एक जमाना था जब पूर्वी गोलार्द्ध के लोग पश्चिमी गोलार्द्ध को विस्मय की दृष्टि से देखते थे और वहां वाले यहां वालों को हिकारत की निगाह से। वक्त का पहिया घूमा। सारी दूरियां मिट गईं और दुनिया एक हो गई। अब तो कहा जाता है कि आप नाश्ता दिल्ली में, लंच लंदन में और डिनर न्यूयॉर्क में कर सकते हैं। यह सब कैसे हुआ? इसे जानने के लिए पढ़िए इस हफ्ते की किताब 'करमा कोला'। भारत को कर्मयोग की भूमि कहा जाता है। वेदव्यास ने छलिया कृष्ण के मुंह से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध से पूर्व गीता सुनाते हुए यही उपदेश दिया था।
इस किताब को पढ़ते हुए आपको लगेगा कि अगर कोकाकोला हमारे जीवन में न आया होता, तो पता नहीं बिना तिथि के आगंतुकों का स्वागत हम कैसे करते? और बच्चों को नियंत्रण में कैसे रखते? विज्ञापन की दुनिया का इतना बड़ा आधार कैसे खड़ा होता? पर ये सब सतही उपादान हैं।
'करमा कोला' की लेखिका गीता मेहता ने अपनी बात कहने के लिए खासा व्यापक फलक चुना है। उन्होंने धर्म और सेक्स को पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले सेतुबंध के रूप में इस्तेमाल किया है। यह एक सर्वविदित यथार्थ है कि पश्चिम में अपने जीवन से हाल-बेहाल युवा भारत में शांति की तलाश में आते रहे हैं। पिछली शताब्दी के छठे और सातवें दशक में अस्त-व्यस्त कपड़ों में एक पूरी पीढ़ी यहां बनारस से लेकर वृंदावन तक भटकती दिखाई देती थी। भक्ति वेदांत में ‘हरे कृष्ण’ नाम से एक अचूक सूत्र आज तक स्थापित है।
महेश योगी और रजनीश ने तो अमेरिका में घुसकर अपने अनुयायियों की जमात खड़ी कर दी। गीता मेहता ने इन सब पर अपनी बेबाक कलम चलाई है। वह गुदगुदाती हैं और अपने तीखे शब्द बाणों से झकझोरती भी हैं।
एक उदाहरण देखिएः
'भारतीय अपने देश को ऋषिभूमि के नाम से पुकारते हैं, अर्थात संतों की कर्मस्थली। हर जिज्ञासा के लिए एक महात्मा उपलब्ध है। मानो उसे यह दैवीअधिकार प्राप्त हो कि वह ज्ञान के प्रकाश से आलौकित करे। ऐसे भी ज्ञान बांटने वाले हैं, जो संशयवादियों को भी आश्वस्त करने का दम भरते हैं। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि मौखिक परीक्षण भी ज्ञान को पाने का एक मार्ग है।' हाल ही में एक कुलीन अंग्रेज ने ऐसे ज्ञानी-ध्यानी का अनुसरण करते हुए भारत के बारे में एक आश्चर्यजनक सत्य को खोज लिया। इस महाशय को पता चला कि सुदूर आंध्र प्रदेश के एक गांव में एक गुरु निवास करता है। वह केवल ज्ञानी ही नहीं था, बल्कि उसका मूत्र हर रोज एक सुगंधित गुलाब जल में परिवर्तित हो जाता था। एक दुर्गम यात्रा के बाद ये सज्जन उस गांव में जा धमके।
वहां उससे पहले कोई विरला ही पहुंच पाया था। उस अंग्रेज की वहां खासी आवभगत हुई। उसे सबसे अग्रिम पंक्ति में स्थान मिला और उसने वहां बैठकर मूत्रदान के दर्शन किए। उस महाशय ने दूर खड़े होकर सद्भावना से वह दृश्य देखा। वहां भक्तों का जमावड़ा था। वे गुरु के क्रियाकलाप के पूर्ण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। अचानक भक्तगण बड़े आदर भाव से गुरु को उनके शिविर की ओर ले गए। गुरु ने उन्हें अंदर आने का संकेत दिया। जब उनकी बारी आई तो गुरु ने उन्हें भी अपना प्रसाद दिया। उसे दुर्गंध का एहसास हुआ। बाहर आने पर उसका करतल ध्वनि से अभिनंदन हुआ।
सेक्स के मामले में गीता मेहता काफी निर्मम हैं। उनका निष्कर्ष है कि अधिकांश गेरुए वस्त्र साधु-संन्यासी इस आदिम वासना से पूरी तरह ओत-प्रोत हैं। उनका अंततः लक्ष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति ही है। अधिकांश आश्रमों का परिसर इसी से भरा रहता है। ‘राज’ नामक विख्यात उपन्यास की लेखिका गीता कलम की धनी हैं, पर उनकी लेखनी चटखारे नहीं देती। वह आज के परिदृश्य पर एक दुःखदायी सिंहावलोकन प्रस्तुत करती है। उनकी खोज है कि सोवियत संघ से अलग होकर मध्य एशिया के देशों से आने वाली गोरी चमड़ी की विदेशी महिलाएं आज भारत के अधिकांश नगरों में फैल चुकी हैं। उदाहरण के लिए उन्होंने कनॉट प्लेस को अपना खास निशाना बनाया है। उनका मानना है कि इस जाने-माने पर्यटन स्थल में दो धंधे खूब फल-फूल रहे हैं। एक है जाली पासपोर्ट और दूसरा है वेश्यावृत्ति। इसके अतिरिक्त आज दिल्ली अफ्रीकी युवाओं से लबालब भरी है। अक्सर ये युवक अफरा-तफरी में आते-जाते दिखाई देते हैं। एक बार इस लेखिका ने अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए अफ्रीकी नौजवान से बातचीत शुरू की। उसके लिए यह नया अनुभव था। उसने किसी प्रश्न का सीधा जवाब नहीं दिया। उससे पूछा गया कि क्या करते हो, तो उसने कहा, ‘मैं व्यापार करता हूं, विदेशी मुद्रा बेचने-खरीदने या फिर नशीली दवाओं का।’ भारतीय दर्शन के संदर्भ में उत्तर खोजें, तो करमा कोला को कर्म का विधान कहा जाएगा, कोला मिला हुआ।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया विश्लेषक और संस्कृतिकर्मी हैं।)