फाइल
एक सफेद स्वच्छ
कागजी मैदान,
जहां पढ़े-लिखे पहलवान
बड़ी शिष्टता के साथ,
लड़ते हों घमासान।
दफ्तर
दैनिक समस्याओं जैसी
छोटी बातों को भूलकर,
जहां आदमी
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर बहसंे कर,
बहुधा आराम करता हो थककर,
ऐसा विश्रामघर।
पार्टी
बिना किसी दुराव-छिपाव,
मिल-बांटकर खाने के लिए
जिस संगठन का,
हुआ हो प्रादुर्भाव।
और खा-पी चुकने के बाद
जिसके घटकों में होने लगे
स्वाभाविक बिखराव।
योजना
काम हो न हो
रोजगार दिए जाइए,
विदेशी कर्जों को
मिल-बांटकर खाइए।