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आईना : बदहाली पाकिस्तान का पर्याय बन चुकी है, दिखावे के लोकतंत्र में अवाम की फजीहत

वीरेंदर कपूर
Updated Tue, 27 May 2025 07:03 AM IST

सार

पाकिस्तान की भूमि के 43 फीसदी हिस्से और खनिजों व तेल से समृद्ध बलूचिस्तान क्षेत्र अलग होने को तैयार है। सिंध और खैबर क्षेत्र भी उबल रहे हैं। 1958 के बाद से चौबीसवें बेलआउट को आईएमएफ ने शर्तों के साथ मंजूरी दी है। जीडीपी के मामले में महाराष्ट्र व तमिलनाडु जैसे भारतीय राज्य उससे कहीं आगे हैं।
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पाकिस्तान - फोटो : एएनआई


हाल ही में कुछ विद्रोह हुए थे, जिनमें एक कोर कमांडर के घर पर लोगों ने हमला किया था, लेकिन उससे भी कोई सबक नहीं सीखा गया और स्थिति फिर से वैसी ही हो गई, जैसी पहले थी। पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे चार प्रांतों वाले इस देश को सिर्फ ‘पंजाबी पुत्तर’ चलाते हैं।


सेना के शीर्ष अधिकारी पंजाबी हैं और सभी पंजाबी भाषा में धाराप्रवाह बोलते हैं, जिसमें थोड़ी उर्दू भी होती है, जिससे वे बहुत सभ्य दिखते हैं-हालांकि वे वास्तव में सभ्य नहीं हैं। एक औसत पाकिस्तानी विभाजित व्यक्तित्व की तरह दिखता है। जब आप उन्हें शेरवानी या पठानी सूट पहने, अच्छी तरह से तैयार हुए देखते हैं, तो वे एक बेहतरीन नस्ल के लगते हैं। लड़कियां, उनके अच्छे दिखने और कथित अच्छे व्यवहार के प्रति आकर्षित हो जाती हैं, लेकिन बाद में उन्हें क्रूर वास्तविकता का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उन्हें एके-47 दे दीजिए, तो वे महीनों तक नहीं नहाएंगे, अपना चेहरा ढक लेंगे और जानवरों की तरह व्यवहार करेंगे।


जिस तरह महान अभिनेता गिरगिट की तरह होते हैं-और एक पल में एक अच्छे व्यक्ति से शैतान में बदल सकते हैं। पाकिस्तान का चाल-चरित्र भी गिरगिट जैसा ही है। ब्रेन वाश (प्रलोभन देकर बहकाना) एक सामान्य बात है, जहां लोगों को सिखाया जाता है कि वे कुछ न सोचें। लेकिन पाकिस्तानी एक कदम आगे बढ़कर युवाओं की मति भ्रष्ट करते हैं और फिर उन्हें जिहाद के रास्ते पर धकेल देते हैं, ताकि आप उनके कहे अनुसार काम करें। वरना एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर अपने शरीर पर बम बांधकर खुद को कैसे उड़ा सकता है? वे पहले अपने ही मुल्क के लोगों को जन्नत का लालच देकर जिहाद के रास्ते पर धकेल देते हैं और उनके मन में नफरत और हिंसा का बीज बो देते हैं। भारत के साथ सभी युद्ध हारने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है। भारत से नफरत करना उसका राष्ट्रीय रुख है।


पाकिस्तानी सेना खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए भारत के खिलाफ षड्यंत्र रचती रहती है। वर्ष 1965 एवं 1971 में युद्ध हारने के अलावा कारगिल में भी उसे भारी नुकसान पहुंचा था। फिर भी पाकिस्तानी फौज भारत के खिलाफ आतंकी हमले करवाती रही, क्योंकि भारत की तत्कालीन सरकार ने किसी भी आतंकवादी हमले के बाद कभी जवाबी कार्रवाई नहीं की। लेकिन पिछले दशक में चीजें बदल गईं और भारत एक नए राष्ट्र के रूप में उभरा-एक बहादुर नेतृत्व, नए दृष्टिकोण के साथ नया भारत, जिसने सशस्त्र बलों को पहलगाम हमले का जवाब देने की पूरी आजादी दी। अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। सशस्त्र बल और अर्धसैनिक बल हमेशा से मजबूत रहे हैं, लेकिन पिछले एक दशक में चीजें तेजी से बेहतर हुई हैं।


ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को करारी चोट पहुंची है। फिर भी वह बेशर्मी से डींगें हांक रहा है कि उसने सौ घंटे की लड़ाई में जीत हासिल की है। पाकिस्तान आंतरिक अशांति की चपेट में है। बलूचिस्तान पाकिस्तान की भूमि का 43 फीसदी हिस्सा है और खनिजों और तेल से समृद्ध है। पंजाबी सरकार ने उन्हें भूखा रखा, उन्हें शर्मिंदा किया और नियमित रूप से पीटा और अब वे एक नए राष्ट्र के रूप में अलग होने के लिए तैयार हैं। उसी तरह सिंध और खैबर क्षेत्र भी उबल रहा है। बलूचिस्तान पूरे देश का मेरुदंड है, सबसे नीचे सिंध है, कराची में एकमात्र तटीय संपर्क है। अगर बलूचिस्तान और सिंध पाकिस्तान से अलग हो गए, तो पाकिस्तान के पास केवल पंजाब और पख्तूनख्वा क्षेत्र रह जाएगा।


आर्थिक संकट की वजह से ही हाल ही में इसे 1958 के बाद से 24वें बेलआउट के लिए आईएमएफ की मंजूरी मिली है, उस पर भी आईएमएफ ने कई शर्तें थोप दी हैं। खास बात यह है कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे प्रमुख भारतीय राज्यों की जीडीपी पाकिस्तान की जीडीपी से आगे निकल गई है। पाकिस्तानी पासपोर्ट का कोई मूल्य नहीं है और इसे नीची निगाह से देखा जाता है। पाकिस्तान का कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार नौ मई को 15.61 अरब डॉलर रह गया है, जबकि भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर है। ऐसे में भारत से उसकी क्या तुलना हो सकती है!
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कुछ भारतीय मूर्खतापूर्ण तरीके से कहते हैं कि हम एक ही मांस और खून के हैं। ऐसा नहीं है, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिफ मुनीर ने अपने ही लोगों का जिक्र करते हुए स्पष्ट कहा कि कोई भी मुसलमानों के साथ नहीं रह सकता। उनका संदेश है कि ‘हम नहीं सुधरेंगे।’ बदहाली का पर्याय बन चुके पाकिस्तान के लोगों को अगर जीवित रहना है, तो उन्हें एकजुट होना होगा। उन्हें अपनी अगली पीढ़ियों के लिए बलिदान देने की जरूरत है।


केवल वहां के आम लोग ही बदलाव ला सकते हैं। विश्व भू-राजनीति में उन्हें नष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपना भविष्य फिर से लिखना होगा, छोटी शुरुआत करनी होगी, नफरत को त्यागना होगा और केवल ऊपर वाले पर निर्भर नहीं रहना होगा, क्योंकि ऊपर वाला उन्हीं की मदद करता है, जो खुद की मदद करते हैं। एक विफल राष्ट्र के लिए उन लोगों को जिम्मेदार माना जाता है, जिन्होंने उस मुल्क को विफल बनाया है, और वे आम तौर पर उस देश के लोग ही होते हैं।
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