विज्ञान की सकारात्मकता महज कामयाब अंतरिक्ष अभियानों और चिकित्सकीय सफलताओं के रूप में समझी जाती है। दूसरी तरफ रसायनशास्त्र को लेकर कुख्यात कहानियां तो अमोनिया के रिसाव, हानिकारक धुएं, आतंकवादियों के गले में टंगे जहरीले कैप्सूल इत्यादि तक ही सीमित होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज की दुनिया रसायन विज्ञान पर ही टिकी है? दुनिया की आधी आबादी का पेट भरने वाले उर्वरक, दवाओं से लेकर आरएनए टीके, लिथियम आयन बैटरी और सौर सेल जैसी नवीनतम तकनीकों की खोज का श्रेय रसायन विज्ञान को ही जाता है। आपके भोजन से लेकर मोबाइल फोन और लैपटॉप तक सब कुछ रसायन विज्ञान की ही देन है। सूक्ष्मतम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने वाली लिथियम बैटरियां ही होती हैं। अयस्क से धातुओं का पृथक्करण, हल्के प्लास्टिक, पॉलिमर और कंपोजिट का संश्लेषण इत्यादि रसायन विज्ञान की ही बदौलत है। बिजली बचाने के लिए अपने घरों में आप जो एलईडी लगाते हैं, उसके पीछे भी रसायन विज्ञान ही है।
20वीं सदी की शुरुआत में क्वांटम यांत्रिकी की खोज ने रसायन विज्ञान की हमारी सैद्धांतिक समझ को विकसित किया। लेकिन अब रसायन विज्ञान जो कर रहा है, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। रसायनज्ञ आपके भविष्य पर काम कर रहे हैं। रिचार्ज होने वाली बैटरी में लिथियम अनिवार्य रूप से होता है, जिसे अलग करना पर्यावरण की दृष्टि से नुकसानदेह है। इसलिए, रसायनज्ञ भविष्य की बैटरी के लिए सोडियम जैसे किसी दूसरे पदार्थ का विकल्प तलाश रहे हैं। वे अंतरिक्ष यानों में उपयोग में लाए जाने वाले सौर सेलों के लिए नई सामग्रियां तलाश रहे हैं।
यह रसायन विज्ञान की ही खोज है, जो सूर्य के प्रकाश से ज्यादा उपयोगी ऊर्जा खींचने के लिए सिलिकॉन के साथ काम कर सकती है और सौर सेल को काफी हल्का बना सकती है। स्वच्छ ईंधन का विकल्प हाइड्रोजन को माना जा रहा है, जिसके उत्पादन के लिए रसायन विज्ञानी जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। कैंसर के टीके, नए एंटीबायोटिक्स और वायरस के हमले से हमें बचाने में रात-दिन एक करने वाले रसायन विज्ञानी दरअसल हमारे चारों तरफ की दुनिया को पढ़कर हमारी राह आसान बना रहे हैं। (द कन्वर्सेशन)