आखिरकार भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दर घटा ही दी, जिसका उद्योग जगत, सरकार और कर्ज चुकाने वाले लोगों को बेसब्री से इंतजार था। ज्यादातर बैंकों ने अपनी कर्ज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की, जबकि कुछ बैंक ब्याज दरों में और कटौती का इंतजार कर रहे हैं। कुल मिलाकर इस समय अर्थव्यवस्था में तेजी की उम्मीद की जा रही है। ब्याज दर में कटौती की घोषणा से शेयर बाजार का रुख अनुकूल है। देखने वाली बात अब यह है कि कॉरपोरेट जगत कब इस खुशी में शामिल होता है।
केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में कटौती का समय अच्छा चुना, क्योंकि त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है, जो लोगों को खर्च करने के लिए प्रेरित करता है। ब्याज दरों में कमी उन लोगों के लिए वरदान है, जो कर्ज चुका रहे हैं और जो कर्ज लेना चाहते हैं। इसलिए क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर छूट के अलावा, होम लोन, कार लोन एवं पर्सनल लोन लेने की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। बिक्री का यह मौसम मांग बढ़ाएगा, जिसका अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ता है। इस मौसम में न केवल बिकने के लिए तैयार और गोदामों में रखे बहुत माल खप जाएंगे, बल्कि ताजा उत्पादन को भी गति मिलेगी।
हाउसिंग लोन के मामले में यदि 2009 के दौर को याद करें, जब बैंकों ने दो-तीन वर्षों के लिए शुरू में बहुत कम ब्याज दर पर आवासीय कर्ज देना शुरू किया था, तब कर्ज लेने वालों में तेजी दिखाई पड़ी थी। ऐसा ही कुछ इस बार भी होने की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि हाउसिंग सेक्टर सुस्ती के दौर से बाहर निकलना चाहता है। जाहिर है, फ्लोटिंग लोन लेने वालों को ज्यादा फायदा मिलेगा, जबकि फिक्स्ड लोन पर ज्यादा लाभ नहीं है। रिजर्व बैंक ने आवासीय कर्ज की कुछ श्रेणियों के लिए जोखिम भार कम करने की भी घोषणा की है। धीरे-धीरे विदेशी निवेशकों के लिए कर्ज प्रतिभूतियों में निवेश की सीमा भी घटाई जाएगी और विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारी निवेश की अनुमति दी जाएगी।
इसके साथ ही कई चीजें अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं-मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में कटौती की है और हर दूसरा संकेतक मौजूदा स्तर से केवल ऊपर ही जा सकता है। जिस तरह से यह सरकार देश में व्यापार सहजता के मुद्दे पर काम कर रही है, कॉरपोरेट जगत के लिए पाने को काफी कुछ है। ब्याज दरों में कटौती से उन्हें भी यह विकल्प मिला है कि वे अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ऊंची दरों पर लिए कर्ज के पुनर्गठन के लिए फिर से बातचीत कर सकें। बहुत-सी स्थगित और देरी से चल रही परियोजनाएं भी फिर शुरू होंगी। इसके अलावा निवेश व्यवस्था को फिर से शुरू करने के लिए कॉरपोरेट के लिए सरकार की ओर से नीति परिवर्तन के भी संकेत हैं। अब तक भारतीय शेयर बाजार को किसी गंभीर खतरे का सामना नहीं करना पड़ा है। हां, अगस्त और सितंबर के महीने में बाजार दस फीसदी जरूर गिर गया था, पर इसका कोई व्यापक असर नहीं पड़ा। इसी तरह कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी ने हमारा आयात बिल भी कम कर दिया है।
चीन की मुद्रा के अवमूल्यन और अन्य उभरते बाजारों द्वारा उठाए कदमों को देखते हुए भारतीय निर्यात को ध्वस्त होने से बचाए रखने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर में कटौती से रुपया काफी कमजोर हो सकता है। अन्य उभरते बाजारों में मुद्रा के अवमूल्यन से रुपये का गिरना भी तय है। निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने या घरेलू अर्थव्यवस्था को सस्ते आयात की बाढ़ से बचाने के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
भाजपा से लोगों को भारी अपेक्षाएं हैं, क्योंकि मई, 2014 से बाजार इसी उम्मीद में चढ़ा है। लेकिन सरकार के सामने राज्यसभा की चुनौती है, जहां उसके पास बहुमत नहीं है और वह जरूरी सुधारों को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। बिहार में जारी मौजूदा विधानसभा के अलावा भाजपा को वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल में और फिर वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का सामना करना है। अगर इन राज्यों में उसका प्रदर्शन अच्छा रहता है, तो वह राज्यसभा में अपने पक्ष में संख्याबल जुटा सकती है और तभी सुधार के मोर्चे पर उम्मीद बंधती है।
ब्याज दर में कटौती से सबसे ज्यादा नुकसान बचत करने वालों को हुआ है। सबसे पहले बैंकों ने जमा पर ब्याज दरों में कटौती की। जब कर्ज पर ब्याज दरों में कटौती हो रही है, ऐसे में बैंक उच्च लागत पर धन जुटाने का जोखिम नहीं लेना चाहते। बचत खातों या सावधि जमा पर निवेशकों को कम ब्याज मिलेगा।
लेकिन एक उम्मीद है। कम ब्याज दरों से उपभोग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, यानी उद्योग जगत और अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर विकास का मौका होगा। कम ब्याज खर्च के कारण भी ज्यादा लाभ होगा। इसके अलावा, कम ब्याज दर होने के कारण पैसा कम लाभ देने वाले कर्ज के मुकाबले शेयर बाजार में जाएगा। यह उनके लिए निवेश का उपयुक्त अवसर है, जो लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था के मजबूत और सक्रिय होने की राह देख रहे थे।
भारतीय निवेशकों और उपभोक्ताओं में उम्मीद को बरकरार रखने के लिए कॉरपोरेट आय बढ़ाने की जरूरत है, जिसमें एक और तिमाही की देरी होती दिख रही है। इस बीच सरकार से यह उम्मीद ही निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रख सकती है, कि वह सही दिशा में काम करे और रोजगार सृजन, नौकरी में बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था में समग्र विकास से संबंधित सुधारों की घोषणा करे। कुछ हद तक शेयर बाजार उम्मीद बनाए हुए है, क्योंकि वहां लाभ दिख रहा है, भले ही वह धीमी गति से हो। पिछले दस महीनों में रघुराम राजन और उनकी टीम ने नियमित रूप से दरों में कटौती की है, जिसका अनुकूल प्रभाव आने वाले दिनों में दिखने भी लगेगा। लेकिन तब तक हमें न्यूटन के गति के नियम के सफल होने की उम्मीद करनी चाहिए कि हर क्रिया की बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसलिए ब्याज दरों में कटौती से उम्मीद करनी चाहिए कि अर्थव्यवस्था, खर्च और निवेश में वृद्धि होगी।
-लेखक आउटलुट मनी के संपादक हैं