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परिदृश्य: अगर परमाणु हमला हो गया तो...क्या हम इसके लिए तैयार हैं?

डब्ल्यू जे हेगन Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 10 Mar 2024 06:43 AM IST

सार

परमाणु बम फट चुका है। चारों तरफ नर्क का दृश्य है। चीखें सुनाई दे रही हैं। डामर, स्टील, मिट्टी, कांच, मांस और हड्डियों का मलबा उड़कर मीलों तक फैले मशरूम की आकृति के बादलों, जो जमीन से लेकर आसमान तक व्याप्त है, में समा गया है। भयानक शोर के बीच इसका रंग बदलता रहता है...फिर यह सूर्य को ढक लेता है। शीतयुद्ध काल के बाद कई पीढ़ियां गुजर गईं, इसलिए परमाणु युद्ध एक बिसरी हुई कहानी माना जाने लगा था। लेकिन अब इसकी तैयारी के लिए मानवता को जगाने का समय आ गया है।

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nuclear war

मिसाइल लॉन्च कर दी गई है। जब इसकी ठोस-ईंधन वाली रॉकेट मोटर सक्रिय हो जाएगी, तो वारहेड वापस पृथ्वी की ओर गिरने लगेगा। और जमीन से कुछ मील ऊपर यह फट जाएगा। इसकी प्लूटोनियम कोर और आसपास की सामग्री इस तरह से एक साथ जुड़ी हुई है कि यह एक मिली सेकंड के भीतर आयनित गैस और फिर विद्युत चुंबकीय तरंगों में बदल जाएगी। एक चमकदार सफेद रोशनी आकाश को मीलों तक ढक लेगी। जो भी इसे देखेगा, वह कुछ देर के लिए अंधा हो जाएगा। 10 हजार टन टीएनटी विस्फोटक फट गया हो, ऐसी गर्जना से नीचे की जमीन हिल जाती है। एक विशाल आग का गोला तेजी से फैलने लगता है। और यह सब इतनी जल्दी से होता है, जैसे एक साथ ही सब कुछ हो रहा हो। एकदम से तापमान लाखों डिग्री तक पहुंच जाता है, जो सूर्य की सतह से भी अधिक गर्म होता है। लकड़ी, प्लास्टिक, तेल इत्यादि ज्वलनशील चीजें आग को भड़काती हैं और जानवर आग की लपटों से घिर जाते हैं। फिर कुछ ही सेकंडों में वे राख में तब्दील हो जाते हैं। गैसें और गिरे हुए बिजली के तार इस नर्क को मीलों तक भड़काने का काम करते हैं। आग का तूफान इतनी अधिक ऑक्सीजन की खपत करता है कि इससे कारों या घरों के अंदर छिपे लोगों का दम घुट सकता है।

फिर एक शॉक वेव आती है। भरपूर गड़गड़ाहट के साथ एक ऊर्जा, जो हर दिशा में फैल जाती है और सुपरसोनिक की गति से दौड़ती है। इमारतें, पेड़ और अन्य सभी चीजें टूटने लगती हैं और एक-दूसरे पर चढ़ने लगती हैं। वस्तुएं, इमारतें, पेड़, जानवर और इंसान सब जल चुके हैं। डामर, स्टील, मिट्टी, कांच, मांस और हड्डियों का मलबा उड़कर मीलों तक फैले मशरूम की आकृति के बादलों, जो जमीन से लेकर आसमान तक व्याप्त है, में समा गया है। जमीन से आकाश तक फैला बादलों का तूफान एक जीवित वस्तु की तरह प्रतीत होता है। इसका रंग आकाश में तब तक सफेद से पीला, लाल से काला होता रहता है, जब तक यह सूर्य को ढक न ले।

चारों तरफ अंधेरा छा गया है। कानों में घंटियां बज रही हैं। धुएं और मलबे से हवा घनी हो चुकी है। जो लोग बच गए हैं, उन पर रेडिएशन का असर उल्टी और दस्त के दौरों के रूप में होता है। जो लोग स्वस्थ दिख रहे हैं, वे कुछ दिन बाद एनीमिया से पीड़ित और कमजोर हो सकते हैं। उनके बाल झड़ सकते हैं, आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है या फिर प्रतिरक्षा प्रणाली विफल हो सकती है। गर्भवती महिलाओं के गर्भों पर असर पड़ सकता है और पारिस्थितिकी तंत्र को पहुंचा नुकसान वर्षों तक बना रह सकता है।

वर्ष 2022 का एक वैज्ञानिक अध्ययन बताता है कि अगर हिरोशिमा में गिराए गए बम के आकार के 100 बम, जो अनुमानित वैश्विक परमाणु शस्त्रागार के एक फीसदी से भी कम हैं, शहरों में गिराए जाते हैं, तो करीब तीन करोड़ लोग तो तुरंत मर सकते हैं और करीब 26 करोड़ लोग दो वर्षों के भीतर भूख से मर सकते हैं।

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