सवाल यह है कि क्या ट्रूडो के जाने से भारत-कनाडा संबंधों में फिर से बदलाव होगा? रातों-रात बदलाव होगा, ऐसा तो नहीं लगता। द्विपक्षीय संबंध बनने में दशकों लग जाते हैं, लेकिन बिगड़ने में बस कुछ ही हफ्ते लगते हैं। 1960 के दशक से लेकर इस सदी के पहले दशक तक, कनाडा को एक शांतिपूर्ण, कानून का पालन करने वाला राष्ट्र होने की प्रतिष्ठा प्राप्त थी। यह आप्रवासियों को चुंबक की तरह आकर्षित करता था। जनवरी 2025 तक कनाडा में भारतीय मूल के करीब 20 लाख लोग रह रहे हैं, जिनमें से एक तिहाई सिख हैं।
पिछले कुछ दशकों में, कनाडा ने खुद को शिक्षा के लिए एक गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना शुरू कर दिया, इसलिए हजारों एशियाई और अफ्रीकी छात्र वहां पहुंचे। एक दशक पहले विशेषाधिकार रखने वाले राजनीतिक परिवार के खूबसूरत जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा में तूफान मचा दिया था और भारी बहुमत के साथ देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उनको वह दर्जा मिला, मानो वह कुछ भी गलत कर ही नहीं सकते थे! उनके व्यभिचार और वित्तीय घोटालों को नजर अंदाज किया गया। फिर वैश्विक वित्तीय मंदी आई और लोगों का उनसे मोहभंग होने लगा। वह फिर से चुनाव जीतने में सफल रहे, लेकिन कम बहुमत के साथ और अपना अस्तित्व बचाने के लिए उन्हें कट्टरपंथी सिख और इस्लामी पार्टियों पर निर्भर रहना पड़ा। अचानक ट्रूडो की हरकतें कनाडा के लोगों को परेशान करने लगीं। महंगाई ने घरेलू बजट को खत्म कर दिया, बेरोजगारी बढ़ गई, सभी तरह के संदिग्ध और हिंसक लोग, जो अपने देश में अवांछित थे, कनाडा आ गए। इससे उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आई।
कनाडा के ढीले कानूनों और सतर्कता की कमी ने उसके पड़ोसियों और विश्व समुदाय को खतरे में डाल दिया है। मैं सभी से स्टीवर्ट बेल द्वारा 2004 में लिखी गई एक महत्वपूर्ण पुस्तक कोल्ड टेरर, हाउ कनाडा नर्सर्स एंड एक्सपोर्ट्स टेरर अराउंड द वर्ल्ड पढ़ने का आग्रह करता हूं। इसकी शुरुआत कनाडा की खुफिया और सुरक्षा सेवाओं के एक पूर्व प्रमुख की इस टिप्पणी से होती है कि कनाडा में दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूह सक्रिय हैं, संभवतः अमेरिका को छोड़कर। लेकिन विदूषक ट्रूडो कहते रहे कि कनाडा कितना खुला और समावेशी समाज है। उन्होंने 2019 जी-7 बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाकर, अपने अमेरिकी आकाओं को खुश करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बुरा-भला कह कर, बाली में 2022 जी-20 शिखर सम्मेलन में एक निजी बातचीत का विवरण बताकर चीनी राष्ट्रपति को नाराज करके और भारत पर अपने प्रिय सिख प्लंबर की हत्या का आरोप लगाकर और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कठोर भाषा का इस्तेमाल करके चार प्रमुख विश्व शक्तियों के साथ कनाडा के संबंधों को खराब किया।
वर्ष 2024 तक ट्रूडो को पश्चिमी देशों ने भी दरकिनार कर दिया। उनकी वित्त मंत्री और उपप्रधान मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने बेईमानी और महंगाई का आरोप लगाते हुए बजट पेश करने से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया (उन्हें यह समझने में बहुत समय लगा)। उनके प्रिय सिख राजनीतिक साथी, जिन्होंने उन्हें सत्ता में रखा था, ने कहा कि वे उन्हें बाहर निकाल देंगे। उनके यूरोपीय संघ और नाटो के कथित ‘सहयोगी और साझेदार’ पद छोड़ने के लिए उन पर दबाव बनाने लगे (डोनाल्ड ट्रंप ने काफी अशिष्टता से), लेकिन कनाडा के विदूषक खुद को धोखा देते रहे कि वह सभी के प्रिय हैं। नवंबर 2024 के अंत में, भ्रमित ट्रूडो ने संसद में यह शेखी बघारी कि वह चीजों को सुलझा लेंगे, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीतने पर डोनाल्ड ट्रंप के आवास पर जाकर ट्रूडो ने उनसे विनती की कि वह कनाडाई उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ न लगाएं, क्योंकि इससे कनाडा की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
ट्रंप ने ताना देते हुए कहा कि आप अमेरिका का 51वां राज्य बन जाओ, तो टैरिफ का सामना नहीं करना पड़ेगा और आप वहां के गवर्नर रहोगे। अपने देश को पश्चिम का पाकिस्तान बना देने के बाद ट्रूडो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंसी का पात्र बन गए। नवंबर 2024 के अंत में, जब मॉन्ट्रियल में नाटो विरोधी और इस्राइल विरोधी हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, जहां गठबंधन की वार्षिक सभा के लिए लगभग 300 नाटो प्रतिनिधि एकत्र हुए थे, ट्रूडो एक संगीत समारोह का आनंद ले रहे थे और उन्होंने इसे गैर-जरूरी घटना मानते हुए वहां जाना भी जरूरी नहीं समझा। फिर अपने ब्रिटिश समकक्ष का अनुसरण करते हुए ट्रूडो ने कहा कि एक कानून के शासन वाले राष्ट्र (अपराधियों द्वारा शासित) के रूप में कनाडा इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गिरफ्तार कर लेगा, यदि वह वहां आते हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने युद्ध अपराधों के आरोपों पर इस्राइली नेता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
जो बाइडन ने वारंट को अपमानजनक कहा और शक्तिशाली सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने चेतावनी दी कि यदि कनाडा ने ऐसी कोई कार्रवाई की, तो अमेरिका कनाडा की अर्थव्यवस्था को कुचल देगा (बिल्कुल वही, जो डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूडो से कहा था)। नवंबर 2024 के मध्य में, एक कनाडाई सुरक्षा अधिकारी ने कबूल किया कि उनकी सरकार के पास कनाडा में सिख हिंसा से भारतीय अधिकारियों को जोड़ने का कोई सबूत नहीं है! ट्रूडो ने कहा कि उनके खुफिया अधिकारी ‘अपराधी’ हैं, जो मीडिया को शीर्ष-गुप्त जानकारी लीक कर रहे हैं। जनवरी 2025 तक, ट्रूडो ने अपनी अकड़ और समझदारी, दोनों खो दी थीं, लिबरल पार्टी के कई सदस्यों ने उनसे पद छोड़ने के लिए कहा। अंत में अपमानित होकर उन्हें पद छोड़ना पड़ा। लेकिन उन्होंने ऐसा करके कनाडा और दुनिया पर उपकार किया है।