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मुद्दा: यमुना को अपने तारणहार का इंतजार...आरती-पर्यटन जनता को धोखे में रखने के सिवाय कुछ नहीं

ज्ञानेंद्र रावत
Updated Fri, 25 Oct 2024 05:31 AM IST

सार

दिल्ली की मुख्यमंत्री हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर यमुना को दूषित करने के आरोप लगाती हैं, जबकि यह दिल्ली प्रवेश करती है, तब साफ होती है।  
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यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला


दिल्ली हाईकोर्ट भी कह चुका है कि वर्तमान में यमुना नदी में प्रदूषण अब तक के उच्चतम स्तर पर है। हाईकोर्ट ने हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि नदी में फीकल कोलिफार्म का स्तर स्वीकार्य सीमा से 1959 गुना और वांछित सीमा से 9800 गुना ज्यादा है। दिल्ली-हरियाणा की जीवनदायिनी यमुना के जहरीले होते पानी को लेकर राजनीति तो पूरी हो रही है, पर काम कुछ नहीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी तो यमुना में प्रदूषण के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।


पता नहीं वह किस भूगोल के तहत इन दोनों राज्यों को यमुना के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगा रही हैं, जबकि यमुना जब पल्ला गांव में प्रवेश करती है, तब साफ होती है और उत्तर प्रदेश तो दिल्ली के बाद पड़ता है, जबकि निकट भविष्य में दिल्ली में सत्ता पर काबिज आप को पुनः सत्ता में वापसी के लिए विधानसभा चुनाव का  सामना भी करना है। उस हालत में आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विधानसभा चुनाव से पहले यह कहते नहीं थकते थे कि यमुना शुद्ध होने पर सबसे पहले उसमें मैं खुद ही स्नान करूंगा। वह दावा कहें या वादा, थोथा ही साबित हुआ। विडंबना यह कि आप सरकार के दस साल होने के बाद भी यमुना आज पहले से ज्यादा मैली है और अपने तारणहार की प्रतीक्षा में है।


दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की ही मानें, तो यमुना के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़ने वाले हिस्से में जल प्रवाह 23 घन मीटर प्रति सेकंड क्यूमैक्स कम है। लोकसभा की स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना के जल में भारी धातु के प्रदूषक तत्वों की भरमार है, जो जानलेवा बीमारियों के कारण हैं। समिति ने यमुना में पाए जाने वाले बीओडी, सीओडी और फीकल कोलीफार्म जैसे प्रदूषक तत्वों की ही सूची नहीं तैयार की है, बल्कि समिति ने इनके साथ-साथ नदी में पाए जाने वाले सेहत के लिए जानलेवा बन रही छह धातुओं यथा लैड, कॉपर, जिंक, निकेल, कैडमियम और क्रोमियम से होने वाले नुकसान की सूची भी तैयार की है।


समिति ने माना है कि लैड से वयस्कों में रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी नसों से संबंधित पैरीफेरल न्यूरोपैथी और खासकर बच्चों में काग्निटिव इंपेयरमेंट, कॉपर से सिरदर्द, किडनी संबंधी बीमारी, उल्टियां और दस्त के साथ नौसिया, जिंक से लिवर व किडनी से जुड़ी बीमारियां के साथ उल्टी-दस्त होने, निकेल से न्यूरोटॉक्सिक, जेनेटॉक्सिक और कार्सीनोजेनिक, कैडमियम से किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारी के साथ गैस्ट्रो व आंत्रशोध और क्रोमियम से न्यूरोनल डैमेज, हेपेटिक व गैस्ट्रो इंटैस्टाइनल जानलेवा बीमारियां जन्म लेती हैं।


समिति ने यमुना में झाग बनने से रोकने हेतु दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से प्रवाहित होने वाले समूचे सीवेज का ट्रीटमेंट किए जाने की जरूरत बताई है। समिति के अनुसार, यमुना के इस झाग का बड़ा कारण बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज में सर्फैक्टैंट्स और फास्फेट की मौजूदगी है। समिति ने जल संसाधन विभाग से ऐसे नियम, दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए कहा है कि जिसमें यमुना सहित देश की सभी नदियों में अपशिष्ट प्रवाहित किए जाने के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान हो।


समिति ने पर्यावरण मंत्रालय की इस बात पर खिंचाई की कि उसने 2018 में की गई सिफारिश पर एक्शन टेकन नोट दाखिल करने में देरी क्यों की? समिति ने जल संसाधन विभाग को सुझाव दिया है कि वह यमुना नदी के लिए भी स्वच्छ गंगा मिशन की तर्ज पर एक कोष की स्थापना करे, ताकि नदी की सफाई से जुडे़ कामों में पैसे की कमी आडे़ न आए। दिल्ली में प्रवाहित 22 किलोमीटर में यमुना सबसे ज्यादा दूषित है।
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यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक हरिद्वार और वाराणसी की तर्ज पर यमुना के घाटों का सुंदरीकरण कर पर्यटन स्थल बना देने से और वहां आरती का कार्यक्रम आयोजित करने से यमुना की बदहाली नहीं छिप जाएगी, यह जनता को धोखे में रखने के सिवाय कुछ नहीं। दरअसल, यमुना की बदहाली का अहम कारण यमुना का वोट बैंक न होना है। यदि ऐसा होता, तो यमुना कब की शुद्ध, निर्मल, अविरल और सदानीरा बन चुकी होती और कूड़ा गाड़ी कहें या मैला ढोने वाली के अभिशाप से मुक्त हो चुकी होती।
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