बांग्लादेश में हाल ही में इस्कॉन और एक अन्य मंदिर पर हमला हुआ। एक शिया मस्जिद में नमाजियों पर बमों व गोलियों से हुए जानलेवा हमलों में कई लोग घायल हुए। यह दर्शाता है कि बांग्लादेश तेजी से धार्मिक कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता पैदा हो गई है।
मस्जिद पर हुए हमले की जिम्मेदारी बर्बर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने कबूल की है। इससे पहले 24 अक्तूबर को शियाओं के आशुरा जुलूस पर हुए हमले की जिम्मेदारी भी आईएस कुबूल चुका है। बांग्लादेश के इंस्टीट्यूट ऑफ पीस ऐंड सिक्योरिटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जनरल मीरूज्जमा का कहना है कि सुन्नी बहुसंख्यक और शिया में झगड़े पहले कम ही देखने को मिलते थे। इससे पहले नमाजियों को कभी गोली का निशाना नहीं बनाया गया।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के लोगों को भी कट्टरपंथी बराबर निशाना बना रहे हैं। उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। कुछ दिन पहले ही एक इतालवी पादरी को गोली मारकर घायल कर दिया गया। इसी तरह एक सहायताकर्मी और एक जापानी कृषक की हत्या की गई।
इन सबकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली। रंगपुर में एक चर्च के पादरी को धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि जो लोग ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं, उन्हें हम एक-एक कर मार देंगे। इस पत्र में दस अन्य पादरियों के नाम भी लिखे गए थे, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। वहां जो लेखक एवं चिंतक बिना किसी डर के अपने विचार व्यक्त करते हैं, उनकी हत्या कर दी जाती है।
ऐसे ब्लॉगरों एवं खुली सोच वाले लेखकों की लगातार हत्याएं हो रही हैं। इससे देश में अभिव्यक्ति की आजादी और निरपेक्ष विचारों की घटती जगह को लेकर चिंता बढ़ी है। ब्लॉगरों पर हमलों को रोकने में सुरक्षा एजेंसियां असरदार साबित नहीं हो रही हैं, जबकि पीड़ितों ने पुलिस में धमकियां मिलने की शिकायत की हुई है।
दूसरी तरफ बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में इस्लामिक स्टेट या अलकायदा जैसे संगठनों की मौजूदगी के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह दुष्प्रचार है, ताकि ऐसी धारणा पैदा हो कि बांग्लादेश असुरक्षित है। उन्होंने अपनी चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की मुखिया खालिदा जिया और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की कट्टरपंथी सहयोगी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को इन हमलों की साजिश रचने एवं दुष्प्रचार करने का जिम्मेदार ठहराया है।
ऐसे ही सत्ताधारी अवामी लीग के वरिष्ठ नेता सुरनजीत सेनगुप्ता ने कहा है कि विपक्ष एक ओर जहां परेशानी पैदा कर रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में लगा हुआ है। यहां तक कि विपक्ष भारत की मोदी सरकार से कह रहा है कि हसीना को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर करे। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि ताजा हिंसा संभवतः बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी व जमात-ए-इस्लामी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की फांसी रुकवाने के लिए की जा रही है।
सच तो यह है कि बांग्लादेश में इन दिनों बाहरी या अंदरूनी कट्टरपंथी ताकतों ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर जानलेवा हमले तेज कर दिए हैं। शेख हसीना इन पर काबू पाने के लिए कोशिश तो कर रही हैं, लेकिन उन्हें ऐसे तत्वों से निपटने के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी और ऐसा ढांचा खड़ा करना होगा, जो असरदार तरीके से निपट सके। वहां जो लेखक या ब्लॉगर खुली सोच रखते हैं, उनकी कट्टरपंथियों द्वारा हत्या कर दी जाती है।