अब जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण के लिए नई शेरवानी और शलवार के साथ पेशावरी चप्पल पहनने के लिए तैयार हो गए हैं, उनकी टीम के सामने एक बड़ा सवाल है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाए या नहीं। अंततः कई दशकों बाद पाकिस्तान में वंशवादी शासन खत्म हो गया, क्योंकि इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) मुल्क की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अगले पांच वर्षों तक शासन चलाने के लिए सरकार गठन के लिए तैयार है। इन दिनों इमरान खान को बधाई देने के लिए विदेशी राजदूतों और उच्चायुक्तों के फोन आते रहते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें बधाई देने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया, राजनीतिक गलियारों और मीडिया में हलचल मच गई।
भारत हमारा सबसे निकटतम पड़ोसी देश है, जिसके साथ हम मुल्क का एक लंबा इतिहास साझा करते हैं। फिलहाल उसके साथ हमारे द्विपक्षीय रिश्ते विभिन्न कारणों से सबसे निचले स्तर पर हैं। इमरान खान ने चुनाव जीतने के बाद अपने पहले भाषण में भारत का जिक्र किया और इस क्षेत्र के लोगों के फायदे के लिए अमन और दोस्ताना रिश्तों के महत्व को पहचाना। इमरान की टिप्पणियों को दोनों मुल्कों में सकारात्मक ढंग से देखा गया, जो एक अच्छा संकेत है।
पाकिस्तान में हालांकि कुछ कट्टरवादियों ने टेलीफोन वार्ता के दौरान इमरान खान द्वारा कश्मीर मुद्दे का जिक्र न करने के कारण उनकी आलोचना की। शायद उन्हें इस बात का एहसास नहीं हुआ कि यह भारत की ओर से मात्र एक बधाई संदेश था, जहां सभी मुद्दों पर चर्चा नहीं की जा सकती थी। इस तरह के फोन कॉल केवल कुछ मिनटों के होते हैं। विदेश नीति और रक्षा मामलों की विशेषज्ञ डॉ. शिरीन माजरी ने विदेश सचिव तहमीना जंजुआ के साथ शपथ ग्रहण समारोह में विदेशी गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए एक बैठक की। यह भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने सार्क देशों के नेताओं को आमंत्रित किया था। तब हर किसी ने उस समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शामिल होने का समर्थन किया था। यह अलग बात है कि शरीफ की इस बात को लेकर काफी आलोचना हुई कि उन्होंने नई दिल्ली में कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाया।
चूंकि शपथ ग्रहण समारोह में कम समय बचा है, इसलिए यह माना गया कि सार्क देशों के नेता इतने कम समय की सूचना पर संभवतः इस्लामाबाद न आ पाएं। इसलिए यह फैसला किया गया कि शपथ ग्रहण समारोह बिल्कुल सादा होगा, क्योंकि इमरान खान इस पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते। पर उन्होंने अपने तीन विदेशी दोस्तों को आमंत्रित किया है, और वे सभी भारतीय हैं।
बॉलीवुड स्टार आमिर खान पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर, कपिल देव और नवजोत सिंह सिद्धू को आगामी 11 अगस्त को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में आने के लिए निमंत्रण भेजा गया है। अपने जमाने के मशहूर भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर इमरान खान को अपना छोटा भाई कहते हैं और उनके साथ बेहद सौहार्दपूर्ण रिश्ता रखते हैं। अपने समय के मशहूर तेज गेंदबाज इमरान खान ने गावस्कर को कई बार आउट किया था। यदि ये महान सितारे पाकिस्तान आते हैं, तो लोगों की दिलचस्पी और कुछ में नहीं, बल्कि हमारे भारतीय मेहमानों में रहेगी। ज्यादातर पाकिस्तानियों के लिए यह सपने के सच होने जैसा होगा।
भले ही इमरान की पार्टी पीटीआई नेशनल एसेंबली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसके पास सरकार गठन के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हंै। इसने मुल्क में सांसदों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दिया है। कई निर्दलीय सांसदों को पीटीआई में शामिल होने तथा कई छोटी पार्टियों को पीटीआई के साथ गठबंधन करने के लिए कहा जा रहा है।
यह कवायद पंजाब प्रांत में भी चल रही है, जो पहली बार पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज की उंगलियों से फिसलता प्रतीत होता है। पीएमएलएन ने कई दशकों तक पंजाब पर शासन किया है। फिलहाल पीटीआई पंजाब में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए जरूरी संख्याबल हासिल करने के लिए छोटी पार्टियों से संपर्क कर रही है।
असल में इमरान खान वही कर रहे हैं, जिसके लिए वह नवाज शरीफ की आलोचना करते थे। इमरान ने कई नेताओं को 'चोर' और 'भ्रष्ट' बताया था, पर आज बहुमत जुटाने के लिए वह उन्हीं नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। पाकिस्तान के युवा, जिनमें से ज्यादातर इमरान खान के समर्थक हैं, इससे निराश हैं, क्योंकि राजनीति का यह रूप 'नए पाकिस्तान' का नहीं है, जिसका इमरान खान ने वायदा किया था। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने तनाव के संकेत दिए हैं, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि पाकिस्तान को शीघ्र ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से नया कर्ज हासिल करना होगा। अमेरिका ने पाकिस्तान को साफ-साफ बता दिया है कि अगर इस तरह का पैकेज पाकिस्तान को दिया जाता है, तो उसका उपयोग चीन के सीपीईसी कर्ज को चुकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इमरान खान की सरकार को मुश्किलों से ही शुरुआत करनी होगी और पाकिस्तान के लोग यह देखेंगे कि उन्होंने मुल्क से जो-जो वायदे किए थे, उन सभी को निभाते हैं या नहीं।
राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन कहते हैं, 'पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई से प्रेरित राजनीतिक संकट ने सेना को आगे जगह दी। लेकिन समस्या का समाधान टकराव के माध्यम से नहीं किया जा सकता। शक्ति के असंतुलन का समाधान केवल संसद व अन्य नागरिक संस्थानों की मजबूती और सुशासन से ही हो सकता है। जाहिर है, यह रातोंरात नहीं होने वाला। पाकिस्तानी की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा स्थिति बेहतर संतुलन की मांग करती है।' बहरहाल, राष्ट्रपति भवन में एक सादे शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी हो रही है, लेकिन लोग इस मौके पर इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा खान की कमी महसूस करेंगे। बुशरा खान पूरी तरह से पर्दे में रहती हैं और लोगों के बीच नहीं आतीं। यह पहली बार होगा कि लोग शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री की बीवी को नहीं देख पाएंगे।