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महिलाओं की अनकही त्रासदी

Sat, 14 Mar 2015 11:04 PM IST
श्रीमोयी पीयु कुंडु
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तकरीबन एक वर्ष पहले जयपुर की एक महिला ने फेसबुक पर मुझे लिखा कि दिल्ली की अपनी अगली यात्रा में वह मुझसे मिलना चाहती है। वह एक युवा मां थी। सोलह साल की उम्र में उसकी शादी उससे दोगुनी उम्र के शख्स के साथ कर दी गई थी। इससे मुझे किसी की याद आ गई। वह नीति (बदला हुआ नाम) थी, जिसकी स्थिर भूरी आंखें और  झिझकते हुए दुपट्टे के कोने को मुंह में दबाना, आज भी मेरे जेहन में है। तब हम दक्षिण दिल्ली के एक हाई-फाई कैफे में चाय की चुस्कियां ले रहे थे। मैं अपनी किताब सीताज कर्स आधा लिख चुकी थी। यह किताब दांपत्य जीवन में बलात्कार और मुंबई की एक गृहिणी मिसेज मीरा पटेल के बारे में है, जिनका यौन शोषण उनके परिवार के गुरु जी ने किया था। यह स्वीकारने से पहले, कि उसकी जिंदगी की भी यही कहानी है, नीति ने अचंभे से मेरी ओर देखा। उसका पति शारीरिक तौर पर अक्षम था। इस कड़वे सच को शादी के समय उससे छिपाया गया था। उन्नीस साल की नीति को साठ साल के साधु के हवाले कर दिया गया। इसकी वजह यह थी कि व्यवसायी परिवार को एक वारिस की जरूरत थी।
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'आपने अपने पति को क्यों नहीं बताया?' मैंने साहस बटोरते हुए यह पूछा। नीति के दर्द को मैं अपने अस्तित्व की गहराइयों से महसूस कर रही थी। उसके अंदर ऐसा क्या था, जो भारतीय महिला का प्रतिनिधित्व कर रहा था? उसका दर्द, उसकी शर्मनाक चुप्पी, उसकी चीखें, उसकी नग्नता या उसकी सादगी? एक महिला का कभी धर्म के नाम पर, तो कभी विवाह के नाम पर शोषण किया जाता है। उसे दहेज की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है, और अकेली औरत होने का दंश भी। उसके माता-पिता को सारे दोष उसमें ही दिखते हैं। कभी छोटे, तो कभी भड़काऊ कपड़ों के लिए उसे ताने सुनने पड़ते हैं। रात में नौ बजे के बाद उसका पुरुष मित्र के साथ फिल्म देखना गुनाह समझा जाता है।

महिला को प्रताड़ित किया जाता है, अगर उसे बच्चा नहीं होता। और यही अपमान उसे तब भी झेलनी पड़ती है, जब वह लड़की जनती है। यह स्थिति उस देश में है, जहां मंदिरों में देवियों की पूजा होती है। भारत में महिलाओं की यह अनकही त्रासदी है।
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कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव (सीएचआरआई) के मुताबिक, 2001 से 2013 के बीच देश के 28 राज्यों में बलात्कार के 2,64,130 मामले सामने आए। यानी हर दिन बलात्कार की तकरीबन 56 घटनाएं हुईं। 2001 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बलात्कार के 16,075 मामले सामने आए, वहीं, 2013 में यह आंकड़ा 52.30 फीसदी बढ़कर 33,707 पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आसपास तमाम विवादों को समेटे निर्भया डॉक्यूमेंट्री आई और कई सवाल खड़े कर गई। हम यह बहस करने में जुटे रहे कि क्या इसमें अपराधियों को सम्मानजनक ढंग से पेश किया गया है? क्या फिल्म निर्माताओं ने 12 दिसंबर की उस भयावह घटना की सूचना जुटाने के लिए बलात्कारी मुकेश सिंह को 40,000 रुपये दिए थे? हमने पीड़िता के अभिभावकों को भी न्याय की गुहार लगाते समाचार चैनलों पर सुना। 'शर्मिंदा' गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डॉक्यूमेंट्री का कड़ा विरोध किया और भारत में उसके प्रसारण पर रोक लगा दी। भारत सार्वजनिक तौर पर शर्मसार हुआ! सोशल मीडिया में गर्मागर्म जंग हुई।

इन तमाम आपाधापी में मेरा सिर्फ एक ही सवाल है- अगर आज निर्भया जीवित होती, तो क्या होता? क्या होता, अगर वह अपनी चोटों के आगे हार नहीं मानती? क्या होता, अगर वह एक ऐसी लड़की होती, जिसका 'इतिहास' आपको पता होता? क्या हम उसे पूरा समर्थन करते? क्या उसकी शादी होती? क्या वह मां बनती? क्या वह अपना स्याह इतिहास भुला पाती? क्या वह बस में यात्रा करती? क्या वह सिनेमा हॉल जाती? क्या वह अपने 'प्यार' को उन्मुक्तता से चूम पाती? क्या यही समाज, जो उसके लिए आंसू बहा रहा है, एकजुट होकर उसे न्याय दिलाने के लिए लड़ता? क्या हम उस महिला को फिर से स्वीकार करते, जिसके दामन पर 'निशान' लग चुका हो? क्या उसके उस 'दाग' का हम सम्मान करते, जिसे वक्त भी नहीं भर सकता?

इन सवालों का जवाब चेन्नई की प्रिया जेसन के जीवन में छिपा है। 32 वर्षों की अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उसने कहा कि वह बचपन में अपने पिता के हाथों यौन हिंसा की शिकार हुई और फिर एमबीए करने के दौरान उसका सामूहिक बलात्कार हुआ। अब उसे उम्मीद है कि नई सरकार बलात्कार पीड़िता के लिए काफी कुछ करेगी। बलात्कार पीड़िता के पुनर्वास की व्यवस्था करने के साथ ही फास्ट ट्रैक अदालतों में मामला चलाया जाएगा और नई सरकार कड़े कानून बनाएगी। उसकी अपील जोरदार और स्पष्ट है कि 'यौन शोषण का अर्थ लड़की के जीवन का अंत होना नहीं है।'

बहरहाल, यौन हिंसा को रोक पाने में असमर्थ राष्ट्र में एकजुटता दिखाने के लिए नैतिकता का जनमत तैयार करना एक आंकड़ा भर है। यह लैंगिक आरोप-प्रत्यारोप है, जो कुछ भी रोकने में नाकाम है। क्योंकि सच्चाई यही है कि यहां हर 20 मिनट में किसी न किसी महिला के साथ बलात्कार होता है, और हर दस में नौ मामले दर्ज नहीं हो पाते।
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