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GST: पुराने वाहनों के मामले में राहत मिलेगी; जीएसटी परिषद के एलान के बाद उपजी उलझन को आसानी से समझें

सतीश सिंह
Updated Tue, 07 Jan 2025 06:46 AM IST

सार

मार्जिन पर कर लगाना कोई नई बात नहीं है। यूपीए के कार्यकाल के दौरान भी पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त के क्रम में मार्जिन पर कर की वसूली होती थी, जिसे 'सर्विस टैक्स या सेवा कर' के नाम से जाना जाता था। इस कर की वसूली 2017 तक की गई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock


बता दें कि सिर्फ पंजीकृत वाहन विक्रेता अपने लाभ मार्जिन पर जीएसटी का भुगतान करेगा। अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को या किसी वाहन डीलर को अपनी पुरानी गाड़ी बेचता है, तो उस पर उसे कोई जीएसटी नहीं देना होगा। मसलन, यदि कोई व्यक्ति 15 लाख रुपये में एक कार खरीदता है और तीन वर्षों तक उसका इस्तेमाल करने के बाद उसे 10 लाख रुपये में बेच देता है, तो उसे बिक्री मूल्य पर कोई जीएसटी नहीं देना होगा। जब डीलर दस लाख रुपये में खरीदी गई पुरानी कार को किसी ग्राहक को 11 लाख रुपये में बेचता है, तो उसे एक लाख रुपये का लाभ होता है, अतः उसे एक लाख रुपये पर 18 प्रतिशत यानी 18,000 रुपये का जीएसटी भुगतान करना होगा। यह कर पंजीकृत वाहन विक्रेता को इसलिए देना होगा, क्योंकि उसने यह लाभ अपने कारोबार के जरिये अर्जित किया है।


यदि पंजीकृत वाहन विक्रेता आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32 के तहत बेचे गए वाहन पर मूल्यह्रास का दावा करता है, तो भी उसे लाभ मार्जिन पर जीएसटी देना होगा। यहां मार्जिन का अर्थ हुआ (विक्रय मूल्य-मूल्यह्रास के बाद की शेष कीमत)। यदि यह मार्जिन नकारात्मक होगी, तो डीलर को कोई जीएसटी नहीं देना होगा, लेकिन अगर यह सकारात्मक होगी, तो उसे विक्रय मूल्य और खरीद मूल्य के बीच के अंतर यानी लाभ पर जीएसटी देना होगा।


मसलन, किसी वाहन की कीमत 20 लाख रुपये है और विक्रेता उसमें नौ लाख रुपये के मूल्यह्रास का दावा करता है और वाहन बेचने की कीमत 10 लाख रुपये निर्धारित करता है। ऐसे में वाहन का विक्रय मूल्य, जो 10 लाख रुपये है, से मूल्यह्रास के बाद की कीमत, जो 11 लाख रुपये है, से घटाने पर नकारात्मक मार्जिन निकलता है, इसलिए उसपर कोई जीएसटी नहीं देना होगा, लेकिन यदि वाहन को 10 लाख रुपये की जगह 12 लाख रुपये में बेचा जाएगा, तो एक लाख रुपये का सकारात्मक मार्जिन निकलेगा, तो 18 प्रतिशत की दर से उसपर वाहन डीलर को 18,000 रुपये जीएसटी के रूप में सरकार को भुगतान करना होगा।


मार्जिन पर कर लगाना कोई नई बात नहीं है। यूपीए के कार्यकाल के दौरान भी पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त के क्रम में मार्जिन पर कर की वसूली होती थी, जिसे 'सर्विस टैक्स या सेवा कर' के नाम से जाना जाता था। इस कर की वसूली 2017 तक की गई। जीएसटी परिषद के इस ताजा फैसले से पहले, 1200 सीसी या उससे ज्यादा इंजन क्षमता वाले पुराने वाहनों, जो पेट्रोल, एलपीजी या सीएनजी से चलते थे और 1500 सीसी या उससे ज्यादा सीसी वाले इंजन के डीजल वाहन पर वर्ष 2018 से 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं, पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूली जा रही है। 


जाहिर है, जीएसटी को लेकर जटिलताएं बेशक बढ़ती जा रही हों, लेकिन पुराने वाहनों को दोबारा बेचने संबंधी मामले को अलग तरह से देखा जा सकता है। सरकार ने इस पहल के माध्यम से सभी पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त पर जीएसटी वसूली में एकरूपता लाने का काम किया है, जिसे प्रशंसनीय कहा जा सकता है। भारत में पुरानी कारों का बाजार लगातार बढ़ रहा है। जाहिर है, बाजार में विस्तार होने से सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। 


दास वेल्ट ऑटो और कार एंड बाइक की इंडियन ब्लू बुक 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पुरानी कारों का बाजार वित्त वर्ष 2022-23 में 31.33 अरब डॉलर का था, जिसके वित्त वर्ष 2027-28 तक 70.48 अरब डॉलर तक हो जाने का अनुमान है। युवा शानदार जिंदगी जीना चाहते हैं। पहले लोग 20-25 साल की नौकरी करने के बाद अधेड़ावस्था में कार खरीदते थे, पर अब नौकरी मिलते ही लोन से ही सही, लेकिन युवा तुरंत कार एवं मकान खरीद रहे हैं। पैसे कम होने पर युवा पुराने वाहन खरीदने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पुराने वाहन बाजार के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं, जिसकी अनदेखी सरकार कतई नहीं कर सकती है। कहा जा सकता है कि सभी तरह के पुराने वाहनों के दोबारा या तीसरी बार बेचने पर लाभ मार्जिन पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूली करने पर सरकार के राजस्व में इजाफा होगा। लेकिन जीएसटी परिषद के इस निर्णय से आम आदमी पर कोई कर बोझ नहीं बढ़ेगा। राजस्व में वृद्धि होने से सरकार विकासात्मक कार्यों पर खर्च करने में समर्थ हो सकेगी, जिसका फायदा अंत में आम जनता को ही मिलेगा।

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