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Fri, 04 Aug 2017 05:01 PM IST
मरिआना बाबर
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मरिआना बाबर
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पाकिस्तान के संसदीय इतिहास में यह पहली बार था, जब सदन के नवनिर्वाचित नेता अपना स्वीकृति भाषण देने के लिए अपनी कुर्सी से उठे, और मंच पर उनकी पार्टी और सदन के पूर्व नेता का बड़ा-सा चित्र प्रदर्शित किया गया। पाकिस्तान के 18वें प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने अपने भाषण में अब भी नवाज शरीफ को 'अवाम का प्रधानमंत्री' बताया और उनकी नीतियों को जारी रखने की कसम खाई। निर्वाचित होने से ठीक पहले उन्होंने पत्रकारों को बताया कि 'मुझे इस पद की कोई लालसा नहीं थी। मेरी पार्टी ने मुझे यहां भेजा, इसलिए मैं यहां हूं। मुझे कोई विकल्प नहीं दिया गया। अगर मुझे विकल्प दिया जाता, तो मैं इस पद को कभी नहीं स्वीकार करता।' 
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पाकिस्तान की संक्षिप्त लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यह भी पहली बार हुआ कि पाकिस्तानी सेना की ट्रिपल वन ब्रिगेड को रेड जोन या रावलपिंडी और इस्लामाबाद में कहीं भी सुरक्षा नियंत्रण के लिए तैनात नहीं किया गया। इस बिग्रेड का इस्तेमाल मुल्क में मार्शल लॉ की घोषणा होने और प्रधानमंत्री को बर्खास्त किए जाने की स्थिति में होता है। संसद ने संविधान के उस अनुच्छेद 52 बी को खारिज कर दिया है, जिसके जरिये पदासीन राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं। बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ, दोनों को राष्ट्रपति ने बर्खास्त किया था। इसलिए 2017 में (सैन्य) प्रतिष्ठान ने लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए प्रधानमंत्री को नए तरीके से हटाने की कोशिश की और इसमें सफल भी हुआ। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया गया। उसी सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में जुल्फीकार अली भुट्टो को फांसी देकर ‘न्यायिक हत्या’ को अंजाम दिया था और सभी मार्शल लॉ को आवश्यकता का कानून बताकर वैध घोषित किया था। सैन्य प्रतिष्ठान ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि किसी भी चुने हुए प्रधानमंत्री को पांच वर्षों का अपना कार्यकाल पूरा करने की इजाजत नहीं है।

अमर उजाला के पाठकों को यह बताना जरूरी है कि पनामा पेपर्स में नवाज शरीफ का नाम शामिल नहीं था। उसमें उनके दोनों बेटे (जो राजनीति में नहीं हैं) और बेटी का नाम था और तीनों वयस्क हैं, इसलिए उनके पिता उनके व्यावसायिक कामकाज के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसके बावजूद एक पदासीन प्रधानमंत्री को सुनवाई में पेश होना पड़ा और संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने उनसे पूछताछ की। जेआईटी में सैन्य खुफिया और इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रतिनिधियों के अलावा कुछ कनिष्ठ स्तर के नौकरशाह भी शामिल थे। जेआईटी के निष्कर्षों ने सबको हैरान कर दिया। क्या सैन्य प्रतिष्ठान ने शरीफ के खिलाफ वर्षों पहले सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया था? पाकिस्तान में कोई भी इतना कुशल नहीं है कि मात्र कुछ हफ्तों में इतना सारा सबूत इकट्ठा कर सके। शुक्र है कि लोकतंत्र को पटरी से नहीं उतारा गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नवाज शरीफ प्रधानमंत्री आवास छोड़ मरी हिल्स पर बने अपने निजी आवास में चले गए। उनके मंत्रिमंडल को भी बर्खास्त कर दिया गया। नए प्रधानमंत्री जल्द ही अपने मंत्रिमंडल की घोषणा करेंगे। पाकिस्तान में 2018 की गर्मी के प्रारंभ में नई सरकार चुनने के लिए आम चुनाव होने वाले हैं।
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नवाज शरीफ के समर्थकों के अलावा मुल्क में ऐसे अनेक लोग हैं, जो मानते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला काफी दोषपूर्ण है। शरीफ परिवार के खिलाफ पनामा पेपर्स में निहित कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। पनामा पेपर्स में नवाज शरीफ का कोई जिक्र नहीं है। नवाज शरीफ ने बताया कि जब वह निर्वासन में थे, तो दुबई का वीजा हासिल किया था, जहां उनके बेटे ने उन्हें एक कंपनी का प्रमुख नियुक्त किया था। दस्तावेज बताते हैं कि इसके लिए उन्हें वेतन मिलता था, लेकिन खाते से उन्होंने एक भी दिरहम (संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा) नहीं निकाला, इसलिए उन्होंने अपने टैक्स रिटर्न में उस खाते की घोषणा नहीं की। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 62 के तहत उन्हें अयोग्य ठहराया, जो कहता है कि संसद सदस्यों को 'सादिक' और 'अमीन' होना चाहिए, जो वास्तव में कोई नहीं होता है। पैगंबर को छोड़कर कोई भी ऐसा दावा नहीं कर सकता है। संविधान में यह प्रावधान एक सैन्य तानाशाह जिया उल हक ने राजनेताओं पर नियंत्रण रखने के लिए शामिल करवाया था।
 
अंग्रेजी दैनिक द न्यूज ने अपने संपादकीय में कहा है कि 'व्यापक प्रभावों वाला यह निर्णय, जिसने एक प्रधानमंत्री को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया, लगता है कि एक संकीर्ण आधार पर दिया गया। कोई भी दंड अपराध के अनुपात में होना चाहिए, पर इस मामले में क्या उस मानक को पूरा किया गया? अखबार ने यह भी लिखा है कि निर्वासन में वीजा प्राप्त करने के मामले में भी संविधान प्रधानमंत्री को मुनाफे का एक और पद रखने से नहीं रोकता है और वेतन से संबंधित उनकी चूक के लिए उन्हें अयोग्य ठहराना संकीर्णता ही नहीं, बल्कि कानून का गलत मतलब निकालना है।
 
नए प्रधानमंत्री से किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता न्यायपालिका और सेना के साथ संबंधों को संतुलित करना और सुधारना है। खबरें हैं कि उनकी पार्टी उन्हें चुनाव तक प्रधानमंत्री बनाए रख सकती है और पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ को प्रांत में विकास कार्यों को जारी रखने के लिए कह सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि नए मंत्रिमंडल के गठन में अंतिम फैसला नवाज शरीफ का होगा, जिसमें एक बड़ा परिवर्तन यह होगा कि गृह मंत्री चौधरी निसार से पार्टी इस्तीफा मांगेगी, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही पार्टी छोड़ गए थे। हालांकि विदेशी मौद्रिक संस्थाओं ने चिंता जताई है। न्यूयॉर्क स्थित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने आशंका जताई है कि पनामा पेपर्स मामले में नवाज शरीफ को अयोग्य ठहराए जाने से पाकिस्तान में नीतियों की निरंतरता को लेकर संकट पैदा हो सकता है, जिससे उसकी रेटिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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