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सामंतों के चंगुल में पाकिस्तान

शिवदान सिंह Updated Mon, 09 Jul 2018 05:22 PM IST
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शिवदान सिंह
लंबे स्वाधीनता संग्राम के बाद भारत को विदेशी शासन से आजादी मिली, पर मोहम्मद अली जिन्ना तथा कुछ अन्य मुस्लिम नेताओं ने अपनी राजनीतिक आकाक्षाएं पूरी करने के लिए पाकिस्तान बनवाया। जहां स्वस्थ राष्ट्रीय सोच तथा धर्मनिरपेक्ष नीति अपनाने के कारण भारत का चहुंमुखी विकास हुआ, वहीं इस्लामी कट्टरता को राष्ट्रीय नीति बनाकर तथा इसी आधार पर संविधान का निर्माण कर पाकिस्तान आज दुनिया के विफल गणराज्यों की सूची में पहुंच गया है।


हालांकि जिन्ना का सपना पाकिस्तान को धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील राष्ट्र बनाने का था। पर पाकिस्तान के कुछ स्वार्थी जागीरदारों, जमींदारों तथा सरदारों ने अपनी सामंतशाही चलाने के लिए कट्टरता को वहां की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बना दिया। जनरल जियाउल हक ने तो यहां तक कहा कि यदि पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीति के केंद्र में इस्लाम नहीं है, तो हमें अलग पाकिस्तान बनाने की क्या जरूरत थी।


पाकिस्तान के बड़े जागीरदार तथा जमींदार अब भी बड़े-बडे़ भूभागों के मालिक हैं। उन्होंने देश की राजनीति में घुसकर उसे अपने हितों के आधार पर चलाना शुरू कर दिया। भूमि सुधार कानून वहां 1959 तथा 1972 में पारित किया गया, पर व्यावहारिक तौर पर भूमि सुधार तथा बंधुआ मुक्ति कानून लागू नहीं हो सके हैं।


भुट्टो परिवार 40,000 एकड़ तथा गुलाम मुस्तफा जतोई 30,000 एकड़ जमीन के मालिक हैं। ऐसे ही हिना रब्बानी खार, शाह महमूद कुरैशी, वालाक शेर मजारी, महम्मद मियां सुमरो, नवाब बुग्ती, पूर्व प्रधानमंत्री जफरउल्ला खान जमाली के अलावा 80 प्रतिशत राजनेता हजारों एकड़ जमीन के मालिक हैं। इन सामंतों ने अपनी जमीनों पर बेगार करवाने के लिए हजारों किसानों तथा मजदूरों को अपनी जेलों में बंद कर रखा है। देहातों में 49 फीसदी लोग अशिक्षित हैं।


इन सामंतों की पहुंच नौकरशाही तथा पुलिस में भी है, इसलिए इनकी ज्यादतियों की शिकायत पुलिस भी दर्ज नहीं करती। पाकिस्तान की सामंतशाही ने न केवल उसे विफल देश की श्रेणी में लाकर खड़ा किया है, बल्कि यह सामंतशाही आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है। पाकिस्तान में न तो शिक्षा का प्रसार हुआ और न ही उसे आर्थिक उदारीकरण का कोई लाभ मिला। विदेशी निवेशकों ने भी वहां निवेश नहीं किया।


कृषि के घाटे का सौदा साबित होने कारण बड़े-बड़े भूभागों के मालिकों ने कृषि भूमि को सऊदी अरब तथा खाड़ी देशों के लोगों को बेचना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान की काफी जमीन पर विदेशियों का कब्जा है। पाक की इस दुर्दशा का फायदा उठाकर ही चीन ने आर्थिक गलियारे के रूप में पाक को गुलाम बनाने की रूपरेखा तैयार कर ली है। सामंतों तथा जागीरदारों द्वारा सत्ता, नौकरशाही एवं सेना पर कब्जे से नौजवान पूरी व्यवस्था से निराश हो गए हैं और आतंकी बनकर अपनी झुंझलाहट निकालने का प्रयास करते हैं।


पाकिस्तान में मानवाधिकारों का चूंकि सरेआम उल्लंघन हो रहा है, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को उस पर प्रतिबंध लगाकर वहां भूमि सुधार तथा बंधुआ मजदूर उन्मूलन कानून लागू करने के लिए बाध्य करना चाहिए। इसके अलावा ईशनिंदा कानून को भी हटाना चाहिए, जिसके जरिये अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है। यदि पाकिस्तान में ये तमाम कदम उठाए जाएं, तो आतंकवाद की समस्या खत्म होकर वह एक प्रगतिशील देश बन सकता है, क्योंकि वहां का आम नागरिक मेहनती एवं प्रतिभाशाली है।
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