ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम्।।
अर्थात् मर्म को न जानकर किए हुए अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है। ज्ञान से मुझ परमेश्वर के स्वरूप का ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यान से सब कर्मों के फल का त्याग श्रेष्ठ है, क्योंकि त्याग से तत्काल ही परम शान्ति होती है।
भीष्म पर्व,गीता 12/12
(अर्जुन के प्रति साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का गीतोपदेश)
अगर आप सारा दिन अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं, तो इससे आपको नींद संबंधी विकारों का सामना करना पड़ सकता है, कार्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जोड़ों में दर्द रह सकता है और आपके रिश्ते भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन अगर आप मोबाइल फोन से निकलने वाले विकिरण (रेडिएशन) से डरे हुए हैं, तो विशेषज्ञों का कहना है कि इस डर से आपको फोन छोड़ने की कतई जरूरत नहीं है।
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डीन गेल वोलोस्चक के अनुसार सेलफोन का विकिरण बिल्कुल भी खतरनाक नहीं होता। बर्मिंघम में अलबामा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एमिला कैफ्रे कहती हैं कि स्मार्टफोन विकिरण उत्सर्जित करते हैं, क्योंकि ये आवाज, टेक्स्ट, फोटो और ई-मेल को नजदीकी मोबाइल टावर तक पहुंचाने के लिए अदृश्य ऊर्जा तरंगों का उपयोग करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस संबंध में करीब तीन दशक के वैज्ञानिक अनुसंधान बताते हैं कि इस विकिरण का कैंसर या किसी भी दूसरी बीमारी से कोई संबंध नहीं है।
न्यूयॉर्क में कार्नेल मेडिकल सेंटर में ब्रेन ट्यूमर केंद्र के निदेशक डॉ हॉवर्ड फाइन के अनुसार विकिरण कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ ही हानिकारक होते हैं। डॉ फाइन कहते हैं, ‘परमाणु बम या काफी हद तक एक्सरे मशीनें आयनीकृत विकिरण का उत्सर्जन करती हैं, जो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं और कैंसर का कारण भी बन सकती हैं।’ लेकिन, डॉ कैफ्री के अनुसार स्मार्टफोन से उत्सर्जित होने वाला विकिरण गैर-आयनीकृत श्रेणी का होता है, जो उतना शक्तिशाली नहीं होता कि नुकसान पहुंचा सके। आयनीकृत विकिरण ज्यादा खतरनाक होते हैं, जो हमारे डीएनए को बनाने वाले परमाणुओं से इलेक्ट्रॉनों को अलग कर देते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका पैदा होती है। लेकिन इसका प्रमाण नहीं कि स्मार्टफोन विकिरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार आज ज्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कैंसर का कारण मोबाइल फोन है। धूम्रपान, प्रदूषण, खराब जीवनशैली इत्यादि कैंसर का कारण तो कुछ भी हो सकता है, इसे मोबाइल विकिरण से जोड़ने का कोई अर्थ नहीं। आज जो मोबाइल फोन आ रहे हैं, वे सन 2000 की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं। 5जी विकिरण दरअसल 4जी से ज्यादा खतरनाक नहीं है, यह सिर्फ ज्यादा डाटा ट्रांसफर की अनुमति देता है।
डॉ कैफ्री के अनुसार यह विकिरण शरीर के तापमान को एक डिग्री तक बढ़ा दता है, लेकिन डॉ वालोस्चेक के अनुसार बुखार या किसी अन्य स्वास्थ्य जोखिम को पैदा करने के लिए विकिरण को हमारे शरीर को एक डिग्री गर्म करने की जरूरत होगी, जो एक सेलफोन कभी नहीं कर सकता।