अमेरिकी हास्य अभिनेता टेरी प्रैचेट कहते थे कि मौत और टैक्स में मौत बेहतर है, क्योंकि वह एक बार ही आती है। दूसरी तरफ, सरकारों को लगता है कि लोग टैक्स ही नहीं चुकाते। भारतीय नेताओं की तो यह स्थायी शिकायत है कि यहां लोग टैक्स नहीं देते। यह बात दीगर है कि टैक्स और उसका संग्रह बढ़ता जाता है। यह बहस अनंत काल से चल रही है कि टैक्स मजबूरी है या जिम्मेदारी। सरकारें हमेशा से ऐसे जतन करती रही हैं कि अधिक से अधिक लोगों को टैक्स चुकाने पर राजी किया जाए। एक बार अमेरिका में तो राजस्व की कमी से परेशान सरकार ने एक कार्टून चरित्र को ही अपना टैक्स प्रचारक बना दिया। आइए, पकड़िए अपनी सीट टाइम मशीन में...
हम उड़ चलते हैं अमेरिका की तरफ, जहां चुनाव की गहमागहमी बढ़ रही है। मगर हम कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप से मिलने नहीं जा रहे हैं। हम सीधे पहुंच रहे हैं 1930 के दशक में, जो अमेरिका का सबसे घटनाबहुल दशक था। इसी दौरान आई थी महामंदी, फिर दूसरा विश्वयुद्ध और पर्ल हार्बर पर जापान का हमला। हम मिलने वाले हैं हेनरी मोर्गनथाउ जूनियर से, जो अमेरिका के सबसे मशहूर यहूदी हैं। वाशिंगटन के गलियारे उनकी ताकत और सूझबूझ से लबरेज हैं। हेनरी मोर्गनथाउ के पिता हेनरी मोर्गनथाउ सीनियर भी खासे नामवर व्यक्ति थे। मगर बेटा बाप से बहुत आगे है। अब हमारे सामने जो घटने वाला है, वह हेनरी मोर्गनथाउ जूनियर को इतिहास में अनोखी जगह देगा। वाशिंगटन के कॉफी हाउस में आपने यह सुन ही लिया होगा कि मोर्गनथाउ खेती के विशेषज्ञ हैं। पहले विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सरकार के खेती विभाग में काम कर चुके हैं। वह राष्ट्रपति हर्बर्ट हूवर का कार्यकाल था। पर वाशिंगटन में उनका रसूख बढ़ा फ्रैंकलिन रूजवेल्ट के साथ। रूजवेल्ट और मोर्गनथाउ के बीच गाढ़ी दोस्ती के किस्से खूब सुने जा रहे हैं। यह साल 1934 है। रूजवेल्ट राष्ट्रपति हैं और मोर्गनथाउ उनके वित्त मंत्री। मोर्गनथाउ रूजवेल्ट के मंदी निवारण अभियान के वित्तीय मैनेजर थे। अमेरिका को गहरी मंदी से उबारने के लिए संसाधनों का जुगाड़ मोर्गनथाउ ने ही किया है। आपको पता तो चल ही गया होगा कि दूसरे विश्वयुद्ध की तोपें गरजने लगी हैं। हिटलर के यहूदी संहार के खिलाफ अमेरिका की सबसे बड़ी आवाज बनकर गरज रहे हैं हेनरी मोर्गनथाउ। उनके कहने पर अमेरिकी सरकार ने बार रिफ्यूजी बोर्ड बनाया है, जिससे जनसंहार के शिकार यहूदियों को मदद दी जा रही है। इस बीच पर्ल हार्बर पर जापान ने हमला कर दिया है। दूसरे विश्वयुद्ध से अब तक दूर रहा अमेरिका अब इस लड़ाई में कूदने वाला है। मगर हम यहां से उड़ चलते हैं कैलिफोर्निया, क्योंकि टैक्स की जिस कहानी को तलाशते हुए हम करीब 80 साल पीछे आए हैं, उसके लिए मनोरंजन के नायक वाल्ट डिज्नी से मिलना होगा। हां, वही डोनाल्ड डक, मिकी माउस और इन जैसे असंख्य चरित्र देने वाले प्रसिद्ध कार्टून महानायक वाल्ट डिज्नी। अमेरिका विश्वयुद्ध में शामिल होने के लिए हथियार बांध रहा है। वित्त मंत्री मोर्गनथाउ को युद्ध के लिए संसाधन चाहिए। अमेरिका में वार बॉन्ड जारी कर दिए गए हैं। मोर्गनथाउ को लगता है कि अगर अमेरिकी लोगों को समय पर टैक्स चुकाने के लिए प्रेरित किया जाए, तो संसाधनों की किल्लत दूर हो जाएगी।
यह दिसंबर, 1941 है। युद्ध की तैयारियों के बीच हम बरबैंक, कैलिफोर्निया आ गए हैं, जहां वाल्ट डिज्नी मोर्गनथाउ का संदेश पढ़ रहे हैं। बरबैंक से पहली उड़ान पकड़ डिज्नी वाशिंगटन डीसी पहुंच रहे हैं। डिज्नी को लगा था कि उन्हें युद्ध बॉन्ड के प्रचार में मदद करनी होगी, मगर मोर्गनथाउ का एजेंडा दूसरा था। मोर्गनथाउ ने डिज्नी स्टूडियो को ऐसी फिल्म बनाने के लिए कहा है, जो लोगों को वक्त पर टैक्स चुकाने के लिए प्रेरित करे। केवल छह सप्ताह का समय दिया गया है। यह फिल्म फरवरी, 1942 तक सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। डिज्नी स्टूडियो में बनती सभी फिल्में रोक कर एक शॉर्ट फिल्म पर काम शुरू हो गया है। डोनाल्ड डक सबसे बड़ा कार्टून स्टार है, जो इस फिल्म का नायक होगा। जो ग्रांट और विल ह्यूमर ने फिल्म लिख डाली है। नाम है द न्यू स्पिरिट। स्टोरीबोर्ड लेकर वाल्ट डिज्नी फिर वाशिंगटन लौट आए हैं। बैठक लगी है। मगर यह क्या? मोर्गनथाउ डोनाल्ड डक के प्रशंसक नहीं हैं, उन्हें फिल्म का मजमून पसंद नहीं आया। कार्टूनों के निर्माता डिज्नी वित्त मंत्री मोर्गनथाउ से नाराज हैं। हों भी क्यों न? डोनाल्ड डक, डिज्नी स्टूडियो का मेगास्टार है। उसके नाम पर फिल्में दौड़ती हैं। यह फिल्म सिनेमावरों को मुफ्त दी जानी है, जिसके कारण डिज्नी स्टूडियो की अन्य फिल्मों की बुकिंग कैंसिल हो रही है। डिज्नी की कंपनी को 40,000 डॉलर का नुकसान होने जा रहा है। इधर 10 लाख डॉलर का कर्ज बैलेंस शीट में खड़ा है। डिज्नी स्टूडियो वहुत कुछ कुर्बान कर रहा है, मगर मोर्गनथाउ को फिल्म समझ में ही नहीं आ रही। पर वक्त डिज्नी के साथ है, मोर्गनधाउ के साथ नहीं। सरकार के पास वक्त कम है। अमेरिका में आयकर रिटर्न भरने की तारीख 15 मार्च तक है। इसलिए द न्यू स्पिरिट को मंजूरी मिल ही गई। अब हम न्यूयॉर्क के सिनेमाघर के सामने हैं। यहां पहली बार द न्यू स्पिरिट दिखाई जा रही है। फिल्म छा गई है। इस फिल्म में डोनाल्ड डक एक अभिनेता है। उसे टैक्स चुकाने का राष्ट्रीय कर्तव्य समझ में आता है, तो वह उत्साह में अपना रिटर्न लेकर सीधे वाशिंगटन पहुंच जाता है। इस फिल्म का डायलॉग मशहूर होने लगा है- टैक्सेस टू बीट द एक्सिस। अर्थात हिटलर-मुसोलिनी के गठजोड़ (एक्सिस) को हराने के लिए टैक्स चुकाना जरूरी है। अमेरिकी अखबार बता रहे हैं कि द न्यू स्पिरिट सुपरहिट हुई है।
टाइम मशीन में वापसी के सफर में आपको पता चलेगा कि 1941 में अमेरिका में 1.3 करोड़ लोगों ने टैक्स भरा था। मगर डोनाल्ड डक के प्रोत्साहन से इसकी तादाद पांच करोड़ हो गई। यह खबर पढ़ते हुए आप कुर्सी की पेटी बांधिए कि वॉल्ट डिज्नी को अमेरिकी सरकार से इस फिल्म की लागत का भुगतान नहीं हुआ। डिज्नी को करीब 80,000 डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। जब यह खबर बाहर आई कि वाल्ट डिज्नी फिल्म को पेमेंट मांग रहे हैं, तो नाराज लोगों ने नो डाइम फॉर डिज्नी का अभियान शुरू कर दिया। बहरहाल, करदाताओं में राष्ट्रभक्ति जगाने वाली डिज्नी की द न्यू स्पिरिट फिल्म को 1943 का शॉर्ट फिल्म का ऑस्कर मिला। डिज्नी को और डोनाल्ड डक को भी। इसी समारोह में मुख्य ऑस्कर अवॉर्ड मिला था गजब की मजेदार डिज्नी मूवी डोनाल्ड डक की ढेर फ्यूहरर्स फेस को। तो अब हम दिल्ली में उतर रहे हैं। आपको पता है कि अब जमीन, शेयर और सोना बेचने पर टैक्स के नियम बदल गए हैं। हिसाव लगाइए। हम फिर मिलेंगे, अगले सफर पर...