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ऋण पर रिजर्व बैंक के नियम: अब मर्ज नहीं बनेगा कर्ज, लोन फोरक्लोजर पर पूर्व-भुगतान शुल्क से मिल सकती है निजात

नारायण कृष्णमूर्ति
Updated Wed, 23 Oct 2024 06:56 AM IST

सार

त्योहारों के मौसम में रिजर्व बैंक ने फ्लोटिंग रेट वाले टर्म लोन बंद करने पर लगाए जाने वाले फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट शुल्क को खत्म करने की बात कही है। एमएसएमई को भी अब ये शुल्क नहीं देने होंगे। हालांकि अभी यह घोषणा सार्वजनिक चर्चा के लिए खुली है, लेकिन इससे उधार लेने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
 
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ऋण पर रिजर्व बैंक के नियम - फोटो : अमर उजाला


ऋणदाता एक निश्चित समय-सीमा के लिए ऋण देता है, ताकि वह ऋण पर निर्धारित ब्याज के रूप में ऋण को बढ़ाकर धन कमा सके। भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर ऋणदाताओं के लिए नियमों की समीक्षा और निर्धारण करता रहा है, ताकि ऋण देने का व्यवसाय ऋण लेने वालों के साथ भेदभाव न करे और साथ ही यह ऋणदाताओं के लिए घाटे का सौदा न बन जाए। पिछले 20-25 वर्षों में ऋण के क्षेत्र में बहुत कुछ बदल गया है, जिससे ऋण देने का व्यवसाय उतना सीधा नहीं रह गया है, जितना कोई उम्मीद करता है।


सबसे पहले, बैंकों द्वारा अलग-अलग मानदंडों के आधार पर ऋण पर ब्याज दरें तय की जाती थीं। इसका मतलब यह था कि प्रत्येक बैंक के पास उधारकर्ताओं को ऋण देने के लिए अलग-अलग मानदंड थे। फिर बैंकों को फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दर पर ऋण देने की अनुमति मिली। इससे उधारकर्ताओं को ब्याज दर में बदलाव से लाभ हुआ, खासकर जब दरें कम हो गईं और इसलिए उनके द्वारा लिए गए ऋण पर उनका ब्याज व्यय भी कम हो गया। लेकिन ब्याज दर बढ़ने पर उन्हें ऋण पर उच्च ब्याज दर का भुगतान करने की चुनौती का भी सामना करना पड़ा। फिर ऐसे मामले सामने आए, जो उधार लेने वालों के हित में नहीं थे, खासकर ऐसे परिदृश्यों में, जहां उन्होंने ऋण की सहमत अवधि से पहले ऋण का आंशिक भुगतान करने की योजना बनाई थी। इसलिए उधार लेने वालों के लिए 15 साल की खातिर लिए गए आवासीय ऋण को दस साल या उससे पहले बंद करना समझदारी नहीं थी, भले ही उनके पास ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त पैसे हों।


रिजर्व बैंक का अनोखा कदम

रिजर्व बैंक ने उधारकर्ताओं को भारी फौजदारी लागत का भुगतान किए बिना अवधि से पहले ऋण खत्म करने की अनुमति देने के लिए कदम उठाया। एक समय ऐसा भी था, जब कोई व्यक्ति हर साल ऋण का एक हिस्सा बिना किसी दंड के जल्दी भुगतान कर सकता था। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) व्यवसाय-ऋण का समय से पहले भुगतान करने के मामले में इतने भाग्यशाली नहीं थे।


अधिकांश ऋणदाता ऋण खत्म करने (फोरक्लोजर) पर एक महत्वपूर्ण प्रीपेमेंट (पूर्व-भुगतान) शुल्क थोपते हैं, जो महत्वपूर्ण है। इस विसंगति को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में ऋणों के समय से पहले भुगतान पर उच्च फोरक्लोजर जुर्माना हटाने के लिए कदम उठाया है। हाल तक, बैंकों और एनबीएफसी को गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को स्वीकृत किसी भी फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर फोरक्लोजर शुल्क या पूर्व-भुगतान जुर्माना लगाने की अनुमति नहीं थी।


एमएसएमई को प्रस्ताव

अब भारतीय रिजर्व बैंक ने इन दिशा-निर्देशों के दायरे को बढ़ाकर एमएसएमई को दिए जाने वाले ऋणों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य ऋणदाताओं द्वारा बेहतर पारदर्शिता और ग्राहक केंद्रीयता के साथ छोटे व्यवसायों के हितों की रक्षा करना है। यह नियम अभी सार्वजनिक चर्चा के लिए खुला है और समय के साथ यह एक नियम बन जाना चाहिए और यह सही दिशा में है। अक्सर सूक्ष्म और लघु व्यवसाय मंझोले आकार के उद्यमों के विपरीत असुरक्षित ऋण लेते हैं और ये ऋण आमतौर पर उनकी संपत्ति या ऐसी किसी भी संपत्ति के खिलाफ होते हैं। यह उधारकर्ताओं को समय से पहले ऋण चुकाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु

एक अच्छा और पारदर्शी कदम है।


हालांकि रिजर्व बैंक का यह कदम उधारकर्ताओं के लिए अनुकूल है, लेकिन जब ऐसे शुल्कों को माफ करने की बात आती है, तो इसका ऋणदाताओं की लाभप्रदता पर असर पड़ता है। बैंकों और अन्य ऋणदाताओं को सूक्ष्म और लघु उद्यम खंड में कम लागत के साथ अपने ऋणों का वितरण करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऋण गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) में न बदल जाए और साथ ही उधारकर्ताओं को समय से पहले ऋण चुकाने के लिए भारी शुल्क और जुर्माने का सामना न करना पड़े।
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नियमों और कानूनों में किसी भी बदलाव के साथ इस परिवर्तन के प्रभावी होने में कुछ समय लगेगा और यह उधारकर्ताओं को अनुकूल रूप से प्रभावित करेगा, जबकि ऋणदाताओं को यह कदम चुनौतीपूर्ण लग सकता है। बैंकों और अन्य ऋणदाताओं को इस क्षेत्र में ऋण पर काम करना होगा, ताकि ऋणदाताओं के पास अधिक विकल्प हों और साथ ही ऐसे ऋणों की संरचना पर भी विचार करना होगा, जो निश्चित और अस्थायी दर वाले ऋण संयोजनों को मिला सकते हैं, ताकि उनकी पेशकश प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ उनके लिए लाभदायक भी हो।


जानकारी के अनुसार, उधार लेने वालों के लिए जब यह नया नियम लागू होगा, तो यह उन्हें राहत प्रदान करेगा, लेकिन यह नए उधार लेने वालों के लिए नई शर्त के साथ भी लागू हो सकता है, जरूरी नहीं कि यह सिर्फ मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए ही हो। यदि आप एमएसएमई क्षेत्र में उधारकर्ता हैं, तो ऐसे परिणाम की तलाश करें, जो आपके पक्ष में हो और जुर्माने के कारण ऋण अदायगी को स्थगित न करे, क्योंकि इस प्रस्तावित परिवर्तन से लाभ उठाने के लिए मौजूदा ऋणों को पुनर्गठित करने के भी उपाय होंगे।
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