षियों को जानना महत्वपूर्ण है। पक्षियों को जानने के लिए उन्हें देखना शुरू करना जरूरी है। मेरे पक्षी-प्रेम ने मुझे कैलिफोर्निया में ऐसे स्थानों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया, जहां पक्षी हो सकते हैं। मैं पक्षियों को देखने में इतना खो जाता हूं कि मुझे गर्मी, सर्दी, भूख और प्यास से कोई फर्क नहीं पड़ता। जब मैं पहली बार किसी नई प्रजाति को देखता हूं, तो मुझे एक अजीब शांति का अनुभव होता है, मानो मैंने कोई नशा किया हो।

पक्षियों से दोस्ती का एक प्रयोग


जब मैं सुबह अपने घर से बाहर निकलता हूं, तो आस- पड़ोस में पक्षियों के चहकने पर ध्यान देता हूं, जो हमेशा वहां रहते थे, लेकिन जिन पर पहले मैंने कभी ध्यान नहीं दिया। पक्षी प्रेमियों के लिए ऋतुओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऋतु परिवर्तन विशेष प्रजातियों के आगमन और प्रस्थान का एक महत्वपूर्ण संकेत है। मैं मौसम में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों और निवास स्थान के फर्क पर विशेष ध्यान देता हूं। पक्षियों से दोस्ती करनी हो, तो आप एक प्रयोग कर सकते हैं। आप जहां भी रहते हों, अपनी बालकनी या छत पर अनाज के कुछ दाने और पीने का थोड़ा पानी पक्षियों के लिए रखना शुरू कीजिए। हो सकता है कि शुरुआती कुछ दिन एक भी पक्षी न आए, लेकिन आप क्रम न तोड़िए। एक दिन आप देखेंगे कि कुछ पक्षियों ने आना शुरू किया, फिर कुछ और दिन बाद पक्षियों की संख्या बढ़ने लगेगी, और कुछ पक्षी तो लौट-लौट कर आने लगेंगे। उन पक्षियों के पास न जाइए, पर उनके व्यवहार को दूर से देखने-समझने की कोशिश करते रहिए।

खुद से करें सवाल


जब मैंने पक्षियों को देखना शुरू किया, तो मुझे लगा था कि अधिकांश पक्षी प्रजातियों को शायद ही देख पाऊं। मेरा मानना था कि रॉबिन और वेस्टर्न ब्लूबर्ड जैसे पक्षियों को देखना आसान होगा, वहीं ब्लैक स्कीमर या पेरेग्रीन फाल्कन या लॉगरहेड श्राइक, सुनहरी चीलों, बड़े सींग बाले उल्लुओं जैसे दुर्लभ पक्षियों को देखना मुश्किल होगा, पर पक्षियों के प्रति मेरी जिज्ञासा ने इसे सरल बना दिया। रैत की पहाड़ी पर नाचते हुए क्रेनों को देखकर और प्रशांत महासागर में उनकी गोताखोरी देखते हुए उत्सुकता भरा मेरा प्रश्न कि 'मैं उसे कभी नहीं देख पाऊंगा' अब 'मैं उसे कहां पा सकता हूं?' में बदल गया है।

यही वास्तविक जीवन है


निस्संदेह, पक्षियों के लिए समय निकालना बहुत बड़ा विषय है, क्योंकि लोग इसे सेवानिवृत्ति के बाद का विषय मानते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि पक्षियों को पालने जैसी चीजें तब की जाती हैं, जब आप काम नहीं कर रहे होते हैं, क्योंकि इनसे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता है। पर मैं ऐसा नहीं मानता हूं, क्योंकि हाल के वर्षों ने मुझे सिखाया है कि पक्षियों को पालने जैसे कामों में जो खुशी, आश्चर्य और जगह से जुड़ाव होता है, वह किसी और कार्य में नहीं है। पक्षियों में दिलचस्पी लेना वास्तविक दुनिया से भागना नहीं है. बल्कि यही तो असली जीवन है। सोशल मीडिया पर घंटों बिताने से ज्यादा सुख किसी पक्षी की खोज में है। वसंत के दिनों में पक्षियों को देखने के लिए में बेहद उत्साहित हूं, क्योंकि गाने वाले और अन्य प्रवासी पक्षी खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजर रहे हैं। जिन पक्षियों को मैंने केवल हल्के भूरे रंग में देखा है, वे इस मौसम में अपने नए आकर्षक पंखों को धारण करने वाले हैं। जिन प्रजातियों को मैं पहले से जानता हूं, उनके नए सुरों को मुझे सीखना होगा। मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता, क्योंकि नए पक्षी मेरा इंतजार कर रहे हैं।

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