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क्या मोदी सरकार बैकफुट पर है

Sun, 17 May 2015 06:13 PM IST
तवलीन सिंह
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हमारे लिए आज भी राहुल गांधी देश के युवराज हैं। शक है मेरी बात पर, तो पिछले दिनों के अखबारों की सुर्खियां पढ़ने की तकलीफ करें। बस उस दिन की खबरें ही देख लें, जिस दिन युवराज साहिब तेलंगाना में पदयात्रा करने निकले थे। हर चैनल पर उस पदयात्रा की तस्वीरें थीं। जबकि उसी दिन काबुल में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें कई भारतीय मारे गए।
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दो महीने की छुट्टी से लौटने के बाद राहुल गांधी जहां गए हैं, उन्होंने जो कहा है, उसकी पूरी खबर दी गई है इतने उत्साह और प्रेम से, कि किसी ने यह भी कहने की हिम्मत नहीं की कि राहुल जी ने लोकसभा में बार-बार झूठ बोला है। अमेठी वाले उस फूड पार्क को लेकर झूठ। अपनी सरकार के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र के हाल को लेकर झूठ। मोदी सरकार के चरित्र को लेकर झूठ। भूमि अधिग्रहण के मामले को लेकर झूठ। यहां तक कि किसानों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी झूठ। ये तमाम झूठ बोले गए इस झूठ को साबित करने के लिए कि पिछली सरकार में किसानों के प्रति अधिक सहानुभूति थी। और हम हैं कि इतना भी नहीं पूछते युवराज से कि यह सच होता, तो किसान इतने बेहाल क्यों हैं? क्या उनकी यह दुर्दशा हुई है पिछले एक साल में ही?

हमने राहुल जी से इतना भी पूछने की तकलीफ नहीं की कि आज जो उनके दिल में किसान-मजदूरों के लिए इतनी हमदर्दी है, वह पिछले दस वर्षों में उन्होने व्यक्त क्यों नहीं की थी। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के समय मैंने अमेठी के कई ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया था और हैरान रह गई थी वहां की गरीबी, वहां की सड़कें, वहां के स्कूल देखकर। शिकायतें ही शिकायतें सुनने को मिलीं वहां के लोगों से अपने सांसद को लेकर। जब पूछा मैंने उनसे कि इतनी शिकायतों के बावजूद वे राहुल गांधी को क्यों दोबारा जिताते हैं, तो उन्होंने बेझिझक कहा कि उन्हें अच्छा लगता है अमेठी का वीवीईपी चुनाव क्षेत्र बने रहना, क्योंकि कभी न कभी तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
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ऐसा हो, न हो भविष्य में, हम कह नहीं सकते, लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि मीडिया को इतना प्रेम है राहुल गांधी से कि वह उनके हर कदम, हर शब्द की पूरी खबर देने को उत्सुक रहता है। इसका कारण यह है कि हमारे लिए गांधी परिवार आज भी शाही परिवार है, और इसके वारिस हैं राहुल गांधी। सो दिल्ली के मीडिया और और राजनीतिक गलियों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा है अगर किसी राजनेता की, तो वह हैं राहुल गांधी।

मेरे पत्रकार दोस्त जब भी शामिल होते हैं टीवी चर्चाओं में या लेख लिखते हैं अखबारों में, तो अक्सर कहते हैं कि राहुल गांधी ने मोदी सरकार को 'बैकफुट' पर ला दिया है। क्या मोदी सरकार वास्तव में एक वर्ष पूरा होने से पहले ही राहुल गांधी के सामने घुटने टेक चुकी है? आज अगर लोकसभा चुनाव होते हैं, तो क्या मोदी को बहुमत नहीं मिलेगा? मुझे तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता, पर दिल्ली की राजनीतिक गलियों में घूमने के बाद ऐसा कुछ क्षणों के लिए जरूर लगने लगता है। ऐसा राहुल जी के समर्थकों को भी लगने लगा है। स्पष्ट शब्दों में उनके कांग्रेसी साथी कहने लगे हैं कि वह मोदी सरकार को किसी हालत में चलने नहीं देंगे। ऐसी बातें करने लगे हैं ये लोग, जैसे अगला लोकसभा चुनाव कल ही होने वाला हो।
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